14वें राष्ट्रीय जनजातीय युवा कार्यक्रम के अंतर्गत आरएनटीयू में हुआ संवाद

रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए दिखाई जनजातीय संस्कृति की झलक, युवाओं ने भोजपुर मंदिर का किया भ्रमण  

जनजातीय संस्कृति है देश का गौरव- डीआईजी डॉ संजय कुमार

भोपाल । गृह मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से नेहरू युवा केंद्र संगठन मध्यप्रदेश द्वारा चल रहे 14वें राष्ट्रीय जनजातीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के दूसरे दिन शनिवार को टैगोर प्रबंधन संस्थान रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय एवं एनएसएस इकाई भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं उद्यमिता विकास पर संवाद सत्र का आयोजन विश्वविद्यालय के सभागार में हुआ।
 मुख्य अतिथि सीआरपीएफ के डीआईजी डॉ संजय कुमार, विशिष्ट अतिथि डॉ.सुरेंद्र शुक्ला निदेशक नेहरू युवा केंद्र संगठन तथा सारस्वत अतिथि वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक श्री अरविन्द श्रीधर रहे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों द्वारा मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक नृत्यों को प्रस्तुत किया गया वहीं झारखंड, उड़ीसा व महाराष्ट्र से आई टीमों ने भी अपने राज्यों के नृत्य प्रस्तुत किए। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे डॉ संजय कुमार ने कहा कि जनजातीय समुदाय ही संस्कृति के सच्चे वाहक है। आज भारतीय संस्कृति को उसके मूल रूप में अगर किसी ने सहेजकर रखा है तो वह जनजातीय समुदाय ही है। प्रकृति से इसका जुड़ाव, पर्यावरण की सुरक्षा, एक दूसरे के प्रति संवेदना का भाव हमें जनजातीय संस्कृति से सीखने को मिलता है। जनजातीय संस्कृति वास्तव में देश का गौरव है। वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ सुरेंद्र शुक्ला ने बताया कि वे जनजातीय जिले में पले बढे और इसी कारण वे जनजातीय गीतों की रचना भी कर पाए हैं। उन्होंने महुआ बीनने की परंपरा पर अपना गीत भी सुनाया। सारस्वत अतिथि श्री अरविन्द श्रीधर ने भगोरिया व अन्य आदिवासी पर्वों के बारे में बताया। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में टैगोर ग्रामीण प्रबंधन के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं उद्यमिता विकास पर कार्यशाला का आयोजन हुआ जिसमें संस्थान की समन्वयक डॉ मनीषा पांडेय ने उद्यमिता की गहराईयों से युवाओं को परिचित कराया। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर डॉ रवीन्द्र पाठक व विश्वविद्यालय की प्रो वीसी डॉ संगीता जौहरी ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलसचिव डॉ विजय सिंह ने की जिन्होंने जनजातीय कला एवं संस्कृति पर बोलते हुए कहा कि वर्तमान में जनजातीय जीवन की गहरी समझ से हम सबको ओतप्रोत करने का काम भारत सरकार के माध्यम से उपर्युक्त संगठन कर रहे हैं, जिसमें विश्वविद्यालय आगे भी सहयोग करता रहेगा। जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने की हम सबकी जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित शुभम चौहान, आशुतोष मालवीय, स्वयंसेवक अमित कुमार यादव, साक्षी राजपूत, नेहा रंधावा, पल्लवी साहनी, जन्नत खान, शिवेंद्र राजपूत, अविनाश कुमार इत्यादि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। वहीं युवाओं को शाम को भोजपुर मंदिर का भ्रमण कराया गया ।

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