4 दिसम्बर को पेंशन महाकुंभ मैहर में आयोजित


प्रदेश के कोने कोने से समस्त विभागों के पुरानी पेंशन विहीन कर्मचारी होंगे शामिल 

    भोपाल । मध्यप्रदेश में 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारी नेशनल पेंशन स्कीम के दायरे में आता है जिनको सेवानिवृत्ति के बाद बहुत कम राशि पेंशन के नाम पर प्राप्त हो रही है जिसको लेकर प्रदेश का कर्मचारी आक्रोशित हैं और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के नियमों के अनुसार पेंशन बहाली के लिए लामबंद हो चुका है। पुरानी पेंशन बहाली को लेकर नेशनल मुवमेंट फाॅर ओल्ड पेंशन स्कीम (एन एम ओ पी एस इंडिया) संघर्षरत है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु और मध्यप्रदेश के
प्रांताध्यक्ष परमानन्द डेहरिया ने प्रदेश में कार्यरत समस्त राज्य शासन और केन्द्रीय कर्मचारियों से आव्हान किया है कि पेंशन महाकुंभ मैहर में सहभागिता निभाएं।
     राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कर्मचारियों से आव्हान करते हुए कहा है कि नेशनल पेंशन स्कीम के दायरे में कर्मचारियों को शामिल करते समय झुठे सपने दिखाए गये थे। जब कर्मचारी बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त हो रहा है तो हकीकत सामने आ रही है। कर्मचारियों को दिखाए गये सपने चकनाचूर हो ग्रे है। सेवानिवृत्त पश्चात पेंशन के नाम पर अत्यधिक कम राशि 500, 800, 1500 प्राप्त हो रही है। जिसमें सेवानिवृत्त कर्मचारी का जीवन यापन संभव नहीं। यह पेंशन राशि बुढ़ापे का अपमान करती प्रतीत हो रही है। नेशनल पेंशन स्कीम के अंतर्गत मिलने वाली राशि अनेक अवसरों पर वृद्धावस्था पेंशन से भी कम मिल रही है। जबकि सर्वविदित है कि सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी कर्मचारी की शारीरिक क्षमता कम हो जाती हैं। वह उपार्जन की स्थिति में नहीं रहता और वृद्धावस्था सम्बन्धि अनेक बिमारियों का शिकार हो जाता है तथा उसे वृद्धावस्था में अनेक पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन भी करना होता है जिसके लिए पर्याप्त धनराशि की जरूरत होती है। लेकिन नेशनल पेंशन स्कीम में पेंशन राशि बहुत कम मिलने से वह सफलता और सम्मान पूर्वक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर पाता है और अपमान जनक जीवन जीने के लिए बाध्य हो रहा है। अतः केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने कर्मचारी हित में संज्ञान लेकर अविलंब पुरानी पेंशन बहाल करना चाहिए।
        कर्मचारी और शासन का अंश मिलाकर 24% राशि प्रतिमाह शेयर बाजार के हवाले की जा रही है जो उतार चढ़ाव के अधीन है। कर्मचारियों के मेहनत का पैसा शेयर बाजार के माध्यम से उद्योगपतियों की झोली में व्यवसाय हेतु डाला जा रहा है जो घोर आपत्ति जनक है। जिसके बदले कर्मचारियों को सेवानिवृत्त के उपरांत सम्मान जनक जीवन जीने लायक राशि प्राप्त नहीं हो रही है। 30-40 साल तक शासन की सेवा करने वाले कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का ध्यान रखना राज्य शासन और केन्द्र शासन की नैतिक जिम्मेदारी है लेकिन सरकारें सामाजिक जिम्मेदारियों से भाग रही है और कर्मचारियों का सेवानिवृत्त जीवन नारकीय बना रही है। केन्द्र और राज्य सरकार को चाहिए कि वे पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार पुरानी पेंशन बहाल करे। नेशनल पेंशन स्कीम के नाम पर कर्मचारियों शोषण को अविलंब बंद किया जाए। प्रांताध्यक्ष परमानन्द डेहरिया ने मध्यप्रदेश शासन से मांग की है कि कर्मचारियों को प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना कर पुरानी पेंशन बहाल की जाए। प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि का लाभ क्रमोन्नति पदोन्नति और ग्रेच्युटी में भी दिया जाए। नेशनल पेंशन स्कीम में अब तक जमा राशि को राज्यों सरकारों को वापस कर इस राशि से कर्मचारियों के जीपीएफ फंड का निर्माण किया जाए। मीडिया प्रभारी हीरानंद नरवरिया ने बताया की हम अपनी पुरानी पेंशन बहाली और वरिष्ठता की मांग को लेकर महेश्वर और जबलपुर में भी पेंशन महाकुंभ का आयोजन कर चुके हैं। जब तक हमारी मांग मान नहीं ली जाती तब तक पेंशन महाकुंभ का दौर जारी रहेगा। हम भविष्य में उज्जैन, ग्वालियर, इंदौर में भी पेंशन महाकुंभ का आयोजन करेंगे और एक बड़ा सम्मेलन राजधानी भोपाल में भी करेंगे। मध्यप्रदेश सरकार ने हमारी बात नहीं सुनी तो छिंदवाड़ा की राह भी पकड़ेंगे।
       

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