भारतीय नदियों को जलाशयों और नहरों के माध्यम से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम


केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में गुरुवार को कहा कि नदी जोड़ो परियोजना के तहत 30 लिंक चिन्हित कर लिए गए हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को भी मंजूरी प्रदान कर दी है। लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी ने प्रायद्वीपीय नदियों के 16 लिंक और हिमालयी नदियों के 14 लिंक को चिन्हित किया है। उन्होंने बताया कि सभी लिंकों की पूर्व व्यवहार्यता रिपोर्ट पूरी कर ली गई है।

 

क्या है नदी जोड़ो परियोजना?

नदी जोड़ो परियोजना एक बड़े पैमाने पर प्रस्तावित सिविल इंजीनियरिंग परियोजना है, जिसका उद्देश्य भारतीय नदियों को जलाशयों और नहरों के माध्यम से आपस में जोड़ना है। जिससे भारत के कुछ हिस्सों में लगातार बाढ़ या पानी की कमी की समस्या को दूर किया जा सकता है। देश की कुछ नदियों में आवश्यकता से अधिक पानी रहता है तथा अधिकांश नदियाँ ऐसी हैं जो बरसात के मौसम के अलावा वर्षभर सूखी रहती हैं या उनमें पानी की मात्रा बेहद कम रहती है। ब्रह्मपुत्र जैसी जिन नदियों में पानी अधिक रहता है, उनसे लगातार बाढ़ आने का खतरा बना रहता है।

राष्ट्रीय नदी-जोड़ो परियोजना (NRLP) ‘जल अधिशेष’ वाली नदी घाटी (जहाँ बाढ़ की स्थिति रहती है) से जल की ‘कमी’ वाली नदी घाटी (जहाँ जल के अभाव या सूखे की स्थिति रहती है) में अंतर-घाटी जल अंतरण परियोजनाओं के माध्यम से जल के हस्तांतरण की परिकल्पना करती है। इसे औपचारिक रूप से राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (NPP) के रूप में जाना जाता है।


राष्ट्रीय नदी-जोड़ो परियोजना में लगभग 3000 भंडारण बाँधों के नेटवर्क के माध्यम से देश भर में 37 नदियों को जोड़ने के लिये 30 लिंक शामिल होंगे। इसका लक्ष्य भविष्य में देश की पानी की जरूरतों को पूरा करना है। यह बेहद महत्त्वाकांक्षी परियोजना है, जिसके तहत 15 हजार किमी. लंबी नई नहरें बनाई जाएगी, जिनमें 174 घन किमी. पानी का भंडारण किया जा सकेगा। NPP के अंतर्गत 30 नदी-जोड़ो परियोजनाओं (जिनमें 14 नदियाँ हिमालयी और शेष 16 प्रायद्वीपीय हैं) की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (NWDA) को सौंपी गई है।

इसके दो प्रमुख घटक हैं:

हिमालयी नदियों का विकास
इसका उद्देश्य गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के साथ नेपाल में उनकी सहायक नदियों पर भंडारण जलाशयों (Water Reservoirs) का निर्माण करना है।
इसका उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन के लिये मानसून प्रवाह का संरक्षण करना है।
यह लिंकेज कोसी, गंडक और घाघरा के अधिशेष प्रवाह को पश्चिम में स्थानांतरित करेगा।
गंगा और यमुना के बीच एक लिंक का भी प्रस्ताव किया गया है ताकि हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में अधिशेष जल को स्थानांतरित किया जा सके।
दक्षिणी जल ग्रिड (Southern Water Grid): इसमें 16 लिंक शामिल हैं जिनके माध्यम से दक्षिण भारत की नदियों को जोड़ने का प्रस्ताव है। यह कृष्णा, पेन्नार, कावेरी और वैगई नदियों को अतिरिक्त जल की आपूर्ति के लिये महानदी और गोदावरी को जोड़ने की परिकल्पना करता है। इस लिंकेज के लिये कई बड़े बाँधों और प्रमुख नहरों का निर्माण करना होगा।
इसके अलावा केन नदी को भी बेतवा, पारबती, कालीसिंध और चंबल नदियों से जोड़ा जाएगा। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त सोसाइटी के तौर पर NWDA की स्थापना की गई, जिसका काम 1980 के NPP में नदी-जोड़ो के प्रस्तावों की समीक्षा करना है।


हिमालयी क्षेत्र की संयोजक नहरों के नाम

सोन बांध-गंगा की दक्षिणी सहायक नदियां
सुवर्णरेखा-महानदी
शारदा-यमुना
राजस्थान-साबरमती
यमुना-राजस्थान
ब्रह्मपुत्र-गंगा(जोगीगोपा-तीस्ता-फरक्का)
ब्रह्मपुत्र-गंगा (मानस-संकोश-तीस्ता-गंगा)
फरक्का-सुंदरवन
फरक्का-दामोदर-सुवर्णरेखा
चुनार-सोन बैराज
घाघरा-यमुना
गंडक-गंगा
कोसी-मेकी
कोसी-घाघरा
प्रायद्वीपीय क्षेत्र की संयोजक नहरों के नाम

कावेरी (कट्टई)- वईगई-गुंडुर
कृष्णा (अलमाटी)-पेन्नार
कृष्णा (नागार्जुन सागर)-पेन्नार (स्वर्णशिला)
कृष्णा (श्रीसैलम)-पेन्नार (प्रोडात्तुर)
केन-बेतवा लिंक
गोदावरी (इंचमपाली लो डैम)-कृष्णा (नागार्जुन टेल पाँड)
गोदावरी (इंचमपाली)-कृष्णा (नागार्जुन सागर)
गोदावरी (पोलावरम)-कृष्णा (विजयवाड़ा)
दमनगंगा-पिंजाल
नेत्रावती-हेमावती
पम्बा-अचनकोविल-वप्पार
पार-तापी- नर्मदा
पार्वती-काली सिंध-चंबल
पेन्नार (स्वर्णशिला)-कावेरी (ग्रांड आर्नीकट)
महानदी (मणिभद्रा)-गोदावरी (दौलाईस्वरम)
वेदती-वरदा

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