उपराष्ट्रपति की पहली बार राज्यसभा की अध्यक्षता, PM बोले-'आप में किसान और जवान दोनों समाहित'



दिल्ली । बुधवार ‘7 दिसंबर 2022′ को संसद के शीतकालीन सत्र में पहली बार उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा के सभापति के तौर अध्यक्षता की। याद हो, ’11 AUG 2022’ को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के रूप में जगदीप धनखड़ ने शपथ ली थी।

संसद का शीतकालीन सत्र आज ‘7 दिसंबर 2022’ से शुरू हो गया है। यह सत्र 29 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान दोनों सदनों की कुल 17 बैठकें होंगी जिसमें कुल 16 विधेयक पेश किए जाएंगे। वहीं ये सत्र इसलिए भी खास रहने वाला है क्योंकि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पहली बार राज्यसभा के सभापति के तौर पर इस सत्र में शामिल हो रहे हैं।

PM मोदी ने इन शब्दों के साथ किया जोरदार स्वागत

इस अवसर पर पीएम मोदी ने सदन और पूरे देश की तरफ से उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का स्वागत करते हुए उन्हें विशेष बधाई दी। पीएम मोदी ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के संबंध में कहा- आपने एक सामान्य परिवार से आकर के संघर्षों के बीच जीवन यात्रा को आगे बढ़ाते हुए आज जिस स्थान पर पहुंचे हैं, वो देश के कई लोगों के लिए अपने आप में प्रेरणा का एक कारण है।

’किठाना के लाल की उपलब्धियों को आज देख रहा देश'

पीएम मोदी ने आगे जोड़ते हुए कहा, इस उच्च सदन में इस गरिमामयी आसन को आप सुशोभित कर रहे हैं। मैं कहूंगा कि किठाना के लाल की उपलब्धियों को देश देख रहा है तो देश की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है।

’आप में किसान और जवान दोनों समाहित'

पीएम मोदी ने कहा, यह सुखद अवसर है कि आज आर्म्ड फोर्सेज फ्लैग डे भी है, पीएम मोदी ने ध्यानाकर्षित करते हुए कहा आदरणीय सभापति आप झुंझनु से आते हैं झुंझनु वीरों की भूमि है। शायद ही कोई परिवार ऐसा होगा कि जिसने देश की सेवा में अग्रिम भूमिका न निभाई हो। यह भी सोने पर सुहागा है कि आप स्वयं भी सैनिक स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा किसान के पुत्र और सैनिक स्कूल के विद्यार्थी के रूप में मैं देखता हूं कि आप में किसान और जवान दोनों समाहित हैं। इसी के साथ पीएम मोदी ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की अध्यक्षता में इस सदन से सभी देशवासियों को आर्म्ड फोर्सेज फ्लैग डे की भी शुभकामनाएं देता हूं।

उपराष्ट्रपति का स्वागत दो महत्वपूर्ण अवसरों का बना साक्षी

गौरतलब हो, संसद के उच्च सदन ने आज उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का ऐसे समय में स्वागत किया जब देश दो महत्वपूर्ण अवसरों का साक्षी बना है। ज्ञात हो, अभी कुछ ही दिन पहले दुनिया ने भारत को G20 की मेजबानी का दायित्व सौंपा है। साथ ही यह समय अमृत काल के आरंभ का समय है। यह अमृत काल एक नए विकसित भारत के निर्माण का कालखंड तो होगा ही साथ ही भारत इस दौरान विश्व के भविष्य की दिशा तय करने में भी बहुत अहम भूमिका निभाएगा।

उपराष्ट्रपति के मार्ग दर्शन में देश के संकल्पों को पूरा करने का प्रभावी मंच बनेगा

पीएम मोदी ने इस संबंध में कहा कि भारत की इस यात्रा में हमारा लोकतंत्र, हमारी संसंद, हमारी संसदीय व्यवस्था की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। पीएम मोदी ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की तारीफ करते हुए कहा, उच्च सदन को आपके जैसा सक्षम और प्रभावी नेतृत्व मिला है। आपके मार्ग दर्शन में हमारे सभी सदस्यगण अपने कर्तव्यों का प्रभावी पालन करेंगे। ये देश के संकल्पों को पूरा करने का प्रभावी मंच बनेगा।

पीएम मोदी द्वारा कहे गए उपरोक्त कथनों से स्पष्ट है कि इन मायनों में यह सत्र बेहद खास रहने वाला है। ऐसे में प्रख्यात वकील और पश्चिम बंगाल के पूर्व-राज्यपाल रह चुके जगदीप धनखड़ के कंधों पर देश के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी होगी। गौरतलब हो, संसद का शीतकालीन सत्र आज शुरू होगा। वहीं शीतकालीन सत्र की पूर्व संध्या पर सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस सहित दूसरे विपक्षी दलों ने चुनाव आयुक्त की एक दिन में नियुक्ति, चीन के साथ सीमा पर तनाव, महंगाई, ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर सरकार से चर्चा की मांग की है। आइए अब विस्तार से जान लेते हैं उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के वयक्तिगत जीवन के बारे में…

जगदीप धनखड़ के बारे में संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है -

