PM मोदी ने कहा- भारत की G20 अध्यक्षता में दुनिया को देश की ताकत दिखाने का एक अनूठा अवसर



PM मोदी ने भारत की G20 अध्यक्षता से संबंधित पहलुओं पर चर्चा करने के लिए कल एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में देशभर के राजनीतिक नेताओं की भागीदारी देखी गई। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत की G20 अध्यक्षता पूरे देश की है, और यह पूरी दुनिया को भारत की ताकत दिखाने का एक अनूठा अवसर है।

देश के प्रत्येक हिस्से की मिलेगी विशिष्ट पहचान

केवल इतना ही नहीं पीएम मोदी ने आगे यह भी कहा कि आज भारत के प्रति वैश्विक जिज्ञासा और आकर्षण है, जो भारत की जी20 अध्यक्षता की क्षमता को और अधिक बढ़ाता है। उन्होंने टीम वर्क के महत्व पर जोर दिया और जी20 के विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन में सभी नेताओं से सहयोग मांगा। पीएम मोदी ने कहा कि जी20 प्रेसीडेंसी देश के प्रत्येक हिस्से की विशिष्टता को सामने लाते हुए पारंपरिक बड़े महानगरों से परे भारत के कुछ हिस्सों को प्रदर्शित करने में मदद करेगी।

पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

पीएम मोदी ने पर्यटन को बढ़ावा देने और उन स्थानों की स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की क्षमता पर ध्यान दिया जहां जी20 बैठकें आयोजित की जाएंगी। विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने भारत की G20 अध्यक्षता पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा की, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा, जेपी नड्डा, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, नवीन पटनायक, अरविंद केजरीवाल, वाईएस जगन मोहन रेड्डी, सीताराम येचुरी और चंद्रबाबू नायडू। गृह मंत्री और वित्त मंत्री द्वारा संक्षिप्त हस्तक्षेप किया गया। भारत की जी20 प्राथमिकताओं के पहलुओं की एक विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई।

बनेगा सामाजिक बहुलता का उत्सव

• पीएम मोदी ने अगले साल G20 शिखर सम्मेलन के लिए सुझाव मांगने के लिए सोमवार को राष्ट्रपति भवन में एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की

• पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उनके ओडिशा समकक्ष नवीन पटनायक, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तमिलनाडु के एम. के. स्टालिन, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बैठक में शामिल हुए

• सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे

• इस दौरान सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने सुझाव दिया कि G20 प्रेसीडेंसी के भारत के घोषित उद्देश्यों की सफलता- 'एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य' का कार्यान्वयन सरकार पर निर्भर करता है, उन्होंने कहा कि “वसुधैव कुटुम्बकम” की अवधारणा का अर्थ एकरूपता थोपना नहीं है, बल्कि एक ऐसे वैश्विक परिवार को मान्यता देना है जहां सामाजिक बहुलता को स्वीकार किया जाता हो।

• भारत ने आधिकारिक रूप से 1 दिसंबर को G20 की अध्यक्षता ग्रहण की थी। देश में इस महीने की शुरुआत में देशभर में 200 से अधिक तैयारी बैठकों की मेजबानी करने की उम्मीद है। राज्यों या सरकारों के प्रमुखों के स्तर पर अगला G20 नेताओं का शिखर सम्मेलन अगले साल 9 और 10 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाला है।

• बता दें इस बीच, राजस्थान के उदयपुर में हुई G20 शेरपाओं की पहली बैठक में, भारत ने सोमवार को सतत विकास के साथ जलवायु कार्रवाई को जोड़ने का प्रस्ताव दिया, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विश्व के सामने आने वाले मुद्दों को दुनिया पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक स्पष्ट प्रयास किया गया। भारत के शेरपा अमिताभ कांत ने यूक्रेन संघर्ष का कोई सीधा संदर्भ दिए बिना वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए आशा, सद्भाव और उपचार के माध्यम से एक साथ काम करने की जोरदार वकालत की।

• शेरपाओं की पहली बैठक के पश्चात सोमवार शाम, पिछोला झील में एक द्वीप पर बने जग मंदिर पैलेस में 'चाय पे चर्चा' के लिए एकत्रित हुए प्रतिनिधियों ने डूबते सूरज की पृष्ठभूमि में पारंपरिक राजस्थानी नृत्य देखा।

उल्लेखनीय है कि उदयपुर में जारी जी 20 के शेरपाओं की बैठक के आज तीसरे दिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। वहीं बैठक में कल दूसरे दिन डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और शिक्षा पर कार्य समूह के साथ तकनीकी परिवर्तन पर चर्चा हुई। भारत के जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा इस साल जी 20 की बैठक नवाचार को मजबूत प्रोत्साहन प्रदान करेगी। ऐसे में देशवासियों को समझना होगा कि भारत की अध्यक्षता में हो रही G20 की बैठक का क्या महत्व है। पीएम मोदी ने भी कल देशवासियों को यही बताने की कोशिश की है कि भारत की G20 अध्यक्षता में दुनिया को देश की ताकत दिखाने का एक अनूठा अवसर मिलेगा। ऐसे में यह वैश्विक स्तर पर देश की साख को और अधिक मजबूत करेगा।

यहां गंगा नदी में बोट पर लोग पढ़ रहे किताबें

जीवनदायिनी गंगा लोगों के आस्था और देश के प्रमुख जगहों पर घूमने और पर्यटन का केंद्र है। हममे से कई लोगों ने नाव पर बैठ कर गंगा की सैर खूब की होगी। लेकिन केंद्र सरकार ने एक अनोखी पहल की है, जहां अब गंगा में सैर करने के साथ-साथ आप अपनी पंसद की किताबों का भी आनंद उठा सकते हैं। इस पहल से लोगों की पढ़ने की खत्म हो रही प्रवृत्ति को भी जगाये जाने के लिए पहल किया गया है। साथ ही गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण के को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया है।


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