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अदाणी डिजिटल लैब्स अब बेचेगा रेलवे टिकट

क्या आईआरसीटीसी को दे पाएगा चुनौती
नई दिल्ली । स्वदेशी उदयोग समूह अदाणी एंटरप्राइजेज की यूनिट अदाणी डिजिटल लैब्स अब रेलवे टिकट बेचेगा। इसी के साथ ही केंद्र सरकार पर आरोप लगने लगा है कि वह आईआरसीटीसी को अदाणी को सौंपने की तैयारी कर रही है।

बता दें कि अदाणी डिजिटल लैब्सने आईआरसीटीसी से अधिकृत टिकट बुकिंग प्लैटफॉर्म ट्रेनमैन को खरीदने के लिए उसकी मालिकाना कंपनी स्टार्क एंटरप्राइजेज के साथ डील कर ली है, जिसके तहत अदाणी डिजिटल ट्रेनमैन का पूरी तरह से अधिग्रहण करेगी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पहले आईआरसीटीसी से टक्कर और उसके बाद टेकओवर। क्या सच में ऐसा संभव है?

आइए, इसकी पड़ताल करते हैं। किसी से छिपा नहीं है कि ट्रेन के ऑनलाइन टिकट की बिक्री के मामले में आईआरसीटीसी का एकाधिकार है। करीब साढ़े चौदह लाख ट्रेन टिकट रोजाना बुक होते हैं, जिसमें से 81 प्रतिशत टिकट लोग आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप के जरिए लेते हैं।

यह जानकारी खुद आईआरसीटीसी ने दी है। अब सवाल उठता है कि बाकी 19 प्रतिशत टिकट जो आईआरसीटीसी के जरिए नहीं बिकते, वे कहां से बिकते हैं। इसका जवाब है कि आईआरसीटीसी के पास पेटीएम, मेक माई ट्रिप और ट्रेनमैन जैसे 32 पार्टनर्स हैं और बाकी टिकट इन पार्टनर्स के जरिए ही बिकते हैं।

कोई ये भी सोच सकता है कि इन पार्टनर्स को आखिर आईआरसीटीसी टिकट क्यों बेचने देती है? जवाब है कि इससे कमिशन के रूप में आईआरसीटीसी को मोटा पैसा मिलता है। दरअसल, कोई भी टिकट आईआरसीटीसी के जरिए खरीदे या उसके पार्टनर के जरिए पैसा आईआरसीटीसी को मिलता है।

वित्त वर्ष 2022 में आईआरसीटीसी को पेटीएम पर ट्रेन टिकट की बुकिंग से 70 करोड़ रुपये मिले। पेटीएम पर कटने वाले हर टिकट से आईआरसीटीसी को 12 रुपये मिलते हैं।इसे तकनीकी तौर पर भी समझते हैं कि ये सिस्टम कैसे काम करता है। किसी भी साइट या ऐप से भारतीय ट्रेन का टिकट तब तक नहीं खरीद जा सकता, जब तक उसके पास आईआरसीटीसी की एपीआई यानी ऐप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस न हो।

ट्रेनमैन ने हमारे ग्रुप की ही एक और साइट लाइव मिंट को बताया,अदाणी के साथ डील से आईआरसीटीसी की ऑनलाइन टिकट बुकिंग बिजनेस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जिसके पास भी पैसा हो वो आईआरसीटीसी की एपीआई ले सकता है।
दूसरे पार्टनर्स की तरह ट्रेनमैन को भी केवल आईआरसीटीसी की एपीआई का ऐक्सेस है, जिसके जरिए आईआरसीटीसी के प्लैटफॉर्म पर टिकट बुक की जा सकती है।

इसलिए ट्रेनमैन को अदाणी समूह के खरीदने से टिकट बिक्री में आईआरसीटीसी के एकाधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अब बात करते हैं जयराम रमेश के ट्वीट की, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक दिन अदाणी समूह आईआरसीटीसी का टेकओवर कर लेगा। इसके जवाब में आईआरसीटीसी की तरफ से कहा गया कि इससे कुछ नहीं बदलेगा यानी सबकुछ पहले की तरह ही रहेगा।

आईआरसीटीसी आगे कहती है,यह भ्रामक कथन है। ट्रेनमैन आईआरसीटीसी के 32 अधिकृत बी2सी (बिजनेस टू कस्टमर) भागीदारों में से एक है। हिस्सेदारी बदलने से इसमें कोई अंतर नहीं आएगा।
सभी एकीकरण और संचालन आईआरसीटीसी के माध्यम से किए जाते रहेंगे। यह केवलआईआरसीटीसी का पूरक होगा और आईआरसीटीसी के लिए कोई खतरा या चुनौती नहीं है।

ट्रेनमैनआईआरसीटीसी की ऑनलाइन टिकट बुकिंग के अलावा ट्रेन की सीटों, लाइव ट्रेन स्टेटस और पैसेंजर्स की रीयल-टाइम जानकारी भी देता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2011 आईआईटी रुड़की के दो छात्रों विनीत चिरानिया और करण कुमार ने की थी। उन्होंने एक स्टार्टअप के जरिए इसे शुरू किया और बाद में आईआरसीटीसी के साथ टिकट बुकिंग का काम भी करने लगा।

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