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33 तो छोडि़ए 15% महिलाओं को नहीं मिला प्रतिनिधित्व

कांग्रेस 12.66 तो भाजपा ने 12.28 प्रतिशत महिलाओं को दिया टिकट

– भाजपा द्वारा घोषित 228 उम्मीदवारों में से 28 महिलाओं को टिकट दिया है जबकि कांग्रेस ने 229 में से 29 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया

भोपाल । मप्र में आधी आबादी यानी महिलाओं को साधने के लिए राजनीतिक पार्टियों ने न केवल वादे किए हैं, बल्कि योजनाओं के साथ ही सौगातों की बौछार की है। लेकिन जब टिकट देने की बात आई तो पार्टियों ने महिलाओं को बराबरी का हक देने की बजाय उनके हिस्से का भी हक नहीं दिया है। गौरतलब है कि चुनावों में महिलाओं को 33 फीसदी टिकट देने की बात हो रही है लेकिन प्रदेश में किसी भी पार्टी ने 15 फीसदी टिकट भी नहीं दिया है। जबकि मप्र की 16वीं विधानसभा गठन के लिये हो रहे विधानसभा चुनावों में बहुमत की भूमिका 2.72 करोड़ महिलाएं भी निभाएंगी। मौजूदा समय में मप्र सरकार त्रिस्तरीय व्यवस्थाओं में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी तय कर चुकी है। मप्र में कुल मतदाताओं की संख्या 5.60 करोड़ है।

उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को एक स्वर में भाजपा और कांग्रेस के साथ सभी पार्टियों ने समर्थन दिया, लेकिन मप्र विधानसभा चुनाव में किसी ने 33 फीसदी महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं दिया है। भाजपा द्वारा घोषित 228 उम्मीदवारों में से 28 महिलाओं को टिकट दिया है जबकि कांग्रेस ने 229 में से 29 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। इस तरह भाजपा ने मात्र 12.28 और कांग्रेस ने 12.66 फीसदी महिलाओं को ही प्रतिनिधित्व दिया है। इससे साफ होता है कि, दोनों ही राजनीतिक दलों को महिला प्रत्याशी के जीतने पर पुरुषों की अपेक्षा कम भरोसा है।

50 प्रतिशत आबादी महिला मतदाता

मध्यप्रदेश में इस बार मतदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है। प्रदेश में लगभग 5 करोड़ 60 लाख 60 हजार 925 मतदाता हैं। इनमें से लगभग 2 करोड़ 88 लाख 25 हजार 607 पुरुष और 2 करोड़ 72 लाख 33 हजार 945 महिला मतदाता हैं। इस हिसाब से प्रदेश में 50 प्रतिशत महिला वोटर हैं, लेकिन 230 सदस्यों वाली विधानसभा में वर्तमान में केवल 21 महिला विधायक हैं। यानि महिलाओं का प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत से भी कम। इस विधानसभा में भाजपा के 127 विधायक हैं इनमें से मात्र 14 महिलाऐं हैं। कांग्रेस के 92 विधायक हैं इनमें से 6 महिला विधायक हैं। एक महिला विधायक बसपा से है। इस तरह यह कहना उचित होगा कि, पितृसत्तातमक सोच आज भी राजनीति में अपनी पकड़ बनाए हुए है। महिलाओं की समान भागीदारी की बात हर राजनीतिक दल द्वारा की गई, परन्तु नीति निर्णयन के शीर्ष स्तर में महिलाओं के उचित प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने का कार्य किसी भी दल ने गंभीरता से नहीं किया।

भाजपा ने इन महिलाओं को दिया टिकट

आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 230 में से 228 उम्मीदवार घोषित हो गए हैं। इनमें से केवल 28 महिलाओं को उम्मीदवार घोषित किया गया है। ग्वालियर पूर्व से माया सिंह, हट्टा से ऊमा खटिक, रैंगाव से से प्रतिमा बागरी, चितरंगी से राधा सिंह, मंडला से संपतिया ऊइके, बालाघाट से मौसम बिसेन, खंडवा से कंचन मुकेश तन्वे, पंधाना से छाया मोरे, नेपानगर से मंजू राजेन्द्र दादू, बुरहानपुर से अर्चना चिटनिस, धार से नीना विक्रम वर्मा, अम्बेडकर नगर महू से ऊषा ठाकुर, जयसिंहनगर से मनीषा सिंह, मानपुर से मीना सिंह मांडवे, गोविंदपुरा से कृष्णा गौर, देवास से गायत्रीराजे पंवार, इंदौर 4 से मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़, अमरवाड़ा से मोनिका बट्टी, डबरा से इमरती देवी, सीधी से रीति पाठक,परासिया से ज्योति डहेरिया, घोंडाडोंगरी से गंगा बाई उईके, भीकनगांव से नंदा ब्राह्मणे, सैलाना से संगीता चारले, सबलगढ़ से सरला विजेंद्र यादव, चाचौड़ा से प्रियंका मीणा, छतरपुरसे ललिता यादव और पेटलावद से निर्मला भूरिया को टिकट दिया गया है।

