राधारमण आयुर्वेद हॉस्पिटल में सुश्रुत विधि से हुई मरीज की सर्जरी

भोपाल । रातीबड़ स्थित राधारमण आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज रिसर्च हॉस्पिटल द्वारा रोगियों के सफल उपचार की श्रृंखला में दो और सफलताएं दर्ज हो गयीं हैं. संस्थान के चिकित्सकों के दल - डॉ. सुषमा अहिरवार, डॉ. अंकित नेमा, डॉ. गोविन्द मोयल, डॉ. श्रुति वर्मा, डॉ. रेखा सोलंकी तथा डॉ. सूर्यभान गुर्जर - ने सर्जरी के जरिये दो मरीजों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया है.
इस सम्बन्ध में डॉ. अंकित नेमा ने बताया की पहली सर्जरी 55 वर्षीय सरिता बाई (परिवर्तित नाम) की गई. भारी ज्वेलरी पहनने के कारण उनके कान कट गए थे जिन्हें लोबुलोप्लास्टी सर्जरी के जरिये जोड़ा गया. उन्होंने बताया कि आचार्य सुश्रुत ने कर्ण संधान के व्यापक शीर्षक के तहत सर्जरी की बुनियादी अवधारणाओं के माध्यम से कप-अप ईयर लोब्स को जोड़ने के 15 तरीकों का वर्णन किया है। प्लास्टिक सर्जरी के सिद्धांतों और तकनीकों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले आचार्य सुश्रुत के सिद्धांत आज के आधुनिक सर्जिकल युग में भी अपनाये जा रहे हैं।
दूसरी सर्जरी 42 वर्षीय मरीज पर की गई. यह मरीज लम्बे समय से अपनी पीठ पर हुए सिस्ट से पीड़ित था. इस सिस्ट में दर्द के साथ साथ रिसाव हो रहा था. इस सिस्ट को सेबेसियस के नाम से जाना जाता है. यदि इसका समय से इलाज न किया जाये यह बड़ा आकर ले सकता है. सर्जरी किये जाने के बाद यह आमतौर पर हमेशा के लिए ठीक हो जाता है.
उन्होंने बताया कि दोनों ही मरीज स्वस्थ हैं.
इस सफलता पर टिपण्णी करते हुए राधारमण समूह के चेयरमैन आर आर सक्सेना ने कहा कि राधारमण आयुर्वेद कॉलेज रिसर्च हॉस्पिटल मानवता की सेवा के साथ साथ विश्व की सबसे पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को भी बढ़ाने की दिशा में अग्रसर है.

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