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तोमरों की पंचायत में होगया खेला, कांग्रेस प्रत्याशी ने कर लिया समझौता

अब कांग्रेस प्रत्याशी को पड़ सकते हैं जमानत बचाने के लाले

भोपाल । प्रदेश में विधान सभा के मतदान संपन्न हो गए। इस बार के चुनाव में प्रदेश की सबसे होते महत्वपूर्ण सीट मुरैना जिले की दिमनी विधान सभा रही । इस प्रमुख कारण यहां से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर बीजेपी से प्रत्याशी के रूप में मैदान में थे। नरेंद्र तोमर मोदीजी के प्रमुख पांच मंत्रियों में शामिल है। वैसे प्रदेश के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 7 सांसदों को जिसमें 3 केंद्रीय मंत्री शामिल हैं उन्हें टिकिट दिया था। इन सभी सात सांसदों में से एक ही सीट की चर्चा नरेंद्र तोमर की ही रही। नरेंद्र तोमर टिकिट मिलने के बाद से ही अपने आपको असहज महसूस कर रहे थे। वह टिकिट मिलने के बाद काफी समय। तक अपने विधानसभा क्षेत्र दिमनी नहीं गए। उसके बाद से जनता में यह संदेश गया कि वह अपनी हार वाली डर से चुनाव नहीं लड़ना चाहते। जब उन्होंने अपना बीजेपी के प्रत्याशी के तौर पर नामांकन जमा कर दिया उसके बाद ही उन्होंने l

क्षेत्र में संपर्क करना शुरू कर दिया। जनसंपर्क के दौरान उन्हें अपने ही तोमरों का विरोध दिखने लगा । उन्हें महसूस हुआ की यहां पर जीत पाना मुश्किल है। उनके पुत्र के 3 वीडियो भी वायरल हुए। जब बीजेपी के प्रत्याशी को लगा कि यहां के मतदाता किसी भी तरह वोट देने के लिए तैयार नहीं है तब नरेंद्र तोमर ने समझोता करने के लिए तोमरों की पंचायत बुलाई। पंचायत में कांग्रेस के प्रत्याशी और विधायक रवींद्र तोमर को भी बुलाया गया। इस पंचायत में निर्णय लिया गया कि नरेंद्र तोमर को आखिरी बार मौका दिया जाए। इस आखिरी बार के निर्णय पर सभी तोमरों की सहमति बनी । बात कांग्रेस प्रत्याशी रविंद्र तोमर की आई तो उसे जो संभव हो सकता था आर्थिक या अन्य जिससे उसको बड़ा लाभ की बात कह संतुष्ट कर दिया। इस बात पर कांग्रेस प्रत्याशी मान गए और पार्टी से गद्दारी करने को तैयार हो गए और तोमर तोमर में खेला होगया । जिसकी चर्चा पूरी विधानसभा सहित आसपास के जिलों में चुनाव की दौरान रही। जहां केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर को अपनी जमानत बचाने के लाले पड़ रहे थे वह बीएसपी के प्रत्याशी बलवीर दंडोतिया से फाइट में गए। शुरुआत में रविंद्र तोमर और बलवीर दंडोतिया ही फाइट में थे । लेकिन कांग्रेस से गद्दारी कर अपनी ही जमानत के लिए मुश्किल खड़ी कर दी। 

हुआ यह…….

जब इस पंचायत की जानकारी करे कांग्रेस समर्थित या विचार वाले मतदाताओं को जानकारी लगी तो उन्होंने भी अपना वोट कांग्रेस को न देकर बीएसपी के लिए तैयार हो गए। जहां पूरे तोमरों के वोट अगर नरेंद्र सिंह तोमर को जाते हैं और दूसरे समाज का वोट बीएसपी को तो रविंद्र तोमर अपनी जमानत भी नहीं बचा पाएंगे।  

अगर तोमर कांग्रेस के प्रत्यासी रवींद्र तोमर की बचाने जमानत बचाने की कोशिश की होगी तो भी नरेंद्र सिंह तोमर दूसरे अंबर पर रहेंगे। क्यों की डिमनी विधान सभा में लगभग 65 हजार मतदाता हैं जिसमें से 5 हजार वोट को छोड़ दें तो 60 जहर वोट राज गए जिनमें से रवींद्र तोमर को अपनी जमानत बचाने के लिए 20 हजार से अधिक वोट चाहिए जो की तोमरों के ही मिलेंगे। क्यों कि सभी समाज के मतदाताओं को मालूम हो चुका है कि पंचायत में नरेंद्र तोमर को जिताने के लिए तोमर एकभो गए हैं जिससे अन्य समाज का वोट नहीं बीजेपी के प्रत्याशी नरेंद्र तोमर और कांग्रेस के प्रत्याशी रविंद्र तोमर को मिलेगा। जिससे नरेंद्र तोमर के खाते में सिर्फ 40 हजार तोमर वोटर ही मिलेंगे। जो दूसरे नंबर पर आने के लिए काफी हैं।

यहां पर ब्राह्मण मतदाता लगभग 30 हजार है। हरिजन 48 हजार, 12 हजार गुर्जर, 65 हजार तोमर अन्य समाज को मिलाकर 2 लाख 17 सौ मतदाता हैं। जिसमें से तोमर को छोड़ दिया जाए तो बीएसपी का वोट अधिक हो रहा है। 

कांग्रेस जहां दिमनी में बीएसपी को टक्कर दे रही थी वहीं अब जमानत के लाले पड़ सकते है। यह सब तोमर पंचायत का नतीजा है। वैसे अगर ईमानदारी से कांग्रेस प्रत्याशी रविंद्र तोमर चुनाव लड़ते तो जीतने की कगार पर ही थे लेकिन समाज की पंचायत ने कांग्रेस की एक सीट काम कर दी। 

वैसे अगर कांग्रेस प्रत्याशी रविंद्र तोमर ने समझोता नहीं किया है तो दूसरे नंबर पर आना चाहिए और अगर जीतते हैं तो वह निश्चित ही मंत्री बनेंगे। क्योंकि केंद्रीय मंत्री को हराकर जीते हैं वह भी केंद्र सरकार के प्रमुख पांच में शामिल हैं। अब तो तोमर तोमर का प्रदेश की राजनीति में खेला हो गया। 

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