दुनिया में ‘पोलोनियम’ से घातक रासायन को खोजने वाले दंपत्ति की बेटी की जान इसी जहर ने ले ली!: Latest News

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यह किस्सा है अब से करीब 124 साल पहले का यानी सन् 1898 का. मतलब एक सदी से पुराना मगर सच्चा किस्सा है. नाम था मैरी क्यूरी. मैरी क्यूरी की जन्म 7 नवंबर सन् 1867 को पोलैंड (वारसा) में हुआ था. जिनकी 4 जुलाई सन् 1934 को मृत्यु हो गई. मैरी क्यूरी की शादी पियरे क्यूरी से शादी हुई थी. मैरी क्यूरी का जन्म पोलैंड के वारसा नगर में हुआ था. लड़की होने के चलते तत्कालीन वारसा में मैरी को सीमित शिक्षा की ही अनुमति मिली थी. इसलिए उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा छिप-छिपकर जैसे तैसे पूरी की. उसके बाद वे बड़ी बहन से हासिल आर्थिक मदद के बलबूते भौतिकी और गणित की पढ़ाई के लिए पेरिस पहुंच गईं.

पेरिस में उन्हें डॉक्टरेट पूरा करने वाली पहली पोलिश महिला होने का गौरव मिला, यह वही क्यूरी दंपति था जिसने दुनिया में सबसे पहले सन् 1898 में पोलोनियम जैसे घातक रासायनिक जहर की खोज की. मैरी क्यूरी का पूरा नाम था मैरी स्क्लाडोवका क्यूरी. इसके बाद वे पेरिस विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर बनने वाली पहली महिला भी दुनिया में साबित हुईं. पियरे क्यूरी से यहीं उनकी मुलाकात हुई. बाद में दोनो ने सहमति से शादी कर ली. इसी क्यूरी दंपति ने 1898 में पोलोनियम की महत्त्वपूर्ण खोज की. पोलोनियम खोज निकालने के बाद इसी दंपत्ति ने दुनिया में रेडियम की खोज कर डाली जो, चिकित्सा विज्ञान और रोगों के उपचार में रामबाण साबित हुई.

यह भी रिकॉर्ड मैरी दंपत्ति के नाम

विज्ञान की दो शाखाओं यानि भौतिकी व रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली मैरी क्यूरी पहली वैज्ञानिक भी सिद्ध हुईं. क्यूरी दंपत्ति को वो नोबेल पुरस्कार सन् 1903 में मिला था. उसी वर्ष मैरी क्यूरी ने पीएचडी भी पूरी की थी. क्यूरी दंपत्ति को रेडियोएक्टिविटी की खोज के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था. जबकि इसके कुछ साल बाद ही उन्हें यानी सन् 1911 में रसायन विज्ञान के क्षेत्र में रेडियम के शुद्धीकरण (आइसोलेशन ऑफ प्योर रेडियम) के लिए, रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार भी मिल गया. विज्ञान की भौतिकी और रासायनिक यानी दोनो ही शाखाओं में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली मैरी क्यूरी पहली वैज्ञानिक बनी.

मां-पिता के खोजे जहर ने ली बेटी की जान

खबरों के मुताबिक ऐसे क्यूरी दंपति की बेटी आइरीन क्यूरी की संदिग्ध मौत, उसी पोलोनियम रासायन के संपर्क में पहुंचने के चलते हो गई थी, जिसकी खोज खुद आइरीन की मां मैरी क्यूरी और पिता पियरे क्यूरी ने सन् 1898 में की थी. कहा जाता है कि मैडम क्यूरी की बेटी आइरीन क्यूरी, गलती से एक दिन प्रयोगशाला में मौजूद पोलोनियम जैसे घातक रसायनिक जहर के संपर्क में आ गई थी. जिसके बाद आइरीन को ल्यूकीमिया हो गया और तमाम कोशिशों को बाद भी आइरीन की बाद में मौत हो गई. मतलब, दुनिया में जिस पोलोनियम से खतरनाक रसायनिक जहर की उत्पत्ति मैरी दंपति ने की थी. उसी पोलोनियम जहर ने उनकी बेटी आइरीन की जाने-अनजाने जान ले ली.

इजराइल ने लेकिन कभी पुष्टि नहीं की

कहा तो यह भी जाता है कि इजरायल के लेखक माइकल कारपिन ने कभी दावा किया था जिसके मुताबिक, सन् 1957 में वहां के वीजमान इंस्टीट्यूट ऑफ सांइसेज की प्रयोगशाला में पोलोनियम लीक हो गया था. जिस कारण कई वैज्ञानिक उसकी चपेट में आ गए थे. बाद में उनमें से अधिकांश की मौत कैंसर होने के चलते हो गई. कैंसर होने की वजह भी इसी पोलोनियम रसायन को माना गया था. हालांकि इजरायल ने कभी इस तथ्य को नहीं स्वीकारा. सायनाइड के बारे में लगभग सभी लोगों को पता होगा। लेकिन सायनाइड की तरह ही एक और खतरनाक जहर है जिसका नाम पोलोनियम है। उसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। पोलोनियम के बारे में कहा जाता है कि इसका सिर्फ एक ग्राम लाखों लोगों की जान लेने के लिए काफी है। आइए आज इस पोलोनियम के बारे में जानते हैं कि यह है क्या बला, कहां इसकी पैदावार होती है, यह कितना खतरनाक है?

इस कदर घातक है ‘पोलोनियम’

दरअसल पोलोनियम में एक धातु है जो, यूरेनियम के अयस्क में पाया जाता है. इसे पोलोनियम 210 के नाम से दुनिया जानती-पहचानती है. इससे छोटे-छोटे अल्फा कण निकलते हैं. अगर पोलोनियम मानव शरीर के संपर्क में नहीं आता है तो, इसका कोई असर नहीं होता