डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से यूं सशक्त हो रहा है भारत

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम भारत को समृध्द बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस प्रोग्राम का लक्ष्य देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है। डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट की शुरुआत 1 जुलाई, 2015 को की गई थी, जिसका उद्देश्य देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम को सुधारना था।

महामारी के दौरान प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से पिछले आठ वर्षों में डिजिटल इंडिया ने देश में जो सामर्थ्य पैदा किया, उसने कोरोना वैश्विक महामारी से मुकाबला करने में भारत की बहुत मदद की है। हमने एक क्लिक पर देश की लाखों महिलाओं, किसानों, मजदूरों के बैंक खातों में हजारों करोड़ रुपये भेजे। एक देश एक राशन कार्ड की मदद से हमने 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को मुफ्त राशन सुनिश्चित किया । हमारे देश ने दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे कुशल कोविड टीकाकरण और कोविड राहत कार्यक्रम चलाया। हमारे कोविन प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 200 करोड़ वैक्सीन खुराकें दी गई हैं और प्रमाण पत्र दिए गए।हाल ही में केंद्र सरकार ने 5जी सेवाओं का शुभारंभ किया है। 5जी ने देश के द्वार पर नए दौर की दस्तक दी है। भारत सिर्फ अब टेक्नोलॉजी का सिर्फ कंज्यूमर बनकर नहीं रहा है, बल्कि भारत टेक्नोलॉजी के विकास में और उसके इंप्लीमेंटेशन में एक्टिव भूमिका भी निभाएगा।

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताया था कि "हमने 4 पिलर्स पर, चार दिशाओं में एक साथ फोकस किया। पहला - डिवाइस की कीमत, दूसरा - डिजिटल कनेक्टिविटी, तीसरा - डेटा की कीमत, चौथा, और सबसे जरूरी - ‘डिजिटल फर्स्ट’ की सोच।”

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के जरिए स्किलिंग, अपस्किल और रीस्किलिंग पर फोकस करना 

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के जरिए आने वाले 4-5 वर्षों में इंडस्ट्री 4.0 के लिए 14-15 लाख युवाओं के स्किलिंग, अपस्किल और रीस्किलिंग पर फोकस करने जा रही है। 'अंतरिक्ष हो, मैपिंग, ड्रोन, गेमिंग और एनिमेशन हो, ऐसे कई सेक्टर हैं जो डिजिटल तकनीक के भविष्य को विस्तार देने जा रहे हैं, उन्हें नवाचार के लिए खोल दिया गया है। इंन-स्पेस और नई ड्रोन नीति जैसे प्रावधान इस दशक में आने वाले वर्षों में भारत की तकनीक क्षमता को नई ऊर्जा देंगे।'

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को 300 अरब डॉलर से ऊपर ले जाने के लक्ष्य

भारत अगले तीन से चार वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को 300 अरब डॉलर से ऊपर ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। भारत अब चिप लेने वाले से चिप देने वाला बनना चाहता है। सेमीकंडक्टर का उत्पादन बढ़ाने के लिए भारत में निवेश तेजी से बढ़ रहा है।' प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि डिजिटल इंडिया अभियान अपने आप में नए आयाम जोड़ता रहेगा और देश के नागरिकों की सेवा करता रहेगा।

ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था का लक्ष्य निर्धारित

केंद्र सरकार ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में स्टार्टअप एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनि​श्चित करने के लिए लगातार नए अवसर पैदा कर रही है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने सरकारी कार्यों और सार्वजनिक सेवाओं का डिजिटलीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। डिजिटल तकनीकों का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा रहा है, पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान सहित कई ऐसी परियोजनाएं हैं, जिनके तहत विभिन्न मंत्रालयों द्वारा जीआईएस तकनीक का उपयोग करते हुए परिसंपत्तियों की मैपिंग की जा रही है। साथ ही साथ अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

लाखों नौकरियां सृजित 

डिजिटल अर्थव्यवस्था ने 88-90 लाख नौकरियां सृजित की हैं। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो साल में इन क्षेत्रों में रोजगार का आंकड़ा एक करोड़ के पार पहुंच जाना चाहिए।

