नाबार्ड ने मध्य प्रदेश में 2023-24 के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के लिए रु. 2,58,598 करोड़ की ऋण संभाव्यता का आंकलन किया

भोपाल । नाबार्ड ने मध्य प्रदेश राज्य में वर्ष 2023-24 हेतु बैंकों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत रु.2,58,598 करोड़ का ऋण संभाव्यता का आंकलन किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6% अधिक है। इसी क्रम में, मंगलवार 24 जनवरी 2023 को होटल ताज के सभाकक्ष में नाबार्ड द्वारा आयोजित “राज्य ऋण संगोष्ठी” के दौरान जगदीश देवड़ा, वित्त मंत्री, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2023-24 के लिए स्टेट फोकस पेपर का विमोचन किया। भारत की 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था में मध्य प्रदेश के 550 बिलियन डॉलर लक्ष्य प्राप्त हेतु कृषि ऋण की भूमिका एवं उसके प्रमुख मुद्दे पर नाबार्ड द्वारा प्रकाशित दस्तावेज़ का भी विमोचन किया गया।
इस कार्यक्रम में नीरज निगम, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक निरूपम मेहरोत्रा, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड, बिनोद कुमार मिश्रा, मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक, तरसेम सिंह ज़ीरा, एसएलबीसी संयोजक, अजित केसरी, अपर मुख्य सचिव जे एन कंसोटिया , अपर मुख्य सचिव, अशोक बर्नवाल, अपर मुख्य सचिव, तथा प्रदेश के प्रमुख बैंक अधिकारियों ने सहभागिता की। 
 वित्त मंत्री श्री देवड़ा जी नाबार्ड द्वारा राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने हेतु किए गए कार्यो की सराहना की और बैंकों और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे कंधे से कंधे मिलाकर मिलजुल कर कार्य करें जिससे प्रदेश के ग्रामीण और कृषि क्षेत्र का विकास किया जा सके। बैंक अर्थव्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके सकारात्मक सहयोग के बगैर आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति संभव नहीं है। अत: राज्य सरकार, नाबार्ड, आरबीआई और सभी बैंकों से अपेक्षा है कि मध्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास में सकारात्मक भूमिका निभाएं। उन्होने बैंकों से आह्वान करते हुए कहा कि नाबार्ड द्वारा आंकलित रु.2,58,598 करोड़ के स्टेट फोकस पेपर के अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में ऋण वितरित करें जिससे किसान, महिला, बेरोजगार युवक व युवतियाँ और उद्यमियों को विकास की मुख्य धारा में जोड़ा जा सके। मध्य प्रदेश सरकार कृषि और ग्रामीण विकास के लिए संकल्पबध्द है तथा इसके लिए हर जरूरी सहायता उपलब्ध करायेगी।  
 निरूपम मेहरोत्रा, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड ने कृषि तथा ततसंबंधित विभिन्न क्षेत्रों में विकास की संभावना पर प्रकाश डाला तथा बताया कि वर्ष 2023-24 हेतु बैंक ऋण के माध्यम से वित्त पोषण के लिए उपलब्ध कुल संभाव्यता हेतु ₹2,58,598 करोड़ का अनुमान है, जो कि 2022-23 (₹2,42,967 करोड़) के अनुमानों से 6.43% अधिक है। संधारणीय कृषि, किसान की आय में वृद्धि, कृषि में पूंजी निर्माण का सृजन, कृषि संबंधित गतिविधियों का विकास पर ध्यान केन्द्रित करना वित्त वर्ष 2023-24 के लिए संभावित आकलन में अन्य महत्वपूर्ण अंतर्निहित आधार हैं। इस दस्तावेज़ में अनुमानित प्राथमिकता वाले क्षेत्र की ऋण क्षमता, निश्चित रूप से वर्ष 2023-24 के लिए अपनी वार्षिक ऋण योजनाओं को तैयार करने में बैंकों के लिए एक उपयोगी 


मार्गदर्शिका होगी और राज्य सरकार, नीति निर्माता और हितधारकों द्वारा उचित निर्णय और नीतियों से अनुकूल वातावरण तैयार करके राज्य के विकास में तीव्रता लाई जा सकेगी। इन सब प्रयासों से ही मध्य प्रदेश राज्य को 2027 तक 550 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाई जा सकती है।
इसी दौरान मंच से प्रदेश में स्वयं सहायता समूह, वित्तीय साक्षरता, किसान उत्पादक समूहों के संवर्धन आदि में उत्कृष्ट कार्य के लिए उल्लिखित गतिविधियों में विभिन्न बैंकों को पुरस्कृत किया। वर्ष 2023 "अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष" के रूप में मनाया जा रहा है, इस अवसर पर नाबार्ड द्वारा प्रदेश में प्रमुख रूप से पाए जाने वाले मिलेटस का प्रदर्शन "मिलेटस पवैलियन" के माध्यम से किया गया, जिसमें स्वास्थ की दृष्टि से मिलेटस का महत्व एवं उनके पोषण मूल्यों को प्रदर्शित किया गया। साथ ही “प्रदेश में नाबार्ड द्वारा मिलेटस के प्रोत्साहन हेतु” किये गए सफल प्रयासों पर एक पत्रक का विमोचन भी किया गया ।
 अजीत केसरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन वित्त विभाग द्वारा क्रेडिट प्रवाह को व्यवस्थित करने में बैंकरों की अपेक्षाओं पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि बैंकों को फसल उत्पादन के वित्तपोषण के अलावा कृषि प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन क्षेत्र के वित्तपोषण पर भी ध्यान देना चाहिए। अशोक बर्नवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव ने राज्य में कृषि क्षेत्र के संबंध में विकास के संभावित क्षेत्रों पर भी प्रकाश डाला और आशा व्यक्त की कि बैंकों को बांस की खेती सहित लंबी अवधि की फसलों के वित्तपोषण के लिए आगे आना चाहिए।नीरज निगम, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक ने नाबार्ड द्वारा एक ब्लॉक से लेकर प्रदेश स्तर पर एक व्यापक दस्तावेज तैयार किए जाने के प्रयासों की सराहना की, जो प्रदेश की प्रगति के लिए ऋण लक्ष्य तय करने में सहायक होगा। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से कृषि ऋण क्षेत्र में प्रवेश करने वाली नई एजेंसियों के आलोक में अपने व्यवसाय मॉडल को फिर से तैयार करने का आह्वान किया। इसके अलावा, बैंकों को त्वरित निर्णय लेने और वित्तीय साक्षरता पर भी काम करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। बिनोद कुमार मिश्रा, मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक ने नाबार्ड की बौध्दिक क्षमता, दूरदर्शिता, अनुभव तथा लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता की प्रशंसा की और सभी बैंक प्रतिनिधियों की ओर से आश्वस्त किया कि इस लक्ष्य को पाने के लिए सभी बैंक मिलकर प्रयास करेंगे। श्री तरसेम सिंह ज़ीरा, एसएलबीसी संयोजक ने आश्वस्त किया कि इस लक्ष्य को पाने के लिए सभी बैंक मिलकर प्रयास करेंगे।
इस अवसर पर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और निगमों के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ कार्यपालक उपस्थित थे।

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