जसवंत दांगी वेलफेयर सोसाइटी द्वारा ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजित

हर वर्ग के लोगो ने किया उत्साह के साथ ब्लड डोनेशन
भोपाल । क्रिसमस की पूर्व संध्या में एक अनोखा वातावरण था, लोगों की जिंदगी बचाने के लिए सांता क्लाउस बनकर आगे आये भोपालवासी, मौका था जसवंत दांगी वेलफेयर सोसाइटी द्वारा शनिवार को 10 नंबर मार्किट में ब्लड डोनेशन कैंप का। यह तेरहवां साल था इस कैंप का जिसमे 1000 से भी ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया जिसमे शाम होने तक 209 यूनिट ब्लड एकत्रित किया गया जिसमे महिलाओ ने भी बढ़-चढ़ कर रक्त दान किया। रक्तदान करने वालों में व्यापारी, स्टूडेंट्स, श्रमिक वर्ग, किसान, महिलायें, पुलिस, नेता, आदि सभी शामिल थे जिनके कर्म तो अलग हैं किन्तु आज के दिन मकसद एक ही था, रक्तदान करके किसी जरूरतमंद की जिन्दगी बचाना।
आयोजक गोपाल ठाकुर और उनके साथियों ने सभी लोगों का धन्यवाद दिया जिन्होंने इस महादान में भाग लिया, इस मुहिम के पीछे मकसद रक्तदान की अहमियत को समझाना एवं लोगों में इसके प्रति जागरूकता लाना था जोकि सफल रहा। हमें उम्मीद है की भोपालवासी आगे भी इसी प्रकार हमारा साथ देते रहेंगे। कई प्रकार की भ्रांतियों को दूर करने के लिए ही जसवंत दांगी वेलफेयर सोसाइटी ने इस आयोजन की नींव रखी, ताकि लोग रक्तदान के महत्वता को समझ जरूरतमंदों की सहायता करें।
इस मौके पर कृषि मंत्री कमल पटेल, विधायक सिलवानी रामपाल सिंह राजपूत, पूर्व विधायक महेंद्र सिंह हड्डा, कांग्रेस प्रवक्ता जीतेन्द्र मिश्रा, अपर सचिव विधि और विधायी कार्य विभाग अनिल कुमार शर्मा, पूर्व मुख्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश कुमार गुप्ता, कांग्रेस वरिष्ठ नेता नरेश ज्ञानचंदानी, जिला अध्यक्ष कांग्रेस कैलाश मिश्रा, डीएसपी ट्रैफिक बीएल बौद्ध आदि मौजूद थे और इन्होने कोरोना काल में इस अच्छे कार्य की सरहाना की।
इस मौके पर मौजूद उपेन्द्र मोहन शर्मा, ब्लड बैंक इंचार्ज, हमीदिया अस्पताल, ने बताया की रक्तदान द्वारा मध्य प्रदेश में सन 2001 तक लगभग 60 हजार यूनिट रक्त एकत्रित होता था जोकि आज की तारिख में कई लाख यूनिट तक पहुँच गया है। हम सभी जानते हैं की हर प्रदेश में रक्त की कमी महसूस होती है, जब रक्त दान की बात होती है तो हम सुरक्षित रक्त की बात करते हैं जो एचआईवी एड्स, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, यौन रोग, मलेरिया से मुक्त हो. वैज्ञानिक रूप से यह माना जाता है स्वेछा से किया गया रक्तदान अधिक सुरक्षित होता है और उनमे यह 5 बीमारियाँ होने की सम्भावना कम होती है, इसलिए हम स्वेछिक रक्तदान को बढ़ावा देते हैं। आम आदमी में 4.50 से 5 लीटर ब्लड होता है, एक समय में इसका एक तिहायी लीटर ब्लड निकला जाता है जो बहुत जल्दी ही रिकवर हो जाता है क्यूंकि हमारे शरीर में लाल रक्त कणिकाएं हर 90 से 120 दिन में बदलती हैं, जिसमे प्रतिदिन 1/120 भाग ब्लड बनता एवं नष्ट होता है, इसलिए यह समझना चाहिए की कोई व्यक्ति रक्तदान करे या न करे उसका प्रतिदिन रक्त बनना व नष्ट होना ही है। रक्त दान करने से शरीर में कोई कमी नहीं होती, एवं 18 से 65 वर्ष तक का कोई भी व्यक्ति 3 महीने में दुबारा रक्त दान कर सकता है। वैज्ञानिक यह भी बताते है की रक्तदान करने के बाद बने नए रक्त में ऑक्सीजन कैरी करने की क्षमता ज्यादा होती है जिससे शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है, ऐसे काफी लोग हैं जिन्होंने 50-60 व 100 बार रक्त दान किया है, और जिन्हें कभी यह महसूस नहीं हुआ की रक्तदान करने से उनके शरीर में किसी प्रकार की कोई कमजोरी आई हों।

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