ऑस्कर ही हमारी फिल्म का स्टैंडर्ड नहीं : कबीर बेदी

भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल के दूसरे दिन भारी संख्या में उमड़े साहित्य प्रेमी
रूस यूक्रेन वॉर और उसके सबक पर चर्चा
भारत वैक्सीन का सबसे बड़ा उत्पादक
लोकतंत्र देश की जनता के लिए है एक परिवार के लिए नहीं : भूपेंद्र यादव
राघव चंद्रा और बीएलएफ की वजह से तीसरी बार आया भोपाल : कबीर बेदी

भोपाल। सोसायटी फॉर कल्चर एंड एन्वायर्नमेंट की ओर से भारत भवन परिसर में आयोजित 5वें भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल के दूसरे दिन कई महत्वपूर्ण पुस्तकों और विषयों पर चर्चा हुई। इसमें रूस यूक्रेन वॉर और लेसन, कबीर बेदी, सदगुरु मोर देन अ लाइफ, द राइज ऑफ बीजेपी और मोदी और उनके चैलेंजेस पर बुद्दजीवियों और विशेषज्ञों ने बात की। इन्हीं सभी सत्रों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा फिल्म एक्टर कबीर बेदी का सेशन जिसमें डॉक्टर राघव चंद्रा नें मंच साझा किया, बातचीत के दौरान एक्टर ने कहा कि ऑस्कर ही हमारी फिल्म का स्टैंडर्ड नहीं है। इसके साथ ही द राइस ऑफ बीजेपी पुस्तक पर चर्चा के लिए शामिल हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि हमारी सरकार संघर्ष पर नहीं विमर्श पर विश्वास करती है। वहीं दूसरे दिन के पहले सत्र की शुरुआत बुक क्रेश एंड सिक्स लैंसेस फॉर बेस्ट कॉर्पोरेट मैनेजमेंट से हुई। सत्र में पुस्तक के लेखक और निदेशक, टाटा संस इन श्री आर गोपालकृष्णन और श्री राजीव मिश्रा के बीच संवाद हुआ। बातचीत के दौरान श्री आर गोपालकृष्णन ने अनुभव साझा करते हुये कहा कि व्यवसाय और एंटरप्राइजेस एक कला है जिसमें हर दिन एक नई रचनात्मकता की जाती है। पेंटिंग, डांस, म्यूतिक तो कला है ही लेकिन व्यवसाय और एंटरप्राइजेस भी कला का रूप है। इसमें हर दिन प्रेक्टिस की जाती है और डिमांड पूरी की जाती है। अनुभव साझा करते हुये उन्होंने कहा कि इंजिनियरिंग के समय मैं हमेशा सोचता था कि मनुष्य लॉजिकल है और हर व्यक्ति अपने लेंस से एक ही वस्तु या विषय को देखकर अलग-अलग बात रखता है। हर व्यक्ति का नजरिया अलग होता है। अपने नजरिये को बदलना है तो विविधता को जनाना चाहिये और रिश्ते से बनाते रहना चाहिये। सब से बात करते रहना चाहिये इसी से नजरिया और देखने वाला लेंस बलेगा। पुस्तक में में उन्हीं अनुभवों को लिया गया है। जिसमें नजरिये के बारे में कहा और लिखा गया है। इसमें उद्देश्य, प्रमाणिकता, साहस, विश्वास, भाग्य और पूर्ति जैसे 6 बिन्दुओं को लिया गया है। इसी से इंसान का नजरिया और उसका लैंस बदलता है। इंसान के अंदर इमेजिनेशन का होना बहुत अवश्यक है क्योंकि इमेजिनेशन नहीं होगी तो वह सही नजरिया नहीं रख सकेगा। पुस्तक के माध्यम से करियर और जीवन में सफलता का वास्तविक मतलब बताया गया है। हमेशा देखा गया है कि मशहूर हस्तियों की जीवनियाँ पढ़ने के लिए प्रेरक होती हैं। इसमें रोज़मर्रा के अनुभवों को लिखा गया है और इसमें बताया गया है कि कैसे अपनी धारणाओं को बदलकर, हम अपने लक्ष्य और आने वाली चुनौतियों से बेहतर तरीके से पार पा सकते हैं।

