गुना : आरक्षक गिरफ्तार, दरोगा सहित अन्य फरार

गुना । जिले का बहुचर्चित आत्माराम पारदी केस एक बार फिर चर्चा में है। सोमवार को सीआईडी ने एक पुलिसकर्मी को हिरासत में लिया है। मंगलवार को सीआईडी ने उसे स्पेशल कोर्ट में पेश किया। सीआईडी ने कोर्ट से उसके रिमांड की मांग की, जहां से उसका एक दिन का रिमांड मिला है। बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में जिले के धरनावदा इलाके के खेजरा गांव का रहने वाला आत्माराम पारदी पुत्र स्व. हरिलाल पारदी गुमशुदा हो गया था। उसके परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि थाने के लोग ही उसे अपने साथ ले गए थे। लेकिन वह घर नहीं लौटा। उन्होंने ही उसे मार दिया। उस समय यह मामला काफी चर्चित रहा था। तत्कालीन एसपी ने मामले की जांच की। उसके बाद आईजी ग्वालियर ने मामले की जांच को अपने हाथ में लिया था। बाद में सीआईडी ने जांच की थी। इसी वर्ष जिले के आत्माराम पारदी मामले में अब पुलिस ने उसे लापता घोषित कर दिया है। उसे ढूंढने वाले या उसकी जानकारी देने वाले को 20 हजार रुपया ईनाम देने की घोषणा की गई थी।

सीआईडी भोपाल ने इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। आत्माराम पारदी विगत 7 वर्ष से लापता है। हालांकि उसके अपहरण और हत्या के आरोप भी पुलिस पर ही लगते रहे हैं। अपराध अनुसंधान विभाग भोपाल की तरफ से जारी प्रेस नोट के अनुसार थाना धरनावदा जिला गुना के एक अपराध में गुमशुदा (लापता) आत्माराम पारदी(25) को ढूंढने के काफी प्रयास किये गए, लेकिन आज दिनांक तक गुमशुदा का कोई पता नहीं चल सका है। एडीजी, सीआईडी कुमार सौरभ ने उसे ढूंढने के लिए ईनाम घोषित किया है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति उसे ढूंढेगा या उसकी जानकारी देगा, उसे 20 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा।

आरक्षक की मिली रिमांड

सीआईडी ग्वालियर की एक टीम ने सोमवार को आरक्षक योगेंद्र सिसोदिया को हिरासत में लिया है। मंगलवार को पुलिस ने उसे स्पेशल कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे एक दिन की रिमांड पर भेजा गया है। सीआईडी ने उसकी गिरफ्तारी की सूचने फरियादी सुलोचना पारदी को भी दी है। वहीं बाकी आरोपी फिलहाल फरार बताये जा रहे हैं। हाई कोर्ट ने एसपी से केस की स्टेटस रिपोर्ट तलब की। पुलिस ने फरियादी और घटना के गवाहों के कोर्ट में बयान कराने के बाद आरोपी सब इंस्पेक्टर रामवीर सिंह कुशवाह, आरक्षक योगेंद्र सिंह सिसोदिया, रघुराज तोमर उर्फ़ रघु और दिनेश गुर्जर उर्फ़ बनिया के विरुद्ध आत्माराम को गोली मारकर अगवा कर ले जाने और एट्रॉसिटी एक्ट की धाराओं में पुलिस थाना धरनावदा में 2017 में अपराध दर्ज कर लिया। इस केस की जांच के दौरान आत्माराम की पत्नी मरजीना का एक वीडियो आरोपियों के फेवर में वायरल हुआ, जिसमें उसने आत्माराम के जिंदा होने का दावा किया। साथ ही पुलिस को एक आवेदन देकर आत्माराम के हरियाणा के एक अस्पताल में इलाज कराने का दावा भी किया लेकिन पुलिस द्वारा की गई जांच में मरजीना के बयान झूठे साबित हुए।

