RBI ने रेपो रेट में की 35 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी


रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट में 35 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है। RBI ने लगातार पांचवीं बार नीतिगत ब्याज दर रेपो रेट में 0.35 फीसदी का इजाफा किया है। इसी के साथ रेपो रेट 5.90 से बढ़कर 6.25 फीसद पर पहुंच गई है। रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद इसका एलान किया।

अगले 12 महीनों में महंगाई दर 4 फीसदी से ऊपर रहने की उम्मीद

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार 7 दिसंबर 2022 को द्विमासिक मौद्रिक नीति समिति की बैठक के समापन के बाद मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि अगले 12 महीनों में महंगाई दर 4 फीसदी से ऊपर रहने की उम्मीद है। अक्टूबर-दिसंबर के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.6% कर दिया गया है।

2023 के लिए GDP की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान

वित्तीय वर्ष 2023 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। 30 सितंबर को अपने अंतिम नीति वक्तव्य में, RBI की मौद्रिक नीति समिति ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि 7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।

'वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत'

उल्लेखनीय है कि RBI ने मई में ऑफ-साइकिल 40 बीपीएस वृद्धि के ऊपर जून के बाद से तीन बार प्रमुख बेंचमार्क उधार दर में 50 आधार अंकों (BPS) की बढ़ोतरी की है। दरअसल इसे ऐसे समझें कि रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में मई से लेकर अब तक नीतिगत ब्याज दर रेपो रेट में पांचवीं बार इजाफा किया है। इससे पहले आरबीआई मई में रेपो रेट में 0.40 फीसदी, जून में 0.50 फीसदी और अगस्त में 0.50 फीसदी, सितंबर में 0.50 फीसदी का इजाफा कर चुका है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत की ग्रामीण मांग में सुधार हो रहा है और शहरी खपत बढ़ रही है। ऐसे में वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि अक्टूबर-दिसंबर के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाकर 4.4% और जनवरी से मार्च 2023 के लिए 4.2% कर दिया गया है।

'देश निवेश के लिए बना आकर्षक गंतव्य'

RBI गवर्नर ने कहा कि देश निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। वैश्विक अनिश्चितता के बीच महंगाई को काबू में लाने के मकसद से यह कदम उठाया गया है। दास ने कहा कि मुख्य महंगाई दर अभी भी ऊंची बनी हुई है, ऐसे में मौद्रिक नीति के स्तर पर सूझबूझ की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, खाद्य सामग्री की कमी और ईंधन की ऊंची कीमतों से गरीब सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

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