देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती : देश कर रहा महान विभूति को याद


देशरत्न की उपाधि से सम्मानित भारत के सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति रहे डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 138वीं जयंती देशभर में मनाई जा रही है। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को उनकी जन्म जयंती पर पूरा देश याद कर रहा है। वे एक महान विद्वान, दूरदर्शी, लेखक और वकील होने के साथ-साथ सादगी और ईमानदारी के मिसाल थे। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की। वर्ष 1884 में बिहार में जन्मे डॉ. राजेंद्र प्रसाद एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी थे। वे एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्होंने दो पूर्ण कार्यकाल की सेवा की।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर दी श्रद्धांजलि

पीएम मोदी ने भी ट्विटर पर भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी को उनकी जयंती पर याद कर रहा हूं। एक महान नेता, वह साहस और विद्वतापूर्ण उत्साह के प्रतीक थे। वह दृढ़ता से भारत की संस्कृति में निहित थे और भारत के विकास के लिए एक भविष्यवादी दृष्टि भी रखते थे।

https://twitter.com/PBNS_India/status/1598885377422413825

बचपन से ही पढ़ाई में रहे अव्वल

बिहार के सीवान जिला के जीरादेई गांव में जन्मे डॉ राजेंद्र प्रसाद बचपन से ही होनहार रहे। बिहार के छपरा जिला स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद उन्होंने सिर्फ 18 साल की उम्र में उन्होंने कोलकाता यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा प्रथम स्थान से पास की और फिर कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लेकर लॉ के क्षेत्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। वे हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बंगाली एवं फारसी भाषा से पूरी तरह परिचित थे। पढ़ाई लिखाई में उम्दा होने की वजह से उनकी आंसर शीट को देखकर एक बार तो एग्जामिनर ने 'The Examinee is better than Examiner' तक कह दिया था। सम्पूर्ण भारत में डॉ. राजेंद्र प्रसाद काफी लोकप्रिय थे इसका प्रमाण उन्हें राजेंद्र बाबू एवं देश रत्न कहकर बुलाए जाने से मिलता है।

संविधान निर्माण में रहा अहम योगदान

देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भारत की संवैधानिक परंपराओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संविधान निर्मात्री सभा के अध्यक्ष के रूप में संविधान के निर्माण प्रक्रिया की सम्पूर्ण देखभाल की, जिसके आधार पर भारत एक प्रभुत्व संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य बना। राष्ट्रपति पद पर दो बार आसीन डॉ. राजेंद्र प्रसाद को उनके अहम योगदान के लिए भारत रत्न से नवाजा गया।

अंतरिम सरकार में बने थे खाद्य मंत्री

कानून की पढ़ाई करने के बाद देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के दौरान बिहार प्रदेश के एक बड़े नेता के रूप में उभरे। महात्मा गांधी से प्रभावित राजेंद्र प्रसाद 1931 के 'नमक सत्याग्रह' और 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भी शामिल हुए थे। इसके बाद आजादी से पहले 2 दिसंबर 1946 को गठित अंतरिम सरकार में राजेंद्र प्रसाद खाद्य और कृषि मंत्री बनाए गए। उसके बाद जब देश स्वाधीन हुआ तो राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने। राजेंद्र प्रसाद देश के इकलौते राष्ट्रपति हैं जो लगातार दो बार राष्ट्रपति चुने गए।

देश के लिए दिए असंख्य योगदान

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, उन्होंने राष्ट्रवादी हित में पत्रकारिता की और देश और सर्चलाइट जैसे प्रकाशनों के लिए लेख लिखे। उन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करने का अभियान भी चलाया। 1917 में, स्थानीय किसानों की शिकायतों को दूर करने के लिए डॉ. प्रसाद महात्मा गांधी के साथ बिहार के चंपारण जिले में गए। बाद में, उन्होंने 1930 के नमक सत्याग्रह और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। 1946 में, कांग्रेस द्वारा गठित अंतरिम सरकार में डॉ प्रसाद ने खाद्य और कृषि मंत्री के रूप में शपथ ली। 1962 में, उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उन्होंने अपनी आत्मकथा, 'आत्मकथा' लिखी और इंडिया डिवाइडेड (1946), महात्मा गांधी और बिहार, सम रेमिनिसेंस (1949) और अन्य पुस्तकें लिखीं।

आकाशवाणी करेगा स्मृति व्याख्यान प्रसारण

राष्ट्रीय सार्वजनिक रेडियो प्रसारक आकाशवाणी शनिवार को डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान के वार्षिक संस्करण का प्रसारण करेगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला इसे संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम शनिवार को रात 9.30 बजे से ऑल इंडिया रेडियो के पूरे नेटवर्क पर प्रसारित होगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान का प्रसारण शनिवार के दिन ही दूरदर्शन पर भी रात 10.30 बजे करेगा। इस वर्ष की थीम अमृत काल में भारतीयता है जो भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर रखा गया है।

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