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देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में अध्यापकों की भूमिका पर राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

राष्ट्रीय शिक्षा नीति क्रांतिकारी शिक्षा नीति है : कुलपति प्रो.रेनू जैन,

अध्यापकों के सहयोग से सफल होगी राष्ट्रीय शिक्षा नीति : प्रो. सरोज शर्मा,

एनईपी के क्रियान्वयन में अध्यापकों की महत्वपूर्ण भूमिका : प्रो. नम्रता शर्मा,

इन्दौर ।  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में शुक्रवार को “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में अध्यापकों की भूमिका” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभांरभ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. रेनू जैन ने किया । यूजीसी के मानव संसाधन विकास केंद्र में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित इस संगोष्ठी में निदेशक प्रो. नम्रता शर्मा ने अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह देकर किया।

       इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. रेनू जैन ने कहा कि नई शिक्षा नीति में शिक्षकों की भूमिका बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह सफल होगी। प्रो जैन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को क्रांतिकारी शिक्षा नीति बताया। उन्होंने कहा कि इसमें सत्य, न्याय, सबको साथ लेकर चलने की बात है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण पर जोर दिया। उन्होंने ट्रेनिंग को एनईपी की बहुत ही महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रथम वर्ष में प्रमाण पत्र, द्वितीय वर्ष डिप्लोमा एवं तृतीय वर्ष डिग्री प्रदान की जाएगी । उन्होंने कौशल विकास की भी बात कही। प्रो जैन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सांस्कृतिक धरोहर बताया। विद्या ददाति विनियम, एवं वसुधैव कुटुंबकम की भावना व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो जैन ने संचार मातृभाषा में किए जाने पर विशेष बल दिया। मुख्य अतिथि निदेशक एनआईओएस प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि एनईपी बहुत ही प्रासंगिक विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ समाज के क्रियान्वयन में भी यह बहुत ही आवश्यक है। प्रो शर्मा ने ध्रुव और नचिकेता जैसे शिष्यों की बात करते हुए गुरुओं एवं गुरुकुलों के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। आजादी के बाद से लेकर वर्तमान तक बने विभिन्न शिक्षा आयोग के बारे में उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की समय बदलाव का है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए उन्होंने भागीरथ प्रयास किए जाने पर बल दिया। प्रो. शिरीष पाल ने कहा कि शिक्षा की दशा एवं दिशा के लिए अध्यापकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अवश्य पढ़ना चाहिए। उन्होंने करिकुलम फ्रेमवर्क के बारे में बात कही तो वहीं इनोवेशन, लर्निंग मेथड, खेल, कला इत्यादि विषयों पर भी अपने विचार रखें। इसके बाद आयोजित पैनल डिस्कशन में प्रो. दिनेश चहल, प्रो. सुनीता मागरे, डॉ. कनक शर्मा, डॉ.अरुण खरात, डॉ. शेफाली नागपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अपनी बात रखी। सेमीनार के प्रथम दिवस का संचालन सह_आयोजन सचिव डॉ. निशा सिद्दीकी ने किया। जबकि सेमीनार का संयोजन अनामिका यादव एवं आयोजन सचिव डॉ प्रतिभा शर्मा ने किया।

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