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भाजपा की हारी सीटों पर तीन महीने पहले उम्मीदवार घोषित करने की रणनीति काम कर गई

39 में से 26 अभेद किले कांग्रेस से छीन लिए

भोपाल । मप्र विधानसभा चुनाव मेें इस बार मोदी-शाह और मप्र भाजपा संगठन की रणनीति की सबसे बड़ी जीत उन सीटों पर मानी जा रही है, जो सीटें कांग्रेस का अभेद किला मानी जाती थी और जिन सीटों पर भाजपा को लंबे अरसे से हार का सामना करना पड़ रहा था। भाजपा ने साढ़े तीन महीने महीने पहले प्रदेश की जिन 39 हारी सीटों पर सबसे पहले उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया था, उसमें से 26 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज कराई है।

हम बता दें कि चुनाव आयोग ने 9 अक्टूबर को मप्र में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था और भाजपा ने चुनाव की तारीख घोषित होने के साढ़े तीन महीने पहले 17 अगस्त को कांग्रेस काबिज वाली 39 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए थे। यह वो सीटें थीं, जिन पर भाजपा पिछले दो-तीन चुनाव से लगातार हारती चली आ रही थी। भाजपा इन सीटों का भाजपा सी और डी श्रेणी की मानकर चल रही थी। कहने का मतलब है, जितनी सीटें जीत गए, उतना अतिरिक्त फायदा और नहीं जीते तो जेब से कुछ नहीं गया। लेकिन चुनाव से साढ़े तीन महीने पहले इन सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर देने से पार्टी उम्मीदवारों को मतदाताओं से संपर्क-संवाद का तो पर्याप्त समय मिल ही गया, इसके साथ उम्मीदवार अपने विधानसभा क्षेत्र के एक-एक बूथ पर अपनी पहुंच बना सके।

– भाजपा ने ये 26 हारी सीटें जीतीं

भाजपा ने जिन 26 हारी सीटों और कांग्रेस के अभेद किलो पर फतह हासिल की है, उनमें गोटेगांव में भाजपा के महेंद्र नागेश ने कांग्रेस के एनपी प्रजापति, सोनकच्छ में राजेश सोनकर ने कांग्रेस के सज्जन सिंह वर्मा, राऊ में मधुवर्मा ने जीतू पटवारी, महेश्वर में राजकुमार मेव ने कांग्रेस की विजयलक्ष्मी साधौ, सबलगढ़ में सरला विजेंद्र रावत ने कांग्रेस के बैजनाथ कुशवाह , सुमावली में एंदल सिंह कंसाना ने बसपा के कुलदीप सिंह सिकरवार, पिछोर में प्रीतम सिंह लोधी ने कांग्रेस के अरविंद सिंह लोधी, चाचौड़ा में प्रियंका मीणा ने कांग्रेस के दिग्गज नेता लक्ष्मण सिंह , चंदेरी में जगन्नाथ सिंह रघुवंशी ने कांग्रेस के गोपाल सिंह चौहान बंडा में वीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस के तरवर सिंह लोधी, महाराजपुर में कामाख्या प्रताप सिंह ने कांग्रेस के नीरज दीक्षित, छतरपुर में ललिता यादव ने कांग्रेस के आलोक चतुर्वेदी, पथरिया में लखन पटेल ने कांग्रेस के राव ब्रजेंद्र सिंह, चित्रकुट में सुरेंद्र सिंह गेहरवार ने कांग्रेस के नीलांशु चतुर्वेदी, बड़वारा में धीरेंद्र बहादुर सिंह ने कांग्रेस के विजय राघवेंद्र सिंह, बरगी में नीरज सिंह लोधी ने कांग्रेस के संजय यादव, शाहपुरा में ओमप्रकाश धु्रर्वे ने कांग्रेस के भूपेंद्र मरावी, लांजी में राजकुमार कर्राय ने कांग्रेस की हीना कांवरे, बरघाट में कमल मर्सकोले ने कांग्रेस के अर्जुन सिंह काकोडय़िा, मुलताई में भाजपा के चंद्रशेखर देशमुख ने कांग्रेस के सुखदेव पांसे, भैंसदेही में महेंद्र सिंह ने कांग्रेस के धर्मू सिंह, अलीराजपुर में नागर सिंह चौहान ने मुकेश पटेल, पेटलावद में भाजपा की निर्मला भूरिया ने कांग्रेस के वालसिंह मेढ़ा, धरमपुरी में भाजपा के कालू सिंह ठाकुर ने कांग्रेस के पांचीलाल मेढ़ा, घट्टिया में सतीश मालवीय ने कांग्रेस के रामलाल मालवीय और गुन्नौर में भाजपा के राजेश कुमार वर्मा ने कांग्रेस के जीवनलाल सिद्धार्थ को हराया है। ये वो सीटें हैं जिन पर कई सालों से कांग्रेस का कब्जा था।

– कांग्रेस जीती सीटें क्यों हारी

राजनीतिक विज्ञानियों का कहना है कि कांग्रेस अपने 39 में 26 अभेद किलो (सीटों) को इसीलिए भी हार गई, क्योंकि इन सीटों पर पार्टी ने उम्मीदवार घोषित करने में विलंब किया। जिससे कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव प्रचार कैंपेन में पिछड़ गए। कांग्रेस उम्मीदवार जब तक घर से निकलते, तब तक भाजपा उम्मीदवार तीन-तीन बार क्षेत्र के मतदाताओं से संपर्क-संवाद कर चुके थे। इसके अलावा स्थानीय कांग्रेस नेताओं-कार्यकर्ताओं और क्षेत्र की जनता की नाराजगी का भी कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ।

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