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अलफ़लाह विश्वविद्यालय से जुड़ा बड़ा घोटाला उजागर,  मृतक मालिकों के नाम पर ज़मीन बेचने के लिए जाली GPA का इस्तेमाल

नई दिल्ली । अलफ़लाह विश्वविद्यालय से जुड़ा एक सनसनीखेज़ ज़मीन घोटाला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और शिक्षा जगत दोनों को हिला कर रख दिया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मृतक भूमि मालिकों के नाम पर उनकी संपत्ति बेचने के लिए जाली GPA (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) तैयार की गई और उसी के आधार पर करोड़ों रुपये की जमीन का लेन-देन कर दिया गया।

कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?

जांच एजेंसियों को जमीन बिक्री से जुड़े कुछ दस्तावेज संदिग्ध लगे। सत्यापन के दौरान पाया गया कि जिन मालिकों के नाम पर GPA जारी हुई थी, वे कई साल पहले ही स्वर्गवासी हो चुके थे। GPA पर मौजूद हस्ताक्षर और फिंगरप्रिंट भी वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते।

घोटाले का कनेक्शन अलफ़लाह विश्वविद्यालय तक कैसे पहुँचा?

सूत्रों के अनुसार विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के माध्यम से इन जाली दस्तावेजों का उपयोग कर जमीन के सौदे किए गए। जमीन को विश्वविद्यालय विस्तार और निजी प्रोजेक्ट्स के नाम पर खरीदा-बेचा गया।कई सौदों में बाजार मूल्य से कम कीमत दिखाकर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की आशंका भी जताई जा रही है।

पुलिस व प्रशासन की कार्रवाई

रजिस्ट्री कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। दस्तावेज़ फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। संभावित आरोपियों की सूची तैयार की जा रही है, इसमें दलाल, रजिस्ट्री कर्मी, और विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ नाम शामिल बताए जा रहे हैं। धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज होने की पूरी संभावना।

कितने लोगों को पहुँच सकता है नुकसान?

जिन मृतक मालिकों की जमीन हड़पी गई, उनके वारिसों को बड़ा नुकसान। जाली GPA पर जमीन खरीदने वाले कई लोग भी अब कानूनी उलझनों में फंस सकते हैं। विश्वविद्यालय की छवि पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। जांच एजेंसियों ने पूरे प्रकरण को बड़ी भूमि धोखाधड़ी माना है और आने वाले दिनों में कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
यह मामला राज्य में GPA आधारित संपत्ति सौदों की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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