भूकंपीय-भेद्यता आंकलन की नयी पद्धति, इमारतों की सुरक्षा के लिए जरूरी


भारतीय और यूरेशियन प्लेटों में टकराव के कारण हिमालय को दुनिया के सबसे अधिक भूकंप-संभावित क्षेत्रों में शामिल किया जाता है। यहाँ ऐसे भूकंप आते रहे हैं, जो जीवन और संपत्ति दोनों के लिए विनाशकारी रहे हैं। हिमालयी भूकंप भेद्यता के कारण वहाँ इमारतों का मूल्यांकन एक बड़ी आवश्यकता है। “भूकंपीय अंतर” के कारण इस क्षेत्र में किसी भी समय बड़े भूकंप आने की सम्भावना होती है। भूकंपीय अंतराल (बड़े भूकंप की अनुपस्थिति) बाद में एक बड़े भूकंप के रूप में सामने आता है। इन क्षेत्रों में मानव आवास संरचना को मजबूत करना समय की एक महत्वपूर्ण आवश्यक्ता है ताकि वे भविष्य में भूकंप के खतरों से सुरक्षित रह सके।

रैपिड विजुअल स्क्रीनिंग से मजबूती का आंकलन

इमारतों या फिर अन्य संरचनाओं की मजबूती का बड़े पैमाने पर आंकलन करने के हेतु रैपिड विज़ुअल स्क्रीनिंग (आरवीएस) का प्रयोग किया जाता है। आरवीएस दृश्य सूचना का उपयोग करके तय करता है कि कोई इमारत कितनी सुरक्षित है और भूकंप सुरक्षा को बढ़ाने के लिए तत्काल इंजीनियरिंग सुधार एवं मरम्मत की कितनी जरुरत है।

आईआईटी मंडी द्वारा नई तकनीक विकसित

आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने हिमालय क्षेत्र में भूकंप झेलने की इमारतों की क्षमता आंकलन का एक नया तरीका विकसित किया है। भूकंप के प्रति इमारतों कितनी संवेदनशील हैं, यह पता लगाने की यह पद्धति सरल है, जो भूकंप के प्रति भवनों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक सुदृढ़ीकरण और मरम्मत कार्यों की जरुरत तय करने में सहायक हो सकती है।

क्षेत्र विशिष्ट दिशा निर्देश और इंजीनियरिंग संरचनाएं है जरूरी

मौजूदा आरवीएस विधियां विभिन्न देशों के डेटा पर आधारित हैं और विशेष रूप से भारतीय हिमालयी क्षेत्र पर लागू नहीं होती हैं। उदाहरण के लिए, भारत के अधिकांश भागों की तरह हिमालयी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में गैर-इंजीनियरिंग आधारित संरचनाएं हैं। स्थानीय निर्माण श्रमिकों में जागरूकता की कमी एवं हितधारकों के खराब नियोजन के कारण इमारतों एवं बुनियादी संरचनाओं का बेतरतीब वितरण देखने को मिलता है। इसलिए, क्षेत्र-विशिष्ट आरवीएस दिशानिर्देश आवश्यक है। इसमें स्थानीय निर्माण प्रथाएं और टाइपोलॉजी शामिल होते हैं।डॉ संदीप कुमार साहा, सहायक प्रोफेसर, स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग, आईआईटी मंडी के नेतृत्व में यह अध्ययन उनके पीएच.डी. छात्र यति अग्रवाल ने किया है।

भूकंप जोखिम कम करने का प्रभावी तरीका

डॉ संदीप कुमार साहा बताते हैं – “हमने भारतीय हिमालयी क्षेत्र में प्रबलित कंक्रीट (आरसी) इमारतों की स्क्रीनिंग के लिए एक प्रभावी तरीका तैयार किया है, ताकि इमारतों की स्थिति के अनुसार मरम्मत कार्य को प्राथमिकता दी जा सके और आसन्न भूकंप के जोखिम को कम किया जा सके।” शोधकर्ता यती अग्रवाल कहती हैं – “हमने दिखाया है कि प्रस्तावित विधि पहाड़ी क्षेत्रों में भूकंप की स्थिति में प्रबलित कंक्रीट इमारतों को होने वाले संभावित नुकसान के अनुसार अलग करने में उपयोगी है।”

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