UPI की महत्वपूर्ण भूमिका 

एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) के जरिए देश के हर हिस्से से लोग डिजिटल भुगतान कर रहे हैं। भुगतान और लेनदेन के मामले में UPI समृद्ध व्यवसायियों से लेकर मामूली रेहड़ी-पटरी वालों तक सभी की मदद कर रहा है। वित्त वर्ष 2022 में UPI पर लेनदेन एक ट्रिलियन डॉलर को पार कर गया है और आज हम डिजिटल लेन-देन में विश्व में प्रथम स्थान पर हैं। वर्ष 2021 में कुल वैश्विक डिजिटल भुगतान का 40% भारत में हुआ और भीम-UPI अब केवल भारतीय एप नहीं रह गया है, बल्कि ग्लोबल बन चुका है और अनेक देश जैसे फ्रांस, सिंगापुर, UAE, भूटान और नेपाल इसका उपयोग कर रहे हैं।

व्यवसायों का संचालन आसान

इलेक्ट्रॉनिक ग्राहक पहचान प्रणाली (e-KYC), इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ भंडारण प्रणाली (DigiLocker) और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रणाली (eSign) से व्यवसाय और उनका संचालन पूर्ण रूप से व्यवस्थित हो पाया है। वहीं सिस्टम में खामियों को दूर करने के लिए JAM (जन धन, आधार और मोबाइल) ट्रिनिटी को एक सरल कदम के रूप में शुरू किया गया था।

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के लिए पहल 

'डिजिटल इंडिया भाषिणी'-जो नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में डिजिटल पहल से जोड़कर सशक्त बनाएगी। भाषिणी का लक्ष्य है कि सभी भारतीयों को इंटरनेट और डिजिटल सेवाएं उनकी भाषा में आसानी से उपलब्ध हो सकें और भारतीय भाषाओं में सामग्री की वृद्धि हो।

'डिजिटल इंडिया जेनेसिस' (इनोवेटिव स्टार्टअप्स के लिए जेन-नेक्स्ट सपोर्ट) - भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में खोजने, सहयोग, विकास करने और सफल स्टार्टअप बनाने के लिए एक राष्ट्रीय डीप-टेक स्टार्टअप कार्यक्रम है।

'इंडियास्टैक डॉट ग्लोबल' - आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर, कोविन टीकाकरण प्लेटफॉर्म, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम), दीक्षा प्लेटफॉर्म और आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन जैसी इंडिया स्टैक के तहत चल रही प्रमुख परियोजनाओं का वैश्विक भंडार है। वैश्विक सार्वजनिक डिजिटल भंडार की भारत की पेशकश जनसंख्या के पैमाने पर डिजिटल परिवर्तन परियोजनाओं के निर्माण में देश को अग्रणी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा और यह अन्य देशों के लिए बहुत मददगार साबित होगा, जो ऐसी तकनीकी समाधानों की तलाश में हैं।

'माईस्कीम' - सरकारी योजनाओं तक पहुंच की सुविधा प्रदान करने के लिए यह एक सेवा खोजने वाला प्लेटफॉर्म है। यह वन-स्टॉप सर्च और डिस्कवरी पोर्टल के तौर पर खुद को पेश करता है जहां यूजर्स उन योजनाओं को ढूंढ सकते हैं जिसके लिए वे पात्र हैं।

'मेरी पहचान'- नेशनल सिंगल साइन-ऑन (एनएसएसओ) एक उपयोगकर्ता प्रमाणीकरण सेवा है, जिसमें निजी जानकारी का एक सेट, कई ऑनलाइन एप्लिकेशन या सेवाओं तक पहुंच प्रदान करता है।

आज डिजिटल इंडिया प्रोग्राम मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है जिसमें विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है , क्योंकि आज भी भारत के कई ग्रामीण क्षेत्र हैं जहां बिजली और नैटवर्क नहीं पहुंचा है। डिजिटल इंडिया प्रोग्राम को आगे ले जाने की दिशा में डिजिटल सेवा का वितरण और डिजिटल साक्षरता महत्वपूर्ण हैं। डिजिटल साक्षरता यानी डैस्कटॉप, पीसी, लैपटॉप, स्मार्टफोन और टैबलेट जैसे इलैक्ट्रॉनिक्स उपकरणों का ज्ञान होना।

आज हमारे छोटे व्यापारी हों, छोटे उद्यमी हों, लोकल कलाकार या कारीगर हों, डिजिटल इंडिया ने सबको मंच दिया है और सबको बाजार दिया है

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