अनूपपुर : आमाडांड कोयला खदान बंद होने से कामगारों के सामने रोजी-रोटी का संकट: सीटू अध्यक्ष

अनूपपुर । एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र की खुली खदान परियोजना आमाडांड के कोयला उत्पादन का कार्य पिछले 5 माह से इस कारण से बंद है। वहां कुछ पात्र तो कुछ अपात्र व्यक्तियों द्वारा नौकरी और मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रर्दशन कर कार्य में अवरोध उत्पन्न किया जा रहा है, जबकि परियोजना के लिए नीमहा कुहका एवं आमाडांड की कुल भूमि रकबा 1729 अधिकृत कर अधिग्रहित भूमि का मुआवजा राज्य शासन के समक्ष एसईसीएल द्वारा जमा किया जा चुका हैं। पात्रता के आधार पर पूर्व में 516 रोजगार मध्य प्रदेश पुनर्वास एवं कोल इंडिया पुनर्वास योजना के तहत प्रदान किया जा चुका है। उसके अतिरिक्त कुल 116 रोजगार और भी प्रदान किए जा चुका है। इस तरह से प्रभावित भू स्वामियों को कुल 26.15 करोड़ की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसके बाद भी कुछ अपात्र लोगों के द्वारा खदान के संचालन में व्यवधान उत्पन्न कर कार्य को प्रभावित किया जा रहा है और कोयला खदान बंद पड़ी है। खदान बंद होने से हजारों मजदूरों के रोजी रोटी पर संकट गहराने लगा है। वही मध्य प्रदेश के राजस्व को भी 29.87 लाख रुपए प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है। खदान को शीघ्र चालू कराने हेतु रविवार को जमुना कोतमा क्षेत्र के पांच श्रम संगठनों ने पत्रकारों से कहा।
सीटू यूनियन के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि कलेक्टर को पांचों श्रम संगठन के प्रतिनिधियों द्वारा खदान को चालू कराने हेतु ज्ञापन सौंपा गया था। जिस पर आज तक कोई ठोस पहल नहीं होने पर पांचो श्रम संगठनों के निर्णय लिया हैं कि खदान को शीघ्र चालू नहीं होती तो 26 दिसंबर को ग्राम बदरा के राष्ट्रीय राजमार्ग 43 पर अनिश्चितकालीन चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन करेंगे। सीटू यूनियन के अध्यक्ष ने कहा कि जिला प्रशासन के पास सारी जानकारी होने के बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नहीं तो इतना दिनों तक खदान का उत्पादन बंद नहीं होता है। खदान बंद होने से लगभग 300 कंपनी के कर्मचारियों को स्थानांतरण किए जाने की स्थिति निर्मित हो गई है, कोयला परिवहन एवं ठेकेदारी में लगे कामगारों के भी सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
जिला प्रशासन की लापरवाही

एचएमएस यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष श्रीकांत शुक्ला एवं इंटक यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष रमेश कुशवाहा ने कहा कि जमुना कोतमा क्षेत्र का भविष्य आमाडांड खुली खदान परियोजना पर टिका हुआ है। जहां हजारों मजदूरों का जीवन यापन चल रहा है और इस खदान का उत्पादन कार्य बंद होने से एक बड़ा संकट क्षेत्र पर मंडरा रहा है लेकिन अनूपपुर का जिला प्रशासन इस और कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उनकी लापरवाही के कारण आज ऐसी स्थिति बनी हुई है। जहां पर चंद अपात्र लोग पहुंचकर खदान को बंद करा दे रहे हैं, और जिला प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है। हमें अपने क्षेत्र के लोगों का भविष्य बचाने के लिए करो या मरो की स्थिति खड़ी हो गई है। हम सब मिलकर खदान चालू कराने हेतु चक्का जाम करेंगे और इसके आगे भी कोई कदम उठाना पड़ा तो उठाया जाएगा।
हम श्रमिकों के भविष्य के लिए लड़ते हैं

भारतीय मजदूर संघ जमुना कोतमा क्षेत्र के क्षेत्रीय महामंत्री संजय सिंह ने कहा कि हमारा संगठन हमेशा मजदूरों के भविष्य के लिए संघर्ष करता हैं। आज आमाडांड खुली खदान परियोजना के बंद होने से हमारे मजदूरों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। वही खदान बंद होने के कारण ठेका मजदूरों के पलायन की स्थिति निर्मित हो गई है। हम सभी आमाडांड खुली खदान परियोजना के पात्र हितग्राहियों के विरोधी नहीं हैं लेकिन यहां पर अपात्र लोगों की संख्या ज्यादा है। जिनका कोई अधिकार ना तो मुआवजा के लिए बनता है और ना ही नौकरी के लिए फिर भी अवरोध उत्पन्न कर खदान को बंद करा रहे है। ऐसे लोगों के विरुद्ध जिला प्रशासन यदि समय रहते कठोर कदम उठाता तो आज यह नौबत नहीं आती, लेकिन आज भी जिला प्रशासन सोया हुआ है और ऐसे लोगों के हौसले बुलंद हैं। चंद लोगों के कारण ही हजारों लोगों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। हम सब चक्का जाम करेंगे और जरूरत पड़ी तो रेल रोको आंदोलन भी करेंगे।
एटक यूनियन के क्षेत्रीय सचिव लालमन सिंह ने कहा कि आमाडांड खुली खदान परियोजना में जो भी अपात्र व्यक्ति सामने आकर खदान के संचालन में व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं। ऐसे कुछ चिन्हित लोग हैं। जिनके खिलाफ जिला प्रशासन को कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए। जिससे कि खदान का संचालन सुचारू रूप से संचालित हो सके। जमुना कोतमा क्षेत्र की जीवन रेखा जिसका वार्षिक उत्पादन क्षमता 40 लाख टन है। जिसकी रॉयल्टी मध्य प्रदेश सरकार को 29.87 लाख रुपए प्रतिदिन दी जा रही है और चंद लोगों के कारण मध्य प्रदेश सरकार सहित कोल इंडिया को भारी नुकसान पहुंच रहा है। जिला प्रशासन द्वारा सहयोग ना किए जाने को लेकर हम सभी चक्का जाम करेंगे और आगे भी यह लड़ाई जारी रहेगी।

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