डीप-टेक और ग्रासरूट इनोवेशन फेस्टिवल में नवोन्मेषी भारत की झलक


प्रगतिशील भारत देश में तरक्की के साथ-साथ छोटी बड़ी तमाम चुनौतियां भी आती है और उन चुनौतियों के निस्तारण के लिए तरह-तरह के नवाचार कार्य कर रहे हैं और सफल हो रहे हैं। चुनौतियों के रूप में उदाहरण के लिए पंखे के ब्लड पर जमा होने वाले धूल के कण जो उनकी कार्य क्षमता को प्रभावित करते हैं उनकी सफाई के लिए आज एक फिल्टर की खोज दी गई है। तालाबों और नदियों जैसे जल स्रोतों में जलकुंभी के प्रकोप के निस्तारण के लिए भी समाधान नवाचार के माध्यम से सामने आया है।

आज के समय में बीमारियों का बोझ जिस प्रकार बढ़ा है उससे कोई भी अनजान नहीं है। परंतु इस दौर में भी पर्याप्त डायग्नोस्टिक सेवाओं की पहुंच बहुत सीमित है। आज इसका भी समाधान एक मोबाइल डायग्नोस्टिक लैब के माध्यम से रखा गया है जो बाइक पर सवार होकर गांव गांव तक अपनी सेवाएं देगी। ऐसे 100 से अधिक अनूठे उत्पादों एवं सेवाओं वैज्ञानिक, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकीय नवाचारों पर केंद्रित ‘पीपुल्स फेस्टिवल ऑफ इनोवेशन’ नामक प्रदर्शनी नई दिल्ली में दस दिनों तक लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रही।

पीपुल्स फेस्टिवल ऑफ इनोवेशन

प्रदर्शनी में प्रदर्शित किए गए उत्पाद और सेवाओं को देखकर यह जाना जा सकता है कि देश के दूरदराज इससे आए आम लोग और प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिक, इंजीनियर किस प्रकार प्रौद्योगिकी समाधान और नए उत्पाद की खोज कर रहे हैं जो कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी आवश्यकता है। यह 10 दिवसीय प्रदर्शनी 19 नवंबर को शुरू हुई , 29 नवंबर को संपन्न हो गई है। सेंटर फॉर सेलुलर ऐंड मॉलिक्यूलर प्लेटफॉर्म्स (C-CAMP), बेंगलूरु और ग्रासरूट्स इनोवेशंस ऑग्मेंटेशन नेटवर्क (GIAN), अहमदाबाद के सहयोग से यह प्रदर्शनी इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी), नई दिल्ली द्वारा आयोजित की गई।

प्रभावी नवाचारों का उत्सव है उद्देश्य

आईआईसी द्वारा अपने हीरक जयंती वर्ष में इस प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य रोमांचक और प्रभावी इनोवेशन या नवाचारों का उत्सव मनाना और सबको एक मंच पर लाना था। इस उत्सव के दो प्रमुख विषय डीप टेक इनोवेशन और ग्रासरूट इनोवेशन, हेल्थकेयर, कोविड-19, गैर संचारी रोग, कृषि एवं पशु स्वास्थ्य, कृषि मशीनरी, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं पर्यावरण तथा स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी जरूरतों को संबोधित किया करते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी के इनोवेटर्स एवं जिंदगी से जुड़ी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रेरित करना है।

सरकार के 33 वर्षों के कार्यकाल में, 5000 से अधिक नवप्रवर्तकों की मदद

सक्षम प्रौद्योगिकी के एक स्पॉटलाइट के रूप में यह प्रदर्शनी आयोजित की गई है। फिलीपीन्स के ‘ग्रासरूट इनोवेशन्स फॉर इन्क्लूसिव डेवेलपमेंट’ का नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी अपने अनुभवों को साझा करने के लिए प्रदर्शनी में शामिल हुआ। डॉ रेणु स्वरूप, पूर्व सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने कहा है कि “सरकार में 33 वर्षों के कार्यकाल में, 5000 से अधिक नवप्रवर्तकों की मदद करने के बाद, यह पहली बार देखने को मिला है कि डीप-टेक और जमीनी स्तर के नवाचारियों के बीच यह समन्वय हुआ है। ग्रासरूट स्तर पर हों, या फिर डीप-टेक; वे सभी नवाचार हैं; और दोनों ही समाज को प्रभावित करते हैं। आमतौर पर, इन्हें अलग-अलग खाँचों में रखा जाता है, और इनका समागम नहीं हो पाता है। लेकिन, इनमें से कई ऐसे होते हैं, जो वास्तव में एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं।”

"आत्मनिर्भर भारत" मिशन का एक प्रमुख आयाम

डीप-टेक इस उत्सव को अधिक वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है, तो दूसरी ओर जमीनी स्तर के नवाचार "जनसाधारण" की भावना को स्वर देते हैं। आईआईसी के अध्यक्ष श्याम सरन ने कहा है कि “हमारे नवप्रवर्तकों का योगदान केंद्र सरकार के "आत्मनिर्भर भारत" मिशन का एक प्रमुख आयाम है। नवोन्मेषी आइडिया, पहल एवं विचारों के आदान-प्रदान के लिए प्रभावी मंच प्रदान करने के लिए आईआईसी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और आगे भी इस पर हमारी प्रतिबद्धता बनी रहेगी।”

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