भारत को चीन पर भी रखना चाहिये फोकस- राज शुक्ला
रशिया-यूक्रेन बृर लैसन्स पर लेफिनेंट जनरल श्री राज शुक्ला एवं ब्रिगेडियर श्री संजय अग्रवाल के बीच संवाद हुआ। इस पर श्री राज शुक्ला ने कहा कि यूक्रेन में रूसी फौज लगातार हमले कर रही है, जिसमें कई सरकारी भवनों को निशाना बनाया गया है। इस जंग को रोकने की दिशा में अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन समेत कई देशों ने रूस और उनके सहयोगियों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाया है। यह लड़ाई शक्ति और आर्थिक स्थिति की लड़ाई बन गया है। अब धीरे धीरे इस लड़ाई का स्वरूप बदलता जा रहा है। प्राइवेट सेक्टर पार्टिसिपेट, संचार एवं अन्य की कमियों के कारण यूक्रेन को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आजकल परेस्पशन और मनोवैज्ञानिक युद्ध की अहमियत बढ़ती दिखाई दे रही है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर काफी कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। शीत युद्ध के समय भी ऐसा हुआ था। तब भी अमेरिका और नेटो ने प्रतिबंध लगा दिया था। भारत का जिस तरह से फोकस पाकिस्तान में है। उसी प्रकार फोकस भारत को चीन पर भी रखना चाहिये। कोई भी लड़ाई फौजी की नहीं बल्कि फौजी और सरकार दोनों की होती है। उदाहर देते हुये बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य मध्यप्रदेश का हिस्सा रहा है और छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से फौजी और सरकार दोनों ही लड़ रही हैं। यूक्रेन और रूस की लड़ाई से वे दोनों देश तो परेशान ही हैं। पूरा विश्व इस लड़ाई से परेशान है। जब भी विश्व गुरू बनने की बात होती है तो उसमें विज्ञान, संचार, साधन एवं अन्य आधारसभूत संरचना की जाना चाहिये।  

ऑस्कर ही हमारी फिल्म का स्टैंडर्ड नहीं है- कबीर बेदी 
तीसरे सत्र में लेखक, मशहूर अभिनेता कबीर बेदी के जीवन एवं उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक अ लाइफ एक्सट्राऑर्डिनरी पर श्री राघव चंद्रा की चर्चा हुई। अनुभव साझा करते हुये अभिनेता कबीर बेदी ने कहा कि इटली में कई बार फिल्म और सीरियल्स के लिये ऑडिशन दिये। कई महीने के बाद इटली टेलिवजन के सीरियल और फिल्मों में करने का अवसर मिला। इसके बाद अमेरिका हॉलीवुड में काम करने के बाद ही भारत लौटा और यहां ऑल इंडिया रेडियो में काम किया। उससे भी सीखने का मौका मिला और उसके बाद पॉकेट में 7 रूपये लेकर मुंबई पहुंचा। इसके पीछे मेरे परिवार और मेरी पत्नी का बहुत सपोर्ट रहा है। चर्चा के दौरान उन्होंने अपने कई अनुभवों को साझा किया और उन्होंने युवाओं से कहा कि युवाओं को सपना देखने की हिम्मत करते रहना चाहिये, लक्ष्य को बनाना चाहिये। सपने देखने से ही लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। वहीं फिल्म पर कहा कि ऑस्कर ही हामरी फिल्म का स्टेंडर्ड नहीं है। हर देश अपने राष्ट्र, रीजन और लोगों के लिये फिल्म या सिनेमा का निर्माण करता है।मेरा भोपाल तीसरी बार आना हुआ है।

लोकतंत्र देश की जनता के लिए है एक परिवार के लिए नहीं - केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव 

केंद्रीय जल एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने द राइस ऑफ बीजेपी बुक पर चर्चा करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जिस आधार पर कांग्रेस को खड़ा किया था वो आज एक परिवार में सिमट कर रह गई है। लोकतंत्र एक परिवार में सिमटकर रह जायेगा तो ऐसे लोकतंत्र का क्या मतलब। लोकतंत्र देश की 131 करोड़ जनता के लिए तैयार किया गया है। इस बात को बीते आठ सालों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने स्थापित किया है। हमारी सरकार संघर्ष नहीं विमर्श पर विश्वास करती है। हमने गांव और शहर को एक साथ विकास करने की योजना पर काम किया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा में आडवाणी जी ने राम मंदिर के लिए यात्रा निकाली, 370 की समाप्ति के लिए लगातार संघर्ष हुआ यह सब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी ने पूरा करके दिखाया है। प्रधानमंत्री मोदी की आठ वर्षों की सरकार में गरीब कल्याण की योजनाओं पर सबसे ज्यादा काम हुआ है जिनका लाभ देश की जनता को मिला है। 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का व्यापक विस्तार हुआ है यह पार्टी की लोकप्रियता का प्रतीक है। हम लोग राजनीति में जनता के हित के कैमिस्ट्री पर बात करते हैं तो गणित के पंडित फैल हो जाते हैं। लेकिन पिछले मध्यप्रदेश में कैमेस्ट्री जीत गई लेकिन संख्या में हम फैल हो गई। भारतीय जनता पार्टी ने 1950 में एक परिवार, एक विधान और एक निशान का संकल्प लिया था जिसे हमने पूरा किया है। हिमाचल प्रदेश में हुए चुनाव में पार्टी की हार पर भूपेंद्र सिंह ने कहा कि अगर लोकतंत्र में एक ही पार्टी राज करेगी तो मजा नहीं आयेगा, हालांकि हम हिमाचल प्रदेश में सिर्फ 1 प्रतिशत वोट से हारे हैं। 

