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सप्रे संग्रहालय पर एमसीयू बनाएगा डॉक्यूमेंट्री फिल्म : कुलपति. सुरेश,

सप्रे संग्रहालय ज्ञान तीर्थ : डॉ. कृपाशंकर चौबे,शांति निकेतन जैसा बने सप्रे संग्रहालय का परिसर : विजय मनोहर तिवारी,विजयदत्त श्रीधर पर केंद्रित पुस्तक ‘विजयदत्त श्रीधर: एक शिनाख्त’ पर हुई चर्चा,

भोपाल । माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के माखनपुरम परिसर में प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र एवं शोध संग्रहालय के संस्थापक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर पर केंद्रित पुस्तक ‘विजयदत्त श्रीधर: एक शिनाख्त’ पर ‘पुस्तक विमर्श’ का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के नालंदा पुस्तकालय में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो (डॉ) के.जी. सुरेश ने की, जबकि मुख्य अतिथि पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर थे। मुख्य वक्ता जाने-माने लेखक व महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. कृपाशंकर चौबे थे। विशिष्ट अतिथि पूर्व सूचना आयुक्त एवं वरिष्ठ पत्रकार विजय मनोहर तिवारी थे। कुलपति प्रो (डॉ) के.जी. सुरेश ने कहा कि श्रीधर जी ऐसी शख्सियत हैं, जिनकी भूमिका पत्रकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना में भी रही है। प्रो सुरेश ने कहा कि श्रीधर जी अपने आप में एक संस्था है। उन्होंने विश्वविद्यालय नवीन गठित सिनेमा अध्ययन विभाग द्वारा सप्रे संग्रहालय पर “द मेकिंग ऑफ सप्रे संग्रहालय” नाम से एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाए जाने की घोषणा की। प्रो सुरेश ने कहा कि सप्रे संग्रहालय यदि देश भर में नंबर वन है तो वह श्रीधर जी के कारण ही है। पत्रकारिता विश्वविद्यालय को पत्रकारों की नर्सरी बताते हुए प्रो सुरेश ने कहा कि यहां के विद्यार्थियों को सप्रे संग्रहालय जाकर पुस्तकों, अखबारों, पांडुलिपियों का अध्ययन करके और भी अधिक ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने कहा इस तरह दोनों संस्थाओं के बीच संवाद एवं सेतु स्थापित होगा।डॉ. कृपाशंकर चौबे ने पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला और उनके द्वारा स्थापित माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय की प्रशंसा करते हुए कहा कि सप्रे संग्रहालय ज्ञान तीर्थ है। डॉ चौबे ने कहा कि श्रीधर जी पत्रकारिता विश्वविद्यालय की शोध परियोजना के निदेशक भी रहे हैं और उनके द्वारा पत्रकारिता के 75 शोध प्रबंध प्रकाशित किए गए हैं जो कि बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि श्रीधर जी के रचना संचय में 27 निबंध हैं। डॉ चौबे ने पांच खंडों के बारे में बात करते हुए श्रीधर जी के द्वारा पत्रकारिता के अवदान को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की बात कही।पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि संग्रहालय में करीब 5 करोड़ पन्ने हैं। लगभग 100 सालों का हस्तलिखित पांडुलिपि हैं। उन्होंने जल्द ही डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया शुरु किए जाने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने कहा की उनकी कोशिश रहेगी कि इस ऑनलाइन भी देखा जा सके।श्रीधर जी ने कहा सप्रे संग्रहालय में अभी तक विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने 1438 द्वारा शोध प्रबंध तैयार किए जा चुके हैं। जबकि आठ लोगों ने यहां की सामग्री का अध्ययन करके डीलिट की उपाधि प्राप्त की है। श्रीधर जी ने नरसिंहपुर जिले के अपने छोटे से गांव से लेकर भोपाल आने पत्रकारिता करने एवं सप्रे संगहालय की शुरुआत से लेकर उनकी पूरी जीवन यात्रा को शानदार तरीके से बताया। पूर्व सूचना आयुक्त एवं वरिष्ठ पत्रकार विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि सप्रे संग्रहालय शांति निकेतन जैसा खुला परिसर में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 10 से 20 एकड़ में यह भव्य रुप में बनना चाहिए। जहां देश भर के विद्यार्थी आकर अध्ययन सके। उन्होंने डिजिटल साइन बोर्ड सहित कई सुझाव दिए। कार्यक्रम का संचालन प्रो शिवकुमार विवेक ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ अविनाश वाजपेयी ने किया। नालंदा पुस्तकालय में आयोजित इस कार्यक्रम में पुस्तकालय विभाग की अध्यक्ष डॉ आरती सारंग, विभिन्न विभागों के विभाग अध्यक्ष, शिक्षक, विद्यार्थी उपस्थित थे।

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