एक आरोपी गिरफ्तार हुआ तो आईजी ने तलब की थी डायरी

जुलाई 2019 में अपराध के एक आरोपी दिनेश गुर्जर उर्फ़ बनिया का एक स्टिंग वीडियो वायरल हो गया। जिसमें वह एसआई रामवीर सिंह द्वारा आत्माराम की हत्या करने और उसके एक साथी द्वारा उसकी लाश ठिकाने लगाने की बात करता दिख रहा है। तत्कालीन एसपी राहुल कुमार लोढ़ा के निर्देश पर पुलिस ने इस वीडियो को जब्त कर 31 जुलाई 2019 को बनिया गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया। इस एक गिरफ्तारी के साथ ही महकमे में खलबली मच गई। तत्कालीन ग्वालियर आईजी राजा बाबू सिंह ने केस की डायरी अपने पास मंगा ली और वायरल वीडियो में गवाह बने आरक्षक नीरज जोशी का तबादला कर दिया। इसके बाद केस की जांच से जुड़े अफसरों और पुलिस कर्मियों के तबादले कर दिए गए। मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी गई। ये सब कांग्रेस की सरकार के समय हुआ।

आरोप पत्र पेश नहीं किया तो मिल गई जमानत

सीआईडी ने केस की विवेचना शुरू की और पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपी बनिया गुर्जर के विरुद्ध गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर ट्रायल कोर्ट में आरोप पत्र तक पेश नहीं किया। जिसके चलते आरोपी को कोर्ट से जमानत मिल गई। इससे तत्कालीन जांच अधिकारियों की भूमिका पर सवाल भी उठे। सूत्रों ने बताया कि इस दौरान केस डायरी से बनिया गुर्जर के स्टिंग वीडियो की सीडी भी गायब हो गई थी। जांच अधिकारियों ने विवेचना की दिशा को पलटते हुए आत्माराम को गुमशुदा घोषित कर दिया था। यहां तक कि इस मामले में आरोपियों के बजाए फरियादियों से नार्को टेस्ट की सहमति मांगी गई थी। इस तरह इस केस में जांच की दिशा ही बदल दी गई थी। इधर कोरोना महामारी के चलते हाई कोर्ट में भी केस की सुनवाई टलती रही। सूत्र बताते हैं कि आरोपियों की ओर से अधिकारियों को मैनेज किया जाता रहा। इस बीच प्रदेश में सरकार बदलने पर जांच अधिकारी भी बदल गए। हाई कोर्ट में भी केस की सुनवाई शुरू हो गई। केस डायरी में फिर से स्टिंग वीडियो की सीडी शामिल की गई जिसकी लेबोरेटरी जांच रिपोर्ट में वीडियो सही पाया गया।

हाई कोर्ट ने मंगाई स्टेटस रिपोर्ट तो सक्रिय हुई सीआईडी

1 दिसंबर को हाई कोर्ट ने केस की फिर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने याचिका खारिज करने के आवेदन और दलीलों को निरस्त कर दिया। साथ ही फटकार लगाते हुए कहा कि तीन सालों के बाद भी कोर्ट के सामने इस केस का कोई नतीजा नहीं आया है। कोर्ट ने 19 दिसंबर से शुरू हो रहे सप्ताह में सीआईडी को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। इसके बाद से जांच एजेंसी के अधिकारी एक्शन मोड में हैं। दरअसल, कोर्ट की तल्खी को देखते हुए एडीजी सीआईडी जीपी सिंह ने मामले की कमान अपने हाथ में लेकर डीएसपी सतीश चतुर्वेदी के नेतृत्व में गठित एसआईटी को मामले का जल्द खुलासा करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद एसआईटी ने आरोपी रघुराज प्रताप तोमर उर्फ़ रघु रोकड़ा को पकडऩे के लिए रूठियाई स्थित एक फार्म हाऊस पर दबिश दी थी। लेकिन टीम जिस होटल में रुकी वहां से सूचना लीक हो जाने से रघु सीआईडी टीम के पहुंचने से पहले ही भाग गया। सीआईडी ने 8 दिसंबर को आरोपी रघु की गिरफ्तारी पर 30 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया है।

0/Post a Comment/Comments

Previous Post Next Post