Featured

डॉ अरविंद ने जैन धर्म के मूल गुणों को किया था आत्मसात: सनत जैन

शोक सभा आयोजित कर डॉ जैन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर डाला प्रकाश

भोपाल । चिकत्सक एवं लेखक डॉ अरविंद जैन के निधन पर होशंगाबाद रोड स्थित नारायण नगर जैन मंदिर में आज बुधवार को एक शोकसभा का आयोजन किया गया| डॉ जैन के व्यक्तित्व एवं कृतित्च पर प्रकाश डालते हुए ईएमएस समूह के प्रधान संपादक सनत जैन ने कहा कि डॉ अरविंद ने जैन धर्म के मूल गुणों को आत्मसात किया था| डॉ अरविंद जैन एक आयुर्वेद परामर्शदाता, चिकित्सक, लेखक और चिंतक के साथ ही साथ अहिंसा शाकाहार जीवदया के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने वाले व्यक्ति थे|

ईएमएस समूह के प्रधान संपादक श्री जैन ने डॉ जैन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ जैन और मेरा परिवार जबलपुर के हनुमानताल में आगे-पीछे ही रहते थे| भोपाल आए तो यहां पर भी आस-पास ही घर लिया| उनसे हमारे आत्मीय संबंध थे| उन्होंने कहा कि डॉ जैन शुरु से ही विचारशील और चिंतक रहे| उन्होंने आचार्य रजनीश से दीक्षा भी ली थी| इसके अतिरिक्त डॉ जैन ने शाकाहार पर न सिर्फ लेखन किया बल्कि उसका प्रचार-प्रसार भी किया| उन्होंने जैन धर्म के मूल गुणों को आत्मसात किया| इस अवसर पर भाजपा के प्रवक्ता सत्येंद्र जैन ने डॉ अरविंद जैन के संबंध में कहा कि वे आयुर्वेद के ज्ञाता रहे हैं| उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है, ऐसे में डॉ जैन ने लेखन के क्षेत्र में महति भूमिका निभाने के साथ ही अपने सामाजिक कार्यों के लिए समय का सदुपयोग किया| वहीं शिक्षाविद नितिन जैन ने कहा कि डॉ जैन ने अपने जीवन में किसी से कभी कोई अपेक्षा नहीं रखी| वे नि:स्वार्थ सेवा में विश्वास करते थे|

डॉ जैन ने अपने जीवन काल में अनेक पुस्तकों का सृजन किया| इनमें प्रमुखत: आनंद कही अनकही, चार इमली, चौपाल, चतुर्भुज, चेतना का चातक, सुहाना सफर और पचास अन्य कहानियां नामक आत्मकथा संकलित कहानियां और उपन्यास प्रकाशित हुए हैं| इसके लिए अनेक संस्थानों ने आपको समय-समय पर सम्मानित भी किया| जैन मंदिर में आयोजित शोक सभा में अनेक लेखक, विचारक समेत जैन समाज के प्रतिष्ठित परिवार मौजूद थे|

Related Articles

Back to top button