सम्मेद शिखर जी पर सरकार के अनुचित फैसले का देश भर में विरोध

झारखंड । सरकार द्वारा देश के प्रमुख जैन पवित्र तीर्थस्थल श्री सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल में बदलने के फैसले के विरोध में जैन समुदाय ने 1 जनवरी को पूरे देश में विशाल रैलियां निकाली पूर्व में 21 दिसंबर को भी भोपाल समेत अन्य शहरों में जैन समाज ने अन्य जैनोतर संगठनों के साथ मौन जुलूस द्वारा अपना रोष प्रदर्शन किया
झारखंड में स्थित पवित्र सम्मेद शिखरजी 20 जैन जैन तीर्थंकर एवं अनंतानंत मुनियों की तप एवं मोक्ष स्थली है ,जिन्होंने समाज ही नहीं सभी जीवों के उत्थान के लिए पूरा जीवन समर्पित किया और दुनिया भर में जैनियों द्वारा पूजनीय हैं। सम्मेद शिखरजी का कण कण पवित्र माना जाता है श्रद्धा से जैनों द्वारा वहां की रज माथे पर लगाई जाती है इसकी संरक्षण संवर्धन के लिए अपनी जान न्यौछावर कर देते हैं।
पर्यटन स्थल घोषित होने से, इस स्थान की पवित्रता को खतरा है। जबकि समाज के लोग जूते पहनकर भी पहाड़ पर नहीं जाते हैं तब पर्यटक स्थल क्षेत्र में मनोरंजन के लिए साधन जुटाए जाएंगे
शराब, मांस आदि जिससे उस स्थान की पवित्रता नष्ट हो जाएगी, जब कि महावीर और राम का देश है यहां के जन जन के संस्कारों में धार्मिकता है
 जैन समुदाय पूजनीय क्षेत्र को इस स्थिति में देखकर करोड़ों सदस्यों की भावनाओं को आहत करेगी।
कुछ दिन पहले सरकार की अधिसूचना के बाद कई असहनीय गतिविधियों की सूचना मिली है, असामाजिक तत्वों द्वारा जानबूझकर शराब और मांसाहारी पार्टियां की हैं, जिसके कारण पूरे देश में जैन समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
जैनियों ने 1 जनवरी को नव वर्ष के रूप में नहीं मनाया बल्कि समाज द्वारा नया साल सम्मेद शिखर जी के मामले के हल होने के बाद ही शुरू होगा और वे तभी
खुशियां मनाएंगे
पिछले 6 दिनों से दिल्ली में राष्ट्रीय जैन समाज संगठन के अध्यक्ष संजय जैन और श्रीमती रूचि जैन सहित कई जैन आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका कहना है कि अगर सम्मेद शिखरजी को धार्मिक स्थल नहीं बनाया गया तो वह जीने से ज्यादा मरना पसंद करेंगे।
इसके अलावा विरोध में मुंडन कराकर रोष व्यक्त भी पूरे देश में शुरू हो गया है।
जैन समुदाय की ओर से सरकार को संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि वे सम्मेद शिखरजी के लिए अपनी जान दे सकते हैं।
इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी सवालों के घेरे में है और यह आमरण अनशन पर बैठे कई जैनियों के जीवन के प्रति सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। सरकार को जल्द ही जैन समुदाय के लिए एक सकारात्मक रवैया अपनाना होगा।

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