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कानून व्यवस्था का इस्तेमाल कमजोर वर्गों को दबाने के लिए किया गया : चीफ जस्टिस

अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा

न्यूयॉर्क । सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा है कि कानून व्यवस्था को लगातार हाशिए पर रहे समुदायों को दबाने के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में भेदभाव करने वाले कानूनों के बनने से गुलामी प्रथा को बढ़ावा मिला। जिम क्रॉ के कानूनों के जरिए स्थानीय लोगों को निशाना बनाया गया। अमेरिका में मैसाच्युसेट्स की ब्रांडेस यूनिवर्सिटी में डॉ. बीआर अंबेडकर की अधूरी विरासत पर छठे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने ये बात कही। अपने संबोधन में भारत के चीफ जस्टिस ने कहा कि इतिहास में हाशिए पर छूटे सामाजिक वर्गों को खिलाफ सामाजिक असमानता, पूर्वाग्रह और शक्ति के असंतुलन के चलते कई ऐतिहासिक गलतियां हुईं। इनमें ट्रांस अटलांटिक व्यापार के तहत लाखों अफ्रीकी नागरिकों को जबरन गुलाम बनाना और उनका विस्थापन, मूल अमेरिकियों का विस्थापन, भारत में जातीय भेदभाव से करोड़ों लोग प्रभावित हुए और आदिवासी समुदायों का शोषण, महिलाओं का शोषण, एलजीबीटीक्यू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का शोषण जैसी घटनाओं से इतिहास दागदार है। ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनाई गई, जिसमें हाशिये पर मौजूद वर्गों को उभरने की इजाजत नहीं थी।

उन्होंने आगे कहा- अमेरिका और भारत दोनों देशों में लंबे समय तक कई समुदायों को वोट डालने का अधिकार नहीं दिया गया। इस तरह कानून का इस्तेमाल पावर स्ट्रक्चर को बनाए रखने और भेदभाव को बढ़ावा देने के लिए किया गया। इसका खामियाजा हाशिए पर रहे समुदायों को लंबे समय तक उठाना पड़ा। समाज में होने वाले भेदभाव और अन्याय को सामान्य माना जाने लगा। कुछ समुदाय समाज की मुख्य धारा से अलग हो गए। इसके चलते हिंसा और बहिष्कार की घटनाएं हुईं।

आने वाली पीढिय़ों को भी नुकसान

उन्होंने कहा है कि लीगल सिस्टम ने हाशिए पर रहे समुदायों के खिलाफ इतिहास में हुई गलतियों को कायम रखने में अहम भूमिका निभाई। हाशिए पर रहने वाले सोशल ग्रुप्स को भेदभाव, पूर्वाग्रह और गैर-बराबरी का शिकार होना पड़ा। सीजेआई ने आगे कहा कि भेदभाव वाले कानूनों के पलटे जाने के बाद भी कई पीढिय़ों को इनका नुकसान उठाना पड़ सकता है। सीजेआई ने कहा कि गुलामी की प्रथा के चलते लाखों अफ्रीकन लोगों को अपना देश छोडऩा पड़ा। अमेरिका के स्थानीय लोगों को अपनी जमीन छोडक़र जाना पड़ा। भारत में जाति प्रथा के चलते निचली जातियों के लाखों लोगों को शोषण का शिकार होना पड़ा। महिलाओं, एलजीबीटी समुदाय और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों को दबाया गया। इतिहास अन्याय के ऐसे उदाहरणों से भरा हुआ है। सीजेआई ने कहा कि भारत में आजादी के बाद शोषण सहने वाले समुदायों के लिए कई नीतियां बनाई गईं। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और रिप्रजेंटेशन के मौके दिए गए। हालांकि, संवैधानिक अधिकारों के बावजूद समाज में महिलाओं को भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव पर बैन लगने के बाद भी पिछड़े समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं सामने आती हैं।

सीजेआई ने बताया कैसे हुए अत्याचार

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दुर्भाग्य से हमारी कानून व्यवस्था ने भी इसे बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई। जैसे अमेरिका और भारत के कुछ हिस्सों में गुलामी व्यवस्था को कानूनी तौर पर मान्यता दी गई। अमेरिका में भेदभाव वाले कानून बनाए गए। जिम क्रो कानूनों के जरिए मूल लोगों को निशाना बनाया गया और कानूनी व्यवस्था को सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों पर अत्याचार के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया। अमेरिका और भारत में शोषित वर्ग को लंबे समय तक मतदान के अधिकार से वंचित रखा गया। इस तरह कानून को भेदभाव वाली व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया गया। डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आज ये भेदभाव वाले कानून नहीं हैं लेकिन इसका प्रभाव कई पीढिय़ों तक रहेगा। भारत में आजादी के बाद कई अहम कदम उठाए गए, जिससे सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को ऐसे मौके मिले, जिनसे उन्हें रोजगार, पढ़ाई में प्रतिनिधित्व मिला।

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