जी-20 के प्रतिनिधियों ने मुंबई में कन्हेरी गुफाओं का दौरा किया

मुंबई । G20 सदस्य देशों की विकास कार्य समूह की बैठक के एक हिस्से के रूप में G20 के प्रतिनिधियों ने मुंबई स्तिथ कन्हेरी गुफाओं का दौरा किया। इसी के अंतर्गत पर्यटन मंत्रालय के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने मुंबई में भारतीय शास्त्रीय संगीत के माध्यम से जी-20 के प्रतिनिधियों को मंत्रमुग्ध कर देने वाले कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

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G20 भारत के लिए विश्व को अपनी संस्कृति और विरासत दिखाने का सही अवसर

G20 की अध्यक्षता भारत के लिए दुनिया को अपनी समृद्ध और गौरवशाली संस्कृति एवं विरासत का परिचय करवाने का भी उपयुक्त अवसर है; जिसके अंतर्गत इस वर्ष G20 की अध्यक्षता करते हुए भारत ने अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को इससे जोड़ा है। 

भारत की संस्कृति और विरासत बहुआयामी है जिसमें भारत का महान इतिहास, विलक्षण भूगोल और सिन्धु घाटी की सभ्यता के दौरान बनी और आगे चलकर वैदिक युग में विकसित हुई अतुलनीय संस्कृति भी है। भारतीय कला की मान्यता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 32 सांस्कृतिक स्थल जिनमें अजंता की गुफाएं, महान जीवित चोल मंदिर, आगरा का किला, एलीफेंटा की गुफाएं आदि यूनेस्को की मूर्त सांस्कृतिक विश्व विरासत सूची में शामिल हैं। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस बात प्रकाश डाल कर पहले भी कह चुके हैं कि भारत को जी-20 की अध्यक्षता मिलना सभी नागरिकों के लिए गौरव की बात है और यह भारत, भारतीयता और भारतीय संस्कृति को विश्व में स्थापित करने का सही अवसर है। 

इससे पहले भी उदयपुर में हुई G20 शेरपा मीट के दौरान जी20 प्रतिनिधियों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आतिथ्य का अनुभव कराया गया था। इसके अलावा, प्रतिनिधियों को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल, कुंभलगढ़ किले के भ्रमण पर भी ले जाया गया था। इसी संदर्भ में G20 प्रतिनिधियों को कन्हेरी गुफाओं का भ्रमण करवाना इस कड़ी का एक हिस्सा था।

G20 से पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

वसुधैव कुटुम्बकम’ – ‘वन अर्थ वन फैमिली वन फ्यूचर’ की अपनी G20 प्रेसीडेंसी थीम से प्रेरणा लेते हुए, भारत के 56 शहरों में 215 बैठकें होंगी। अलग-अलग शहरों में बैठक आयोजित करने का एक मकसद बड़े और विविधता वाले देश भारत की अमूल्य संस्कृति और धरोहर से विश्व को अवगत करवाना है। यह भारत की संस्कृति, विरासत, होटल, रेस्तरां, लोकाचार और पर्यटन स्थलों को दिखाने के लिहाज से महत्वपूर्ण अवसर है। देश में होने वाली बैठकों में करीब 400 सदस्य शामिल होंगे।

 ये कोई आम पर्यटक नहीं होंगे बल्कि महत्वपूर्ण अधिकारी, मंत्री, विभिन्न एजेंसियों के प्रमुख होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जहां G20 बैठकें आयोजित होंगी वहाँ पर्यटन को बढ़ावा देने और उन स्थानों की स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की क्षमता पर ध्यान देने की बात कही है। भारत को एक पर्यटन बाजार के रूप में विकसित करने के लिए G20 का आयोजन बेहद महत्वपूर्ण है।

विश्व यात्रा और पर्यटन परिषद (World Travel and Tourism Council) की वर्ष 2021 की रिपोर्ट में विश्व सकल घरेलू उत्पाद में योगदान के मामले में भारत के पर्यटन को 10वें स्थान पर रखा गया है। वित्त वर्ष 2020 में पर्यटन क्षेत्र में कुल 39 मिलियन रोजगार अवसर सृजित हुए जो देश के 8% रोजगार का प्रतिनिधित्व करते हैं। वर्ष 2029 तक यह 53 मिलियन नौकरियों के लिये उत्तरदायी होगा।

क्या है कन्हेरी गुफाओं का इतिहास?

कन्हेरी गुफाएँ मुंबई के पश्चिमी बाहरी इलाके में स्थित गुफाओं और रॉक-कट स्मारकों का एक समूह है। ये गुफाएँ संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों के भीतर स्थित हैं। कन्हेरी नाम प्राकृत में ‘कान्हागिरि’ से लिया गया है और इसका वर्णन सातवाहन शासक वशिष्ठपुत्र पुलुमावी के नासिक शिलालेख में मिलता है।विदेशी यात्रियों के यात्रा वृतांतों में कन्हेरी का उल्लेख मिलता है। कन्हेरी का सबसे पहला वर्णन फाहियान द्वारा किया गया है, जो 399-411 ईस्वी के दौरान भारत आया और बाद में कई अन्य यात्रियों ने भी इसका वर्णन

कन्हेरी गुफाओं में 110 से अधिक विभिन्न एकाश्म चट्टानों का उत्खनन शामिल है और यह देश में सबसे बड़े एकल उत्खनन में से एक है। उत्खनन का आकार एवं विस्तार, साथ ही कई जल के कुंड, अभिलेखों, सबसे पुराने बांँधों में से एक, स्तूप कब्रगाह गैलरी एवं उत्कृष्ट वर्षा जल संचयन प्रणाली, मठवासी एवं तीर्थ केंद्र के रूप में इसकी लोकप्रियता को प्रमाणित करती है। ये उत्खनन मुख्य रूप से बौद्ध धर्म के हीनयान चरण के दौरान किये गए थे लेकिन इसमें महायान

शैलीगत वास्तुकला के कई उदाहरणों के साथ वज्रयान से संबंधित आदेश के कुछ मुद्रण भी शामिल हैं। यह कन्हेरी सातवाहन, त्रिकुटक, वाकाटक और सिलहारा के संरक्षण के साथ ही इस क्षेत्र के धनी व्यापारियों द्वारा किये गये दान के माध्यम से फला-फूला।

कन्हेरी गुफाएंँ हमारी प्राचीन विरासत का हिस्सा हैं क्योंकि वे विकास और हमारे अतीत का प्रमाण प्रदान करती हैं। कन्हेरी गुफाओं और अजंता एलोरा गुफाओं जैसे विरासत स्थलों के वास्तुशिल्प एवं इंजीनियरिंग उस समय की कला, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, निर्माण, धैर्य एवं दृढ़ता आदि के रूप में लोगों के ज्ञान को प्रदर्शित करते हैं। उस समय ऐसे कई स्मारकों को बनने में 100 साल से अधिक का समय लगा था। इसका महत्त्व इस तथ्य से बढ़ जाता है कि यह एकमात्र केंद्र है जहांँ बौद्ध धर्म और वास्तुकला की निरंतर प्रगति को दूसरी शताब्दी ईस्वी से 9वीं शताब्दी ईस्वी तक एक स्थायी विरासत के रूप में देखा जाता है।

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