कांग्रेस इनको बनाया उम्मीदवार

विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 230 में से 229 उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इनमें से केवल 29 महिलाओं को उम्मीदवार घोषित किया गया है। आमला विधानसभा सीट पर उम्मीदवार की घोषणा होना बाकी है। इस सीट पर कांग्रेस निशा बांगरे (डिप्टी कलेरक्टर के पद से इस्तीफा) को उम्मीदवार बना सकती है। अगर निशा बांगरे को टिकट मिलता है तो महिला उम्मीदवार की संख्या 30 हो जाएगी। बीना से निर्मला सप्रे, खुरई से रक्षा राजपूत, रहली से इंज. ज्योति पटेल, सागर से निधि जैन, बांधवगढ़ से सावित्री सिंह, गडऱवारा से सुनिता पटेल, कुरवाई से रानी अहिरवार, सारंगपुर से कला महेश मालवीय, नेपानगर से गेंदू बाई चौहान, धार से प्रभा गौतम, धौहानी से कमलेश सिंह, जतारा से किरण अहिरवार, खरगापुर से चंदा सिंह गौर, रैगांवसे कल्पना वर्मा, मलहारा से साध्वी रामसिया भारती, नागौद से डॉ. रश्मि सिंह पटेल, मनगवां से बबिता साकेत, सिंगरौली से रेनू शाह, जैतपुर से उमा धुर्वे, सिहोरा से एकता ठाकुर, लांजी से हीना कंवारे, बालाघाट से अनुभा मंजारे, बैरसिया से जय श्री हरिकरण, पांधाना से रूपाली बारे, बिखनगांव से झूमा सोलंकी, महेश्वर से विजयलक्ष्मी साधो, सांवेर से रीना बौरासी सेठिया, उज्जैन उत्तर से माया राजेश त्रिवेदी और जोबट से सेना पटेल को टिकट दिया है।

तीसरे धड़े ने भी नहीं जताया महिलाओं पर भरोसा

टिकट वितरण में कांग्रेस और भाजपा के मुकाबले खड़े होने वाले तीसरे धड़े के दलों द्वारा घोषित प्रत्याशियों की सूची में महिलाओं को 10 प्रतिशत स्थान भी नहीं दिया गया है। बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी भी इससे अछूती नहीं है। गोडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन कर 230 सीटों पर चुनाव लडऩे जा रही बहुजन समाजवादी पार्टी की बात करें तो घोषित किये गए 125 उम्मीदवारों में सिर्फ 7 सीटें इसने महिलाओं को दिया हैं। यह कुल संख्या का दस प्रतिशत भी नहीं है। समाजवादी पार्टी ने तीन चरणों में घोषित 33 प्रत्याशियों में मात्र 1.98 प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया है। इसने 5 स्थानों पर आधी आबादी को अवसर दिया है। इसमें मां-बेटी भी अलग-अलग सीटों से मैदान में हैं। समाजवादी पार्टी में हालत यह है कि एक तरफ यह महिलाओं को टिकट देकर दूसरे प्रत्याशी बदल देती है। सुमावली विधानसभा क्षेत्र उदाहरण के रूप में सामने आया है। यहां पहले मंजू सोलंकी को उम्मीदवार बनाया था। इसके कुछ दिन बाद इनके स्थान पर पुरूषोत्तम शर्मा के नाम की घोषणा कर दी गई। आम आदमी पार्टी ने मात्र 6 प्रत्याशियों को टिकट दिया है। यह मात्र 2.34 प्रतिशत है। इनमें गुना से भाजपा की पूर्व विधायक प्रियंका मीणा, चाचौड़ा से ममता मीणा और मानपुर से उषा कोल, सिरमौर से सरिता पांडेय, भांडेर से राममनि देवी जाटव, नरेला रईसा बेगम और दमोह से चाहतमणि पांडेय के नाम है। पार्टी ने एक टिकट थर्ड जेंडर को भी दिया है।

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