वन विभाग में अधिकारियों को बचाकर छोटे कर्मचारियों की चढ़ाई जा रही है बलि


भोपाल। वन विभाग में कोई भी घटना हो तो वन विभाग के अधिकारियों को दंडित नहीं किया जाता है भले उनकी जिम्मेदारी रही हो लगातार हर घटना में वन विभाग के बड़े अधिकारियों को बचाकर वन विभाग के छोटे कार्यपालिक वन कर्मचारियों को दंडित करके बलि का बकरा बना दिया जाता है और जब सम्मान या प्रशंसा पत्र लेने का अवसर आता है तो वन विभाग के अधिकारी आगे आ जाते हैंअभी हाल ही में पन्ना और बुरहानपुर  में हुई घटना पर भी बड़े अधिकारियों को बचाकर सरकार ने छोटे वन कर्मचारियों की बलि चढ़ा दी है वन कर्मचारी मंच ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि बुरहानपुर अतिक्रमण कांड और पन्ना का बाघ फांसी कांड की उच्च स्तरीय जांच हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज से कराई जाए ताकि दोनों कांड के सही तथ्य सरकार के सामने आ सके छोटे वन कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाना सरकार बंद करें दोषी वन अधिकारियों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
वन कर्मचारी मंच के प्रांत अध्यक्ष अशोक पांडे ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि बुरहानपुर वन चौकी में रखी 17 नग शासकीय बंदूकें एवं कारतूस लूटने के प्रकरण में उपवन क्षेत्रपाल और वनरक्षक को निलंबित किया गया है जबकि कार्यपालिक वन कर्मचारी शासकीय बंदूकें 16 अगस्त 2022 को ही जमा कर चुका था वही पन्ना के तिलगवाबीट में फांसी में लटकने से हुई बाघ की मौत के मामले में उपवन क्षेत्रपाल अजीत खरे एवं वनरक्षक अरुण त्रिवेदी को निलंबित किया गया है जबकि पन्ना वन मंडल अधिकारी बेनी प्रसाद ने स्वयं स्वीकार किया कि किसानों ने अपनी फसल को छोटे जानवरों से बचाने के लिए उन्हें फंदे में फंसाने के लिए खेत के बाढ़ में फंदा लगाया था फिर इसमें वन क्षेत्रपाल और वनरक्षक कैसे दोषी हो जाते हैं दोनों ही प्रकरण में वन विभाग के बड़े अधिकारियों को बचाकर छोटे वन कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया गया है छोटा बंद कर्मचारी अपनी जान की जोखिम में डालकर वनों की सुरक्षा कर रहा है वनों की सुरक्षा में वन माफिया के प्राणघातक हमले का शिकार हो रहा है लेकिन सरकार मात्र छोटे वन कर्मचारियों को ही निशाना बना रही है इसी तरह लटेरी कांड में भी छोटे वन कर्मचारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया गया था
                          

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