किसानों मजदूरों, गरीबों के हक छीन इवेंट में लगी है भाजपा सरकार : कमलेश्वर पटेल

18 साल की भाजपा सरकार ने सरपंचों को बनाया अधिकार विहीन, प्रशिक्षण के नाम पर सरकारी खजाने से की करोड़ों की बर्बादी

आगामी विधानसभा चुनाव में चारों खाने चित्त होगी भाजपा

भोपाल ।  प्रदेश भर के सरपंचों को बीते बुधवार को प्रशिक्षण के नाम पर राजधानी भोपाल बुलाकर अपनी झूठी राजनीति चमकाने का कुत्सित प्रयास भाजपा और उसकी सरकार ने किया है। प्रदेश सरकार और उसके मुखिया शिवराजसिंह चौहान किसानों, मजदूरों, गरीबों के हक छीनकर इंवेंट करने में लगी हुई है, वहीं 18 साल से प्रदेश में भाजपा की सरकार है, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान सरपंचों को दिये गये अधिकारों पर कुठाराघात कर भाजपा सरकार ने सरपंचों को अधिकार विहीन कर दिया है। पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक कमलेश्वर पटेल ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में यह बात कहीं।
 श्री पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सरपंचों को केवल दो घंटे अपने भाषण सुनाने के लिए सरपंचों को पूरे प्रदेश से बुलाकर उनका अपमान किया। मनरेगा की नाम पर मजदूर को सम्मानजनक मानदेय नहीं दिया जा रहा है। आजीविका मिशन के बहनों को मिलने वाली राशि भाजपा सरकार द्वारा नहीं दी जा रही है तथा उन्हें भाजपा द्वारा होने वाले राजनैतिक आयोजनों में जाने के लिए मजबूर किया जाता है। पंचायत प्रतिनिधियों का मानदेय अत्यधिक कम है जो कि मनरेगा के मजदूरों से भी कम है। सरकार को सम्मानजनक मानदेय पंच, सरपंच, जनपद और जिला पंचायत के प्रतिनिधियों को देना चाहिए। भाजपा सरकार द्वारा सरपंचों के सम्मेलन में नामांतरण, बंटवारा जैसे अधिकार देने की बात कही गई है, यह खोखली घोषणा से अधिक कुछ नहीं है। भाजपा सरकार में ग्रामीण स्तर पर स्वसहायता समूह कमजोर हुये हैं। उनके मद की राशि लगातार घटायी गई। 
 श्री पटेल ने कहा कि ग्रामीण पंचायतों, जिला पंचायतों को प्रशिक्षण ग्रामीण एवं पंचायत विकास विभाग द्वारा दिया जाना था, लेकिन पूरा प्रशिक्षण केवल एक व्यक्ति द्वारा दिया जाकर मात्र 2 घण्टे में खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियांे के प्रशिक्षण के लिए जो राशि आती है उसका दुरूपयोग हो रहा है। राष्टीय ग्राम स्वराज के तहत निकाली गई 25 करोड़ रू. से अधिक की राशि सरकार कहां डकार गई है। उन्होंने कहा कि मुख्य मंत्री का भाषण सुनने के लिए पंचायतों के प्रतिनिधि तैयार ही नहंी थे, क्योंकि उन्होंने पंचायतों के अधिकार को छिन्ने का काम किया है। 
  श्री पटेल ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में केवल मानदेय बढाने की घोषणा की गई, वही भी 1750 से बढ़ाकर 4250 रू., जो कि मनरेगा की मजदूरी से भी कम है। इसके अलावा नया कुछ भी नहीं किया गया। यही नहीं भाजपा सरकार में पिछले 6 माह से सरपंचों को मानदेय नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि हम मुख्यमंत्री जी से मांग करते है कि चाहे सरपंच हो, जनपद सदस्य हो, जिला पंचायत सदस्य हो सभी का मानदेय बढ़ाया जाये। इन जनप्रतिनिधियांे का मानदेय कम से कम इतना तो रखा जाए की मानरेगा की मजदूरी से ज्यादा हो। 
 श्री पटेल ने कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को 6 माह से मानदेय नहीं मिला है। बीजेपी इंवेट कर चुने हुए जन प्रतिनिधियों को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। भाजपा सरकार इंवेट करने की जगह पंचायतों को अधिकार संपन्न बनाये। जैसा कि तत्कालीन दिग्विजय सिंह की सरकार ने 73 वें 74 वें संविधान संसोधन विधेयक में जो अधिकार दिए पंचायतों को दिये थे वैसे अधिकार दे।
 श्री पटेल ने कहा कि भाजपा की दमनकारी सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों के माध्यम से जलकर, संपत्तिकर, व्यवसाय कर लगाये जा रहे हैं, जो कि घोर निंदनीय है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगाये जाने वाले यह टेक्स सरकार तत्काल वापस ले। भाजपा सरकार द्वारा 15 वें वित्त की राशि भी पंचायतों को देरी से भेजी जा रही है। रोज़गार सहायक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति का अधिकार पंचायतों को था, जो भाजपा सरकार ने उनसे छीन लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छोटे कर्मचारियों पर कार्यवाही कर उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर उनके जीवन पर संकट खड़ा कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री, मंत्री और उनसे संबंधित अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त होने के बाद भी लीपापोती कर उन्हें बचाया जा रहा है। 
 श्री पटेल ने कहा कि आजीविका मिशन मंे गडबड़ियांे के लिए जिम्मेदार सीईओ बेलवाल रिटायमेंट के बाद भी काम कर रहे हैं, आखिर सरकार इन पर मेहरबान क्यों है? जबकि कई शिकायतें जांच हेतु लोकायुक्त एवं अन्य एजेंसियों के पास लंबित हैं।  


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