मन की बात: कागज से हवाई जहाज बनाने वाले बना रहे रॉकेट, पीएम ने कहा-G 20 की अध्यक्षता करना बड़ी उपलब्धि


नई दिल्ली । पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को संबोधित किया, जिसमें पीएम ने कई मुद्दों पर चर्चा की और अपने विचार, अनुभव साझा किए। इस दौरान पीएम मोदी ने इसरो की ओर से देश के पहले प्राइवेट रॉकेट लॉन्चिंग, ड्रोन औक जी 20 की अध्यक्षा मिलने को लेकर विचार साझा किए।  

पीएम ने कहा कि 18 नवंबर को पूरे देश ने स्पेस सेक्टर में एक नया इतिहास बनते देखा। इस दिन भारत ने अपने पहले ऐसे रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजा, जिसे भारत के प्राइवेट सेक्टर ने डिजाइन और तैयार किया था। इस रॉकेट का नाम है – ‘विक्रम–एस।| श्रीहरिकोटा से स्वदेशी स्पेस स्टार्ट-अप के इस पहले रॉकेट ने जैसे ही ऐतिहासिक उड़ान भरी, हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो गया।

उन्होंने आगे कहा कि भारत स्पेस के सेक्टप में अपनी सफलता, अपने पड़ोसी देशों से भी साझा कर रहा है। शनिवार को ही भारत ने एक सेटेलाइट लॉन्च की, जिसे भारत और भूटान ने मिलकर डेवलप किया है। ये सेटेलाइट बहुत ही अच्छे रिजॉल्यूशन की तस्वीरें भेजेगी, जिससे भूटान को अपने प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में मदद मिलेगी। इस सैटेलाइट की लॉन्चिंग, भारत-भूटान के मजबूत संबंधों का प्रतिबिंब है।

 कागज का हवाई जहाज बनाने वाले बना रहे रॉकेट

पीएम ने कहा कि आप कल्पना कर सकते हैं जो बच्चे कभी हाथ से कागज का हवाई जहाज बनाकर उड़ाया करते थे, उन्हें अब भारत में ही हवाई जहाज बनाने का मौका मिल रहा है। जो बच्चे कभी चाँद-तारों को देखकर आसमान में आकृतियां बनाया करते थे, उन्हें अब भारत में ही रॉकेट बनाने का मौका मिल रहा है। स्पेस को प्राइवेट स्केटर के लिए खोले जाने के बाद, युवाओं के ये सपने भी साकार हो रहे हैं। रॉकेट बना रहे ये युवा मानो कह रहे हैं – Sky is not the limit।


ड्रोन से ट्रांसपोर्ट हो रहे सेब

पीएम मोदी ने आगे कहा कि जब हम टेक्नोलॉजी से जुड़े इनोवेशन की बात कर रहें हैं, तो ड्रोन को कैसे भूल सकते हैं? ड्रोन के क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। कुछ दिनों पहले हमने देखा कि कैसे हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में ड्रोन के जरिए सेब ट्रासपोर्ट किये गए। किन्नौर, हिमाचल का दूर-सुदूर जिला है और वहां इस मौसम में भारी बर्फ रहा करती है। इतनी बर्फ़बारी में, किन्नौर का हफ्तों तक, राज्य के बाकी हिस्से से संपर्क बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वहां से सेब का ट्रांसपोटेश भी उतना ही कठिन होता है। अब ड्रोन टेक्नोलॉजी से हिमाचल के स्वादिष्ट किन्नौरी सेब लोगों तक और जल्दी पहुंचने लगेंगे। इससे हमारे किसान भाई-बहनों का खर्च कम होगा – सेब समय पर मंडी पहुंच पाएगा, सेब की बर्बादी कम होगी।

 

जी-20 की अध्यक्षता मिलना गौरव की बात

पीएम मोदी ने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता मिलना भारत के लिए गौरव की बात है। आजादी के अमृतकाल में भारत को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने कहा कि देश के लोग स्वयं को जी-20 से जोड़ रहे हैं। जी-20 की विश्व की जनसंख्या में दो तिहाई, वैश्विक व्यापार में तीन चौथाई और वैश्विक जीडीपी में 85 प्रतिशत भागीदारी है। पीएम ने कहा कि आप कल्पना कर सकते हैं भारत अब से 3 दिन बाद यानि 1 दिसंबर से इतने बड़े समूह की, इतने सामर्थ्यवान समूह की अध्यक्षता करने जा रहा है । भारत के लिए, हर भारतवासी के लिए, ये कितना बड़ा अवसर आया है। जी-20 की अध्यक्षता, हमारे लिए बड़ी उपलब्धि बनकर आई है। हमें इस मौके का पूरा उपयोग करते हुए विश्व कल्याण पर फोकस करना है।

 

पीएम ने किया मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का जिक्र

इस दौरान उन्होंने मांसपेशियों से जुड़ी बीमारी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (मांसपेशीय दुर्विकास) के उपचार के लिए देश के सुदूर क्षेत्र में जारी सेवा कार्य का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान की दुनिया ने अनुसंधान और नवाचार के साथ ही अत्याधुनिक तकनीक और उपकरणों के सहारे काफी प्रगति की है, लेकिन कुछ बीमारियां आज भी हमारे लिए बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसी ही एक बीमारी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी है।

 

क्या है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी

उन्होंने आगे कहा कि यह मुख्य रूप से एक ऐसी अनुवांशिक बीमारी है, जो किसी भी उम्र में हो सकती है। इसमें शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। रोगी के लिए रोजमर्रा के अपने छोटे-छोटे कामकाज करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे मरीजों के उपचार और देखभाल के लिए बड़े सेवा-भाव की जरूरत होती है।

 

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के रोगी यहां हो रहे ठीक

पीएम ने कहा कि हमारे यहां हिमाचल प्रदेश में सोलन में एक ऐसा केंद्र है, जो मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बना है। इस केंद्र का नाम ”मानव मंदिर” है। इसे इंडियन एसोसिएशन ऑफ मस्कुलर डिस्ट्रॉफी द्वारा संचालित किया जा रहा है। मानव मंदिर अपने नाम के अनुरूप ही मानव सेवा की अद्भुत मिसाल है। यहां

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