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गैस कांड मामले में हाईकोर्ट ने दिया केंद्र और राज्य सरकार के 9 अधिकारियों पर केस चलाने का आदेश

कोर्ट के आदेश की अवमानना किये जाने को लेकर दिया फैसला, 17 को होगी सूनवाई

भोपाल । भोपाल गैस पीड़ितों को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए गैस पीड़ितों को सही इलाज, शोध की व्यवस्था न देने, सुप्रीम कोर्ट के भोपाल गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य के मामले में 9 अगस्त 2012 के आदेश की अवमानना करने पर केंद्र और राज्य सरकार के 9 अधिकारियों पर केस चलाने का आदेश दिया है। जानकारी के अनुसार मामले में 16 जनवरी तक जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। 17 जनवरी को मामले में सुनवाई होगी। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस शील नागू और देवनारायण मिश्र की खंडपीठ ने अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाने और न्यायालय की अवमानना किये जाने के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। इन अधिकारियो में राजेश भूषण, सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय, भारत सरकार, आरती आहूजा, सचिव, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय,भारत सरकार, डा, प्रभा देसिकान, डायरेक्टर, भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर, डा. आर. आर. तिवारी, संचालक, नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर रिसर्च ऑन एनवायर्नमेंटल हेल्थ, आईसीएमआरएस, इकबाल सिंह बैंस, मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश, मोहमद सुलेमान, अतिरिक्त मुख्य सचिव -स्वास्थ्य, मध्य प्रदेश, अमर कुमार सिन्हा, राज्य सूचना अधिकारी, एनआईसी, विनोद कुमार विश्वकर्मा, एनआईसीएसआई, आर. रामा कृष्णन, सीनियर डिप्टी संचालक, आईसीएमआर, भारत सरकार के नाम शामिल है। इन सभी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने के एवं न्यायालय की अवमानना अधिनियम 1971 की धारा 2 के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। इसे लेकर गैस पीड़ित संगठन की ढिंगरा ने कहा कि न्यायपालिका के इस आदेश हम सभी गैस पीड़ित संगठन स्वागत करते है, और इस आदेश आदेश को मिसाल बनाना चाहिए ताकि जिन अधिकारियों के वजह से गैस पीड़ितों की स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत अत्यंत दयनीय बनी है, उन सभी अधिकारियों को मिसालदायक सज़ा भी मिलनी चाहिए। उन्होनें आगे कहा कि 16 जनवरी तक सभी को न्यायालय में उत्तर प्रस्तुत करना है। इस मामले की सुनवाई 17 जनवरी को हाईकोर्ट में होगी, सभी अधिकारियो को चार्ज की कॉपी दी गई है।

रचना ढींगरा ने आगे बताया कि खंडपीठ द्वारा इन सभी अधिकारियों पर लगाए गए चार्ज में लिखा है सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति के जुलाई 2023 की रिपोर्ट निगरानी समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि 10.5 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आप सभी प्रतिवादियों ने सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ इस न्यायालय के निर्देशों का पालन करने में कोई तत्परता या ईमानदारी नहीं दिखाई है। गैस पीड़ितों को अधर में छोड़ दिया जा रहा है। आप सभी प्रतिवादियों ने इन आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया इतनी दिलाई की है, की आप सभी ने (पीआईएल) की अवधारणा को एक मजाक बना दिया है। इस न्यायालय को गैस पीड़ितों के प्रति आपकी असंवेदनशीलता को छोड़कर आपके उत्तरदाताओं की ओर से ढिलाई के पीछे कोई अच्छा कारण नहीं दिखता है।

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