वेटलॉस इंडस्ट्री हर पांच साल में बनाती है एक विलेन - रूजुता दिवेकर 

सोशल मीडिया के इस जमाने में हर पांच साल में वेटलॉस इंडस्ट्री को एक विलेन चाहिए होता है। यह इंडस्ट्री राइस, ग्लूटन, शुगर, घी को समय-समय पर विलेन बना देती है। यह सब लोगों को भ्रमित करने के लिए इनफ्लुएंसर द्वारा रचा गया एक एजेंडा होता है जिसकी बात सुनकर हम लोग वेटलॉस करने के लिए शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व देने वाला मील खाना बंद कर देते हैं। अगर आपको किसी इन्फूएलेंर्सस को फॉलो करना है तो अपनी दादी और नानी को करो। वो सही इनफ्लुएंसर है। रुजुता ने बताया कि कामकाज के स्ट्रेस में अक्सर हम सही ढंग से खाना नहीं खाते हैं।जिसका नुकसान हमारे शरीर को उठाना पड़ता है। अगर आपको अपने शरीर और मन को स्वस्थ रखना है तो सबसे अच्छा है कि आप शाम को चार से छह बजे के बीच में कुछ अच्छा डाइट जरूर ले। कोशिश करें कि इसे पूरे सप्ताह के लिए फॉलो करें। इसका फायदा यह होगा कि आप रात में डिनर के समय पर कम खाना खायेंगे और आप समय से सो पायेंगे और अगले दिन सुबह जल्दी उठकर जिम, योगा क्लास, वॉक पर जाय पायेंगे। कोशिश करें कि सीजनल फूड जरूर खायें। रुजुता ने लोगों को खाने का एक मंत्र दिया जिसमें उन्होंने कहा - ईट लोकल, सीजनल और ट्रेडिशनल फूड। जीवन में स्वस्थ रहने का सबसे अच्छा और बेहतर मंत्र यही है। अपनी किताब के बारे इटिंग इन द एज ऑफ डाइटिंग पर चर्चा करते हुए रुचिता ने कहा कि अन्न खाने से अब तक कोई मोटा नहीं हुआ है। जरूरी यह है कि आप क्या और कब खाते हैं। अगर आप खाना खाते समय में अपने व्हाट्सएप, मोबाइल, आईपेड और टेलीवीजन से दूरी बनाकर रखेंगे तो आप जीवन में हमेशा स्वस्थ रहेंगे।

जब प्रधानमंत्री वाजपेयी ने नवाज शरीफ को कहा सीधे बात क्यों नहीं करते - शरत सभरवाल 