1. शैक्षिक और पेशेवर पृष्ठभूमि

जगदीप धनखड़ ने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा किठाना गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने सरकारी मिडिल स्कूल, घरधाना और सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ में अध्ययन किया। अपनी कॉलेज की शिक्षा के लिए, उन्होंने महाराजा कॉलेज, जयपुर में प्रवेश लिया और बी.एससी. (ऑनर्स) भौतिकी में उत्तीर्ण हुए। उसके बाद, उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से विधि में डिग्री हासिल की।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक वकील के रूप में अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की, और पहली पीढ़ी के पेशेवर होने के बावजूद, वे देश के शीर्ष कानूनी विशेषज्ञों में से एक बन गए। 1990 में, उन्हें राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था। तब से, वे मुख्य रूप से सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहे हैं और उनका मुख्य कार्य क्षेत्र स्टील, कोयला, खनन और अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता से जुड़े मुकदमे हैं। वे देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में पेश हुए हैं और 30 जुलाई, 2019 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का पद ग्रहण करने तक राज्य के सबसे वरिष्ठ नामित वरिष्ठ अधिवक्ता थे। अपने कानूनी करियर के दौरान, वे 1987 में राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन, जयपुर के अध्यक्ष के रूप में चुने गए जो सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे। एक साल बाद, वे 1988 में राजस्थान बार काउंसिल के सदस्य भी बने।

2. संसदीय और सार्वजनिक जीवन

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 1989 में झुंझुनू संसदीय क्षेत्र से भारत की संसद के लिए चुने गए थे। इसके बाद, उन्होंने 1990 में संसदीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया। 1993 में, वे अजमेर जिले के किशनगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से राजस्थान विधानसभा के लिए चुने गए। एक विधायक के रूप में, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने लोकसभा और राजस्थान विधानसभा में महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य के तौर पर कार्य किया। केंद्रीय मंत्री के रूप में, वे यूरोपीय संसद में एक संसदीय समूह के उपनेता के रूप में एक प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2019 में, जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया था।

3. व्यक्तिगत विवरण

नाम : जगदीप धनखड़

पिता का नाम : स्व. श्री गोकल चंद

माता का नाम : स्व. श्रीमती केसरी देवी

जन्म तिथि: 18 मई, 1951

जन्म स्थान : ग्राम किठाना, जिला झुंझुनू, राजस्थान

वैवाहिक स्थिति : विवाहित (वर्ष, 1979)

जीवनसाथी का नाम : डॉ. सुदेश धनखड़

संतान : एक पुत्री (श्रीमती कामना)

रुचिकर विषय और क्षेत्र

पुस्तकों के उत्साही पाठक, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ एक खेल प्रेमी भी हैं और वे राजस्थान ओलंपिक संघ व राजस्थान टेनिस संघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। संगीत सुनना और यात्रा करना उनके अन्य शौक हैं। उन्होंने अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, इटली, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, चीन, हांगकांग, सिंगापुर आदि सहित अनेक देशों की यात्रा की है।

राज्य सभा के बारे में

राज्य सभा में 250 से अधिक सदस्य नहीं होने चाहिए – 238 सदस्य राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि इनमें बाकी केंद्र शासित प्रदेश और राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्य नामित होते हैं। राज्यसभा एक स्थायी निकाय है और विघटन के अधीन नहीं है। हालांकि, एक तिहाई सदस्य हर दूसरे वर्ष इससे सेवानिवृत्त होते हैं, और उन्हें बदल दिया जाता है। नवनिर्वाचित सदस्यों द्वारा। प्रत्येक सदस्य 6 साल की अवधि के लिए चुना जाता है। भारत के उपराष्ट्रपति राज्य सभा के पदेन सभापति हैं। सदन अपने बीच से एक उपसभापति का चुनाव भी करता है। इसके अलावा, राज्यसभा में “उपाध्यक्षों” का एक पैनल भी होता है। सबसे वरिष्ठ मंत्री, जो राज्यसभा के सदस्य हैं, उन्हें प्रधानमंत्री द्वारा सदन के नेता के रूप में नियुक्त किया जाता है।

उच्च सदन के पूर्व अध्यक्षों के नाम

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (13.5.1952 से 12.5.1957 और 13.5.1957 से 12.5.1962)
डॉ. जाकिर हुसैन (13.5.1962 से 12.5.1967)
वी.वी. गिरि (13.5.1967 से 3.5.1969)
गोपाल स्वरूप पाठक (31.8.1969 से 30.8.1974)
बसप्पा दानप्पा जत्ती (31.8.1974 से 30.8.1979)
एम हिदायतुल्लाह (31.8.1979 से 30.8.1984)
आर वेंकटरमण (31.8.1984 से 24.7.1987)
डॉ. शंकर दयाल शर्मा (3.9.1987 से 24.7.1992)
के आर नारायणन (21.8.1992 से 24.7.1997)
कृष्णकांत (21.8.1997 से 27.7.2002)
भैरों सिंह शेखावत (19.8.2002 से 21.7.2007)
मोहम्मद हामिद अंसारी (11.8.2007 से 10.8.2017
एम. वेंकैया नायडू (11.8.2017 से 10.8.2022)

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