एक भ्रष्ट मुख्यमंत्री का भ्रष्टाचार के खिलाफ बयान भी एक भ्रष्टाचार है : कांग्रेस

भोपाल । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी तमाम नैतिक मर्यादाओं को लांघते हुये विपक्ष पर ऊल-जलूल आरोप लगाकर सुर्खियां बटोरना चाहते हैं। मुख्यमंत्री कहते हैं कि कांग्रेस शासनकाल में वल्लभ भवन दलालों का अड्डा बन गया था।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जो मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके है, उनके मुँह से भ्रष्टाचार के खिलाफ बोले गये शब्द उनके बनावटी चरित्र को दर्शाते हैं।
पूरा देश जानता है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ओएसडी किस तरह से उनके लिये दलाली में संलिप्त हैं। वर्ष 2013 में कई जगह आयकर ने छापे मारे थे, जिसमें कम्प्यूटर की जांच में यह जानकारी मिली थी कि 12 और 29 नवंबर 2013 को मुख्यमंत्री शिवराज के ओएसडी ने गुजरात के मुख्यमंत्री को 5-5 करोड़ रुपए दिए। ऐसी अन्य कई एंट्री भी आयकर विभाग को 2 नवंबर 2020 को मिली थीं।
मध्यप्रदेश के जनसंपर्क विभाग और माध्यम से संबंधित कुछ व्यावसायियों पर मारे गये छापों में भी जो दस्तावेज ज़ब्त हुये थे उनके अनुसार भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का परिवार बड़े पैमाने पर रूपयों के लेनदेन और दलाली में संलिप्त पाया गया। छापों की अप्रेजल रिपोर्ट में मुख्यमंत्री निवास के नाम पर 3 करोड़ की एंट्री दर्ज है। यह सब महज़ आरोप नहीं, बल्कि सरकारी जाँच एजेंसी के पास मौजूद मुख्यमंत्री शिवराज के खिलाफ भ्रष्टाचार के दस्तावेज़ी प्रमाण हैं। 
पूरा प्रदेश जानता है कि मुख्यमंत्री के सगे संबंधी और परिवार के लोग किस तरह से ट्रांसफ़र उद्योग चला रहे हैं। मुख्यमंत्री के रिश्तेदार अवैध रेत खनन में संलिप्त हैं। मुख्यमंत्री शिवराज पर लगे डंपर, सिंहस्थ, व्यापमं हनीट्रेप, ई-टेंडरिंग, रेत के अवैध उत्खनन और वृक्षारोपण जैसे घोटालों के अमिट दाग किसी से छिपे नहीं हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज जब किसी और पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं तो उन्हें सबसे पहले अपने गिरेबान में झांकने की ज़रूरत है। जिस मुख्यमंत्री का पूरा कार्यकाल भ्रष्टाचार और घोटालों के लिये विख्यात हो, उसके भ्रष्टाचार के खिलाफ बोले शब्द सिर्फ़ राजनीतिक पैंतरेबाज़ी के अलावा कुछ और नहीं है।


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