जानें, कैसे भारत ने मातृ मृत्यु दर अनुपात में किया बड़ा सुधार



नई दिल्ली । भारत में मातृ मृत्यु दर (MMR) में महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई है। साल 2014-16 में प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु दर प्रति लाख पर 130 थी जो घटकर साल 2018-20 में 97 दर्ज की गई है। इसी के साथ देश में जहां मातृ मृत्यु दर (MMR) में 26 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है तो वहीं, 8 राज्यों में MMR 70 प्रति लाख से भी कम दर्ज हुआ है। बता दें अब पूरे देश में इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए केंद्र सरकार लगातार निरंतर प्रयास कर रही है।

क्या है मातृ मृत्यु दर (MMR) ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, “मातृ मृत्यु दर महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान या गर्भावस्था की समाप्ति के 42 दिनों के भीतर मृत्यु का रेट है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) के कार्यालय द्वारा जारी एक विशेष बुलेटिन के मुताबिक, मातृ मृत्यु दर (MMR) 2014-16 में 130 प्रति लाख से घटकर 2018-20 में 97 प्रति लाख जीवित जन्म हो गई है। ये बुलेटिन 2018-2020 की अवधि के लिए मातृ मृत्यु दर का स्तर में सुधार के बयां करता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के तहत रखा गया ये लक्ष्य

वहीं देश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बदल रहे हालातों के बीच अनुमान लगाया जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (NHP) के तहत साल 2030 तक मातृ मृत्यु दर 70 प्रति लाख प्रसव से कम हो जाएगी। इसके लिए अभी से लक्ष्य तय कर लिया गया है। फिलहाल, जिन 8 राज्यों में MMR 70 प्रति लाख से भी कम दर्ज हुआ है उनकी चर्चा जारी है। इनमें केरल (19), महाराष्ट्र (33), तेलंगाना (43), आंध्र प्रदेश (45), तमिलनाडु (54), झारखंड (56), गुजरात (57) और कर्नाटक (69) शामिल हैं। पहले ऐसे राज्यों की संख्या 6 थी जो अब बढ़कर 8 हो गई है।

उच्चतम और निम्नतम

असम में उच्चतम MMR 195 है, इसके बाद मध्य प्रदेश में 173 प्रति लाख जीवित जन्म और उत्तर प्रदेश में 167 है। आंकड़ों से पता चलता है कि केरल में सबसे कम एमएमआर 19 है, इसके बाद महाराष्ट्र 33 और तेलंगाना 43 है।

PM मोदी ने ट्वीट कर व्यक्त की खुशी

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के ट्वीट का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, ”यह बहुत ही उत्साहजनक प्रवृत्ति है। इस बदलाव को देखकर खुशी हुई। महिला सशक्तिकरण से जुड़े सभी पहलुओं को आगे बढ़ाने पर हमारा जोर काफी मजबूत है।”

https://twitter.com/narendramodi/status/1597892646944780288?s=20&t=mfp8z9XQha4Mm8tJNk1ang

MMR में सुधार मोदी सरकार के प्रयासों का नतीजा

वहीं इस उपलब्धि पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने देश के MMR में सुधार का श्रेय केंद्र सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य देखभाल पहलों को दिया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस संबंध में ट्वीट कर कहा है कि देश ने एक नया मील का पत्थर हासिल किया गया है और मातृ मृत्यु दर (MMR) में महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज हुई है। उन्होंने इस उपलब्धि पर देशवासियों को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। पूरे देश के साथ साथ, गुजरात में भी मातृ मृत्यु दर में भारी गिरावट आई है। साल 2011-13 में जहां MMR 112 थी जो अब घटकर 57 दर्ज किया गया है।

इसके क्या है मायने ?

उल्लेखनीय है कि किसी क्षेत्र में मातृ मृत्यु दर उस क्षेत्र में महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य का एक पैमाना होता है। प्रजनन के समय कई महिलाएं गर्भावस्था, प्रसव या गर्भपात के दौरान जटिलताओं के कारण मर जाती हैं। ऐसे में इस गंभीर समस्या का दूर होना बेहद जरूरी है जो केवल समय पर और बेहतर इलाज के माध्यम से ही संभव है।

ज्ञात हो, संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों में भी लक्ष्य 3.1 का उद्देश्य वैश्विक मातृ मृत्यु दर को प्रति लाख जीवित जन्मों पर 70 से कम करना है। गृह मंत्रालय के तहत भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) ने देश में जनसंख्या की जनगणना करने और जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी के अलावा, नमूना पंजीकरण प्रणाली का उपयोग कर प्रजनन और मृत्यु दर पर अनुमान दिया है। उल्लेखनीय है कि मातृ मृत्यु दर (MMR) में महत्वपूर्ण गिरावट आई, साल 2014-16 में प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु दर 130 था जो घटकर साल 2018-20 में 97 दर्ज किया गया है।

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