Madhya PradeshpoliticsState Election 2023

दक्षिण पश्चिम विधानसभा के दावेदारों ने कमलनाथ के सामने किया शक्ति प्रदर्शन

दक्षिण पश्चिम विधानसभा की दावेदारी मजबूत करने पीसी शर्मा और संजीव सक्सेना के समर्थकों ने लगाए नारे

Bhopal political news : राजधानी में आज शनिवार को विंध्य की बेटी: मुहावरों से झलकती ममता” पुस्तक का विमोचन कमलनाथ के द्वारा रविंद्र भवन में किया गया।यहां पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में भी बड़ा उत्साह दिखा। सभी को सरकार बनाते दिखाई दे रही है। जहां यह आयोजन एक सादगी के साथ किया जा रहा था वहीं विधान सभा चुनाव की तैयारी को लेकर अपनी दावेदारी मजबूत करने सख्ती प्रदर्शन करने में भी पीछे नहीं रहे। जिसमें आज एक ही विधान सभा के लिए दावेदारी के उद्देश्य से दोनो दावेदार अपने कार्यकर्ता को लेकर पहुंचे। हालांकि दक्षिण पश्चिम विधानसभा के वर्तमान विधायक पीसी शर्मा के साथ कुछ 50 कार्यकर्ता ही दिखाई दिए । और मंत्री रहते हुए भी व्यवहार में जनता को परिवर्तन दिखाई दिया साथ ही इनके नजदीकी समर्थक भी अव्यवहारिक रहे, जो इनके खिलाफ जनता में छवि धूमिल रही। वहीं दूसरी तरफ अपनी दावेदारी को मजबूत करने इंजी संजीव सक्सेना भी आज उक्त कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। श्री सक्सेना के साथ लगभग 200 समर्थक मौजूद रहे । जिस वक्त प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का रवींद्र परिसर में आगमन हुआ तो दोनो के ही समर्थकों ने नारे बाजी शुरू कर दी। जो यह प्रदर्शित करने के लिए काफी है कि दावेदारी मजबूत है। लेकिन जहां पीसी शर्मा वर्तमान में विधायक हैं तो उनकी दावेदारी अधिक मजबूत रहेगी । वहीं संजीव सक्सेना भी पार्टी के बहुत बड़े चेहरा हैं लेकिन उन्होंने पार्टी के खिलाफ जाकर दो चुनाव भी लड़े हैं जो इनकी पार्टी के प्रति ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा पर भी सवाल उठाता है। वहीं इनका आम दिनों में पार्टी के पदाधिकारियों और प्रदेश कार्यालय से भी दूरी रहती है।

“बॉस” की छवि आती है आड़े

जहां तक कांग्रेस की बात की जाए तो यहां पर मजबूत प्रत्याशी को ही महत्व दिया जाता रहा है। जिसमें संजीव सक्सेना दावेदारी पर पूरी तरह बैठ रहे हैं और इनके पास स्लैम एरिया का एक अच्छा वोटबैंक है। लेकिन इनके लिए सबसे बड़ी समस्या इन्हें सामने वाले से “बॉस” सुनना पसंद है। एक बार यह अपने नाम “बॉस” के जगह नाम से भी बुलाए तो शायद स्वयं को कोई आपत्ति नहीं होगी लेकिन इनके जो समर्थक हैं उन्हें तो किसी अपरिचित से नाम सुनना भी पसंद नहीं है। वहीं पड़े लिखे नौकरी पैसा मतदाता इन्हें पसंद नहीं करता है। यह जानकारी पार्टी के वरिष्ठों को भी मालूम है । क्षेत्र की जनता और पार्टी के पदाधिकारी क्यों “बॉस” मानेंगे या कहेंगे। बस इनके लिए “बॉस” शब्द ही दावेदारी में रोड़ा बना हुआ है। जनता को आम साधारण व्यक्ति वाला प्रतिनिधि चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button