लेखक और रिटार्यड आईएफएस ऑफिसर शरत सभरवाल ने भारत पाकिस्तान के रिश्ते और पाकिस्तान में सेना की स्थिति पर लिखी गई अपनी किताब अवर पाकिस्तान कॉनिन्ड्रम पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान का विभाजन 1947 को हुआ।भारत ने अपना संविधान 1949 में तैयार कर लिया लेकिन पाकिस्तान में संविधान को लेकर इतनी समस्या हुई कि उन्हें एडॉप्ट किया हुआ संविधान तैयार कर उसे लागू करने में आठ साल का समय लगा। जैसे-तैसे संविधान तो लागू हुआ तभी से पाकिस्तान आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है। आर्थिक समस्याओं को निपटाने के लिए कई बैठकों का दौर चला लेकिन यह समस्या अब तक हल नहीं हो पाई है। इस दौरान शरत सभरवाल ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा फरवरी 1999 में पाकिस्तान की यात्रा का किस्सा बताते हुए कहा कि नवाज शरीफ और वाजपेयी जी की बैठक के जो अहम मुद्दे थे उन पर पहले से चर्चा हो चुकी थी वो सब लगभग तय थे। फिर भी नवाज शरीफ ने वाजपेयी जी से कहा कि मैं आपको एक रंजीत सिंह के दरबारी का एक लतीफा सुनाना चाहता हूं। वाजपेयी जी ने कहा सुनाओ- नवाज ने कहा एक बार एक लालची दरबारी महाराज के पास गया और वहां जाकर उसने कहा कि आज मेरे सपने में मेरे अब्बा आये थे उन्होंने कहा था कि तुम महाराजा के पास जाओ वे तुम्हें 100 अशरफी देंगे। यह सुन महाराजा ने कहा कि मेरे अब्बा भी मेरे सपने में आये और उन्होंने मुझे कहा था कि जो तुमसे 100 अर्शफी मांगेगा तुम उसे 100 जूते देना। इस पर वाजपेयी जी नवाज शरीफ को दो टूक कहा आप सीधी बात क्यों नहीं अमेरिका के माध्यम से बात करने से कुछ हासिल नहीं होगा। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तब तक सामान्य नहीं हो सकते जब तक पाकिस्तान सामान्य नहीं होता। जब तक वो बालाकोट, पठानकोट जैसी गतिविधियां करेगा तो उरी और सर्जिकल स्ट्राइक भी होगा। इस दौरान उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ती खाई के बावजूद पाकिस्तान ने भारत के क्षितिज पर अपना दबदबा कायम रखा है। पाकिस्तानी राज्य की प्रकृति, इसकी आंतरिक गतिशीलता और भारत पर इसके प्रभाव की जांच करती है। 

सदगुरु से मिलने के बाद मैं चमत्कार की खोज में जुट गई- अरुंधति सुब्रहमण्यम

सदगुरु मोर इन द लाइफ पुस्तक पर चर्चा करते हुए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त लेखिका अरुंधति सुब्रहमण्यम ने कहा कि मानव का स्वभाव है कि वो पूरे जीवन भर कुछ न कुछ नया सीखते रहे। कोई भी व्यक्ति कभी अपने आप में कम्पलीट नहीं होता। कविता और आर्ट को जानने की मेरे अंदर जिज्ञासा 10-11 साल की उम्र से शुरू हो गई थी। इस दौरान मैंने कई सालों तक सिर्फ कविता और आर्ट के बारे में जानने की कोशिश करती रही। 2004 में मुझे पहली बार मुंबई में सदगुरु महाराज के एक सत्र को अटेंड करने का मौका मिला। उस सत्र के बाद जैसे मेरे जीवन का धारा ही बदल गई और मैं चमत्कार की खोज में लग गई। उन्होंने कहा कि अस्तित्व की गुत्थियों को सुलझाने और सत्य की झलक पाने की कोशिश में मनुष्य हमेशा से यात्राएं करता रहा है। उसकी यात्रा की कहानियाँ युगों पुरानी हैं। अरुधंति ने बताया कि मेरी यह किताब सद्गुरु की असाधारण कहानी है जो एक युवा अज्ञेयवादी है जो योगी बन गया। एक जंगली मोटर साइकिल चालक जो रहस्यवादी बन गया। यह एक ऐसे व्यक्ति की जीवन यात्रा को फिर से बनाना चाहता है जो रहस्यवाद के साथ तर्कसंगत, करुणा के साथ अश्रद्धा और जीवन के संक्रामक प्रेम के साथ गहरे आत्म-ज्ञान को जोड़ता है। यह किताब आपको अपने आध्यात्मिक आत्म का पता लगाने के लिए सशक्त बनाती है और आपके जीवन को अच्छी तरह से बदल सकती है। इस किताब को लिखना मैंने 2006 में शुरू किया था जिसे पूरा करने में 4 साल का समय लगा।

पुरातन काल से ही भारत वैक्सीन का सबसे बड़ा उत्पादक: डा. सज्जन यादव
रंगदर्शनी कार्यक्रम के पहले सत्र में भारत में वैक्सीन की विकास यात्रा पर बात करते हुए डा. सज्जन यादव ने कहा कि, भारत के पास वैक्सीन की खोज, प्रयोग और उत्पादन करने की क्षमता बहुत सदियों पहले ही आ गई थी। लेकिन साल 2021 में सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाला वर्ड वैक्सीन था। उसके बाद वैक्सीन आई और उसके साथी उससे जुड़ी हुई भ्रांतियां भी आई और यही कारण था मुझे इस पर शोध करने का मन हुआ था। आज लेकिन मॉडर्न वैक्सिनेशन में बहुत सारे लीडर्स हैं। यह अपने देश के वैज्ञानिक और डॉक्टर्स की मेहनत है की आज विश्व में लगभग 40 प्रतिशत वैक्सीन भारत से जाती है। कोरोना के दौरान हमारी सरकार, डॉक्टर्स, वैज्ञानिकों और उद्दमियों ने एकजुटता से साथ काम करके भारत की वैक्सीन इजाद की है। यह एक ऐतिहासिक कदम था लेकिन वैक्सीनेशन के लिए भी सुनियोजित टीम ने अपना काम किया था। इस वैक्सीन का कोई भी घातक रिएक्शन नहीं है। भारत में वैक्सीन को लेकर पहले बहुत संदेह था लेकिन जब हमारे पीएम और उनके साथ सभी बड़े जन प्रतिनिधियों ने अपना टीकारण कराया था, उसके बाद जनता में वैक्सीन को लेकर उत्सुकता बढ़ गई थी। वैक्सीन के खिलाफ विशेष लॉबी ने विरोध किया और तमाम तरह की भ्रांतिया फैलाई है। यह टीम हर वैक्सीन के आने के बाद ऐसे ही काम करती है। वैक्सीन के उत्पादन में काफी समय लगता है। इसका प्रयोग कई चरणों में होता है, जिसके लिए बहुत सारा पैसा भी चाहिए होता है। कोरोना वायरस के ओरिजन को लेकर अभी भी कुछ क्लियर नहीं है। इस चर्चा में तरुण पिथोडे़ भी चर्चा में शामिल हुए।

हमें साहित्य जितना सम्मान संख्याओं को भी देना चाहिए: प्रो. एस जी दानी
रंगदर्शनी के दूसरे सत्र में प्राचीन काल में जैन साहित्य में गणित की भूमिका पर चर्चा हुई. इस रुचिकर विषय पर चर्चा करते हुए प्रो. एस जी दानी ने कहा, मुझे आज भी समझ नही आता कि भारत के छात्रों में गणित को लेकर इतना डर क्यों है, जबकि प्राचीन काल ने हमें यह सिखाया है की सामान्य विकास में गणित का बहुत ही ज्यादा अहम रोल है रोजमर्रा के जीवन में भी गणित बहुत ज्यादा सहायक है। हम जितना सम्मान साहित्य को देते हैं उतना ही सम्मान हमें संख्याओं को भी देना चाहिए।
आगे बताते हुए प्रो दानी ने बताया कि, गणित एक निष्पक्ष ग्लोबल भाषा है जिसे हर कोई बहुत सहजता से उपयोग में ला सकता है। भारत में गणित को मोर की कलगी की संज्ञा दी जाती है। जो बहुत ही सटीक है। जब हम बड़े हो रहे होते हैं तो हम अपने स्कूल में नंबर्स के बारे में सीखते हैं। वहीं शून्य के प्रयोग के बारे में बताया कि, जैन समाज ने शून्य का प्रयोग सटीकता से शुरू किया था। ज्यामिति में भी जैन समुदाय का रोल बहुत अहम बताया। आर्क को सॉल्व करने के लिए जैनों ने एक सरल फार्मूला दिया था। इस चर्चा में भास्कर इंद्रकांती ने प्रो एस जी दानी से गणित के अहम बिंदुओं पर चर्चा की।

ऑपरेशन मेघदूत की सच्चाई और फैक्ट्स बताने के लिए लिखी किताब- अमित पॉल
रंगदर्शनी हॉल में आयोजित सत्र में रक्षा विशेषज्ञ और रिसर्चर अमित पॉल ने अपनी किताब मेघदूत, द बिगनिंग ऑफ द कोल्डेस्ट वॉर के बारे में बातचीत की। रिटायर्ड जनरल मिलान नायडू से चर्चा के दौरान अपनी किताब के बारे में बताते हुए अमित ने कहा कि आज भी ऑपरेशन मेघदूत के बारे में आज भी बहुत कम लोग जानते हैं। किताब लिखने के पीछे सियाचिन को लेकर फैली अफवाहों को दूर करना और फैक्ट्स को सही तरीके से प्रस्तुत करना एक महत्वपूर्ण कारण है। किताब सच्ची घटनाओं पर आधारित है। अमित ने कहा कि किताब ऐसे लिखी गई है कि कोई भी इसे 3 घंटे के भीतर आसानी से पढ़ सके और सियाचिन के साथ ही दूसरे फैक्ट्स भी आसानी से समझ सके। पाकिस्तान में सियाचिन को लेकर झूठ फैलाए जाते हैं। इन झूठों से पर्दाफाश करने के लिए किताब लिखी। यूएस के कार्टोग्राफर की गलती बताते हुए अमित ने कहा कि एनजे9842 से लेकर काराकोरम तक एक लाइन खींचने के कारण दोनों देशों के बीच गफलत फैली। इसे ही अंतरराष्ट्रीय एग्रीमेंट बताकर पाकिस्तान अफवाह फैलाता रहा है, जबकि एग्रीमेंट का वो हिस्सा था ही नहीं। एग्रीमेंट के मुताबिक अगर सीजफायर की लाइन बढ़ाई गई, तो वो उत्तर की दिशा में बढ़ाई जायेगी, जबकि ये लाइन पूर्वोत्तर की ओर बढ़ाई गई। किताब पर बन रही फिल्म को लेकर पूछे सवाल का जवाब देते हुए अमित ने कहा कि उन्होंने कई सैन्य अधिकारियों से बातचीत की और उनकी किताबों के जरिए संवादों को गढ़ा। अमित ने कहा कि उनके सामने फैक्ट्स थे बस उन्हें एक सीक्वेंस में जमाना था। रिटायर्ड जनरल मिलान नायडू ने किताब के बारे में बात करते हुए कहा कि यात्रा के बीच उन्होंने कुछ पन्ने पढ़ने के बारे में सोचा, लेकिन किताब इतनी बेहतरीन है की उन्हें पूरी किताब एक बार में ही पढ़नी पड़ी। अमित ने बताया कि ये किताब परेशानी की जड़ बताने के लिए थी और भविष्य में वो भारत और पाकिस्तान के बीच हुए एग्रीमेंट और मीटिंग्स का अध्ययन करने वाले हैं। सियाचिन जैसे दूसरे मुद्दों पर पाकिस्तान के क्या तर्क हैं इसपर भी स्टडी करेंगे।

बेहद खराब तरीके से प्लान किया गया था ऑपरेशन ब्लू स्टार- रमेश इंदर सिंह 
पंजाब के पूर्व चीफ सेक्रेटरी रमेश इंदर सिंह ने आर परशुराम से बात की। अपनी किताब टर्मोइल इन पंजाब पर बात करते हुए रमेश इंदर सिंह ने ऑपरेशन ब्लू स्टार और पंजाब को लेकर विचार रखे। उन्होंने कहा कि ब्लू स्टार एक बेहद खराब तरीके से प्लान किया गया और उसी खराबी से उसे फॉलो किया गया ऑपरेशन था। इसके बारे में जनरल वीके सिंह के साथ ही कई और सैन्य अधिकारी लिख चुके हैं। ये तक कहा जा चुका है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार जलियांवाला बाग से भी ज़्यादा खतरनाक था। उन्होंने आगे कहा कि खालिस्तान से जुड़े मुद्दों को लेकर विदेशी धरती पर बैठे लोग हमेशा कुछ ना कुछ करेंगे। लेकिन हमें उन लोगों पर ध्यान देने के बजाय अपने देश पर ध्यान देना चाहिए। मीडिया को भी ऐसी स्थितियों को हाईलाइट करने के बजाय नजरंदाज करना चाहिए। आज का पंजाब दूसरे राज्यों से बहुत ज़्यादा बेहतर है, क्योंकि वहां सांप्रदायिक सद्भाव का माहौल है। अंग्रेजों के आने के बाद से ऐसी भावना फैलाई गई की सांप्रदायिक सद्भाव कम हो रहा है। लेकिन महाराजा रंजीत सिंह ने सिख होने के बावजूद उन्होंने अपने कोर्ट की आधिकारिक भाषा बदलने के बजाय पर्शियन को ही जारी रखा। उनके विदेश मंत्री मुस्लिम थे, वित्त मंत्री हिंदू थे। कितना गुरुद्वारे को पैसा देते थे उतना ही मंदिर को भी देते थे।

अंग्रेजों ने धर्म के आधार पर बंटवारा करना शुरू किया
शुरुआत में पाकिस्तान ने पंजाब के भीतर ड्रग स्मगलर्स की मदद से हथियार सप्लाई किए। इसके जरिए भारत के धर्मों को बांटने की कोशिश की। अलग अलग तरीके से एकता तोड़ने की कोशिश की गई और अंत में क्या हुआ ये हम सब जानते हैं। नेता या राजनीतिक पार्टी अपने वोट बैंक के लिए अलग अलग तरीके अपनाते हैं और जितने ज्यादा लोग इससे प्रभावित होंगे उतना ही उनका वोट बैंक बढ़ेगा। पंजाब में नशे की पकड़ को लेकर बात करते हुए बताया कि उत्तर के ज़्यादातर इलाके नशे की जकड़ में है। मजाकिया लहज़े में उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और कई और राज्यों में शराब की खपत ज्यादा होती है लेकिन पंजाब को बदनाम कर दिया गया है।

समग्र सामाजिक भागीदारी से भारत विश्वगुरू बनेगा: राजीव कुमार
पीएम मोदी और उनके सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताते हुए राजीव कुमार ने कहा कि, हमें आज एक मानव कल्याण पॉलिसी की जरूरत है ना कि, हमें किसी जनसंख्या नियंत्रण पॉलिसी की जरूरत है। भारत की विदेश नीति पर चर्चा करते हुए कहा कि, विदेश नीति से ज्यादा हमें अपनी घरेलू नीति को मजबूत करने पर काम करना चाहिए। जिसपर यह सरकार काम करना शुरू कर चुकी है। जियो पॉलिटिक्स पर बोलते हुए कहा कि भारत और रूस का एक साथ होना जियो पॉलिटिक्स ही नही बल्कि ये एक अच्छा इकोनॉमिक मूव है। यह भारत और रूस के अच्छे इकोनॉमिक रिश्ते के लिए बहुत अच्छा है।
किसी भी देश के लिए आर्थिक स्वतंत्रता आज पूरे विश्व में सभी देश बड़े स्तर पर रणनीतिक कदम उठा रहे हैं ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी है कि यह देखें कि हमारा रिश्ता बाकी देशों से कैसा बन रहा है। आज हमारे पास पूरे विश्व से ज्यादा विविधता वाला समाज है।हमारी संस्कृति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमें बस एक समग्र अप्रोच रखनी होगी और हम स्वामी विवेकानंद के स्वप्न 'भारत एक विश्वगुरु' को पा सकेंगे। हम अगर प्रयास करते रहें तो तो हम अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष में 15000 डॉलर्स की प्रति व्यक्ति आय पर होंगे। इसके लिए पहले हमें अपने राज्यों को अपने स्तर पर प्रयास करना होगा, फिर हम उसे केंद्र के स्तर पर ले जा सकते हैं।

अर्बन होने के फायदे से ज्यादा नुकसान है- सीमा मुंदोली
सीमा मुंदोली ने सिटीज, इनवाइयरमेंट और सस्टेनबल डेवेलेपमेंटे पर चर्चा करते हुए कहा कि अर्बन होने का फायदा भी बहुत होता है। वहीं इसका नुकसान भी है। उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि मैं तीन बार बाढ़ में फंसी हूं, इसके बाद मुझे रेसक्यू किया गया है। हाल ही में बेंगलुरु में आई बाढ़ का भी उदाहरण देते हुए अर्बन डेवलेपमेंट के नुकसान को भी समझाया। साथ ही उन्होंने कहा कि 2047 में भारत कैसा होगा और इसके सामने कैसी चुनौतियां आएंगी इसके बारे में बताते हुए कहा कि, अगर हम संसाधनों का दुरुपयोग करना नहीं छोड़े तो 2047 तक इमरजेंसी तक का सामना करना पड़ेगा। इसलिए हमें पर्यावरण और उससे जुड़े हुए संसाधनों का उपयोग बहुत सावधानी से करना पड़ेगा और इसके साथी इनके संवर्धन के लिए एक इकोसिस्टम भी तैयार करना होगा। इसमें हमने कुछ काम भी शुरू किया है, जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स हाइड्रोजन गैस का उपयोग सोलर सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं। पब्लिक एवं प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए हमें इन चुनौतियों का अच्छे से सामना कर सकते हैं। ऊर्जा के संवर्धन एवं मैनेजमेंट पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जिस तरीके से शहरीकरण बढ़ रहा है वह बहुत बुरे ही समय को आमंत्रित भी कर रहा है आज हमारे देश में अच्छे टाउन प्लानर्स की कमी है जिसके वजह से शहरों में संसाधनों का दुरुपयोग रहा है। इन सभी चुनौतियों से निपटने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप बहुत ही ज्यादा जरूरी है। हमें अपने छात्रों को उनके विद्यालय स्तर पर भी इन सभी चुनौतियों के बारे में समझाना चाहिए और उद्यमिता को ध्यान में रखते हुए उन्हें उस हिसाब से ही प्रशिक्षण देना चाहिए ताकि वह आगे इन सभी चुनौतियों के लिए एक इकोसिस्टम तैयार करने में मदद करें।

समग्र सामाजिक भागीदारी से भारत विश्वगुरू बनेगा: राजीव कुमार

भोपाल लिट्रेचर एंड आर्ट फेस्टिवल के दूसरे दिन पीएम मोदी और उनके सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताते हुए राजीव कुमार ने कहा कि, हमें आज एक मानव कल्याण पॉलिसी की जरूरत है ना कि, हमें किसी जनसंख्या नियंत्रण पॉलिसी की जरूरत है। भारत की विदेश नीति पर चर्चा करते हुए कहा कि, विदेश नीति से ज्यादा हमें अपनी घरेलू नीति को मजबूत करने पर काम करना चाहिए। जिसपर यह सरकार काम करना शुरू कर चुकी है। जियो पॉलिटिक्स पर बोलते हुए कहा कि भारत और रूस का एक साथ होना जियो पॉलिटिक्स ही नही बल्कि ये एक अच्छा इकोनॉमिक मूव है। यह भारत और रूस के अच्छे इकोनॉमिक रिश्ते के लिए बहुत अच्छा है। स्वच्छ भारत और शौचालय की व्यवस्था करना लोगों के स्वास्थ्य संबंधी विकारों को दूर करने के लिए एक अच्छा कदम है। केंद्र और राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय दोनों को एक साथ होकर काम करना होगा। आयुष कार्ड एक बहुत अच्छा कदम है। नीति आयोग ने आयुर्वेदा और अपने पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए अहम कदम उठाएं हैं। कोई भी देश अपने आंतरिक एकता के कारण ही विकास की राह पर आगे चल सकता है। आज हमारे पास पूरे विश्व से ज्यादा विविधता वाला समाज है।हमारी संस्कृति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमें बस एक समग्र अप्रोच रखनी होगी और हम स्वामी विवेकानंद के स्वप्न 'भारत एक विश्वगुरु' को पा सकेंगे। हम अगर प्रयास करते रहें तो तो हम अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष में 15000 डॉलर्स की प्रति व्यक्ति आय पर होंगे। इसके लिए पहले हमें अपने राज्यों को अपने स्तर पर प्रयास करना होगा, फिर हम उसे केंद्र के स्तर पर ले जा सकते हैं। हमें जमीनी स्तर पर शासन प्रशासन की नीतियों की निगरानी जरूरी है। क्योंकि हम तभी विकसित हो पाएंगे जब हमारी योजनाएं हमारे देश के आखिरी व्यक्ति तक पहुंच जाएंगी, जिसके लिए सरकार के साथ साथ सामाजिक भागीदारी की भी जरूरत है। इस महत्वपूर्ण चर्चा में टी के अरुण ने मंच साझा किया।

कैंसर से ज़्यादा मानसिक स्वास्थ पर हाय करना ज़रूरी

मेंटल प्रोब्लम होने की कैंसर होने से कम आशंकाएं हैं लेकिन लोग फिर भी इसपर बात नहीं करते। किताब के नाम को लेकर बात करते हुए अपर्णा ने कहा कि वो भी मानसिक समस्या से जूझ रही थीं, और मुन्नाभाई एमबीबीएस फिल्म से प्रेरित होकर किताब का नाम रखा।अपर्णा ने बताया कि लिखना मेरा शौक रहा है। लेकिन मुझे और मेरे बुक क्लब ने सोचा कि ये एक किताब का टॉपिक हो सकता है और कई लोगों की इससे मदद हो सकती है। इस दौरान अपर्णा ने अपने बाइपोलर डिसऑर्डर के बारे में भी बातचीत की और बताया कि किस तरह उन्होंने इससे लड़ना सीखा। अपर्णा ने बताया कि कई लोगों को विश्वास नहीं था कि मैं किताब लिख पाऊंगी। मेरे डॉक्टर्स भी इसके खिलाफ थे, ऐसे में मैंने किसी को बताया नहीं कि मैं किताब लिख रही।हूं। कुछ वक्त बाद जब पेंगुइन पब्लिकेशंस से ऑफर मिला तब पति के साथ ही दूसरे लोगों को इसकी जानकारी दी। अपर्णा ने बताया कि मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों को लव थेरेपी की बेहद जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि जो भी लोग अपने प्यार के चलते आप से जुड़े हैं वो अहम रोल अदा करते हैं। अपर्णा ने 3 टी के बारे में भी बताया। ये तीन गुण आपके केयरटेकर में होने चाहिए। जिसमें पहला टी ट्रस्ट यानी विश्वास होना चाहिए। दूसरा टी यानी ट्रिगर मैनेजिंग। तीसरा टी यानी थेरेपी के बारे में बताया। पुरुषों में होने वाली मानसिक समस्या को लेकर अपर्णा ने बताया कि महिलाएं मानसिक समस्याओं को लेकर ज्यादा खुलकर सामने आती हैं, लेकिन पुरुष ऐसा नही करते जो सही नहीं है। इसपर ध्यान देने की जरूरत है

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