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मध्यप्रदेश में डीजल की रिकॉर्ड मांग के बीच तेल कंपनियां अलर्ट, क्यों बढ़ी ईंधन खपत?

भोपाल । मध्यप्रदेश में इस समय डीजल और पेट्रोल की मांग सामान्य स्तर से कहीं अधिक दर्ज की जा रही है। खेती-किसानी के सीजन, बढ़ी हुई परिवहन गतिविधियों और निजी आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर अपेक्षाकृत कम कीमतों के कारण ईंधन खपत में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। बढ़ती मांग के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भरोसा दिलाया है कि राज्य और देशभर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने संयुक्त रूप से कहा है कि मांग बढ़ने के बावजूद आपूर्ति श्रृंखला चौबीसों घंटे सक्रिय रखी गई है और किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है।

आखिर अचानक क्यों बढ़ी डीजल की मांग?

विशेषज्ञों के अनुसार मई-जून का समय कृषि गतिविधियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। गेहूं खरीदी, परिवहन, सिंचाई उपकरणों का संचालन और ग्रामीण माल ढुलाई के कारण डीजल की खपत स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।

इसके अलावा इस बार सार्वजनिक क्षेत्र के रिटेल आउटलेट्स पर ईंधन कीमतें कई निजी पंपों की तुलना में अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्धी बताई जा रही हैं, जिसके कारण उपभोक्ताओं का रुझान सरकारी कंपनियों की ओर बढ़ा है।

राज्य में जिन जिलों में डीजल बिक्री में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज हुई है उनमें निवाड़ी, नीमच, हरदा, उमरिया और रतलाम प्रमुख हैं। वहीं मंदसौर, देवास, बुरहानपुर, बड़वानी, छतरपुर और उज्जैन जैसे जिलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

क्या ईंधन संकट की आशंका है?

तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी प्रकार की कमी नहीं है। कंपनियों के अनुसार:

डिपो,

पाइपलाइन,

टर्मिनल,

एलपीजी बॉटलिंग प्लांट,

और रिटेल नेटवर्क
पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का सार्वजनिक तेल वितरण नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा वितरण तंत्रों में शामिल है। सामान्य परिस्थितियों में मांग में अस्थायी उछाल को संभालने की क्षमता इस नेटवर्क में मौजूद रहती है।

हालांकि बाजार विश्लेषक यह भी मानते हैं कि अचानक बढ़ी मांग कई बार “घबराहट में खरीद” की वजह से और अधिक बढ़ जाती है। यही कारण है कि कंपनियों ने नागरिकों से सामान्य खरीद व्यवहार बनाए रखने की अपील की है।

अर्थव्यवस्था से क्या संकेत मिलते हैं?

ईंधन खपत को अक्सर आर्थिक गतिविधियों का संकेतक माना जाता है। परिवहन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने पर डीजल की मांग बढ़ती है। मध्यप्रदेश में कई जिलों में दो अंकों की वृद्धि यह संकेत दे सकती है कि:

ग्रामीण परिवहन गतिविधियां बढ़ रही हैं,

कृषि लॉजिस्टिक्स तेज हुए हैं,

और बाजार में माल ढुलाई की मांग बढ़ी है।


हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि लगातार बढ़ती ईंधन खपत भारत की जीवाश्म ईंधन निर्भरता को भी दर्शाती है, जबकि देश इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या सलाह?

तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे:

अनावश्यक ईंधन भंडारण से बचें,

अफवाहों पर भरोसा न करें,

और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति श्रृंखला सामान्य बनी रहती है तो आने वाले दिनों में स्थिति स्थिर रह सकती है। लेकिन मानसून पूर्व कृषि गतिविधियों और परिवहन मांग के कारण जून तक डीजल खपत उच्च स्तर पर बनी रहने की संभावना है।

मध्यप्रदेश में बढ़ती ईंधन मांग यह भी दिखाती है कि राज्य की ग्रामीण और परिवहन आधारित अर्थव्यवस्था अभी भी बड़े पैमाने पर पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भर है, और यही कारण है कि पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता सीधे बाजार, खेती और दैनिक जीवन को प्रभावित करती है।

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