भोपाल में होगा पानी पर मंथन... दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में जुटेंगे राज्यों के जल संसाधन मंत्री

भोपाल। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने वर्ष 2047 का लक्ष्य निर्धारित करने वाली सरकार मप्र में जल प्रबंधन नीति बनाएगी। इसके लिए 5 व 6 जनवरी को राज्यों के जलसंसाधन मंत्रियों का सम्मेलन आयोजित किया गया है। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री शेखावत इसका शुभारंभ करेंगे। इसके बाद सचिव स्तर के अधिकारियों द्वारा दी गई रिपोर्ट पर देश भर से जुटे जल संसाधन मंत्री विभिन्न सत्रों में अपने-अपने राज्यों की चुनौतियों को रखेंगे। इसके बाद इसे मूर्तरूप दिया जाएगा। 
राजधानी में आयोजित प्रेस वार्ता में केन्द्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल ने बताया कि यह आयोजन प्रधान मंत्री नरेंद्र के वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के महत्वकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने सम्बंधी प्रयासों के तहत किया जा रहा है। यह समग्र सरकार" और "समग्र देश" दृष्टिकोण पर आधारित है। इसका उद्देश्य आने वाले वर्षों में देश का विकास इन दस्तावेजों में बनाए गए रोड मैप से प्रभावशाली ढंग से जुड़ा होगा। इस प्रकार इंडिया 2047 योजना का ब्लू प्रिंट में जल विशेष महत्व रखता है जो भारत को विकास की महान ऊंचाइयों पर ले जाएगा। 
इस दौरान उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय विभागों और मंत्रालयों को एक मंच पर लाने वाले जल " विषय पर यह पहला सम्मेलन है। पेयजल, सतही जल, भूजल, कृषि के लिए पानी, स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधित समस्याएं एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं और इनका अकेले समाधान नहीं किया जा सकता है। इसलिये सम्मेलन के दौरान राज्यों के मंत्री स्वयं जल सुरक्षित भारत के लिए अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। सम्मेलन में एक पूर्ण सत्र होगा जो वाटर विजन पर फोकस के साथ सम्मेलन का एजेंडा तय करेगा।  

यह है कार्यक्रम का उद्देश
जल शक्ति मंत्रालय जल विजन 2047 विषय के साथ जल के संबंध में अखिल भारतीय राज्य मंत्रियों का प्रथम वार्षिक सम्मेलन आयोजित कर रहा है। सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के हितधारकों से इस विजन के लिए इनपुट प्राप्त करना है, जल राज्य का विषय होने के कारण और राज्यों के साथ जुड़ाव और साझेदारी में सुधार लाने तथा जल शक्ति मंत्रालय की पहल और योजनाओं को साझा करना भी इसका उद्देश्य है। क्योंकि जल न केवल जीवन के लिए बल्कि संवृद्धि और सतत विकास के लिए भी जरूरी है। 

इन विषयों पर मंथन
 (i) जल की कमी. अधिशेष जल और पहाड़ी क्षेत्रों में जल सुरक्षा (ii) अपशिष्ट जल / जल के पुनः उपयोग सहित जल उपयोग दक्षता में बढ़ोतरी: (iii) वॉटर गवनेंस: (iv) जलवायु परिवर्तन अनुकूल जल अवसंरचना और (v) जल गुणवत्ता।

रहेगी इनकी सहभागिता
देश के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के जल संसाधन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) और सिंचाई के राज्य मंत्रियों को यहाँरोड मैप तैयार करने के लिए आमंत्रित किया गया है। कृषि उत्पादन आयुक्तों के साथ-साथ सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के जल संसाधन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) और सिचाई के वरिष्ठ सचिव भी सम्मेलन में भाग लेंगे। जल शक्ति मंत्रालय ने केंद्रीय लाइन मंत्रालयों/विभागों के सचिवों को भी आमंत्रित किया है

0/Post a Comment/Comments

Previous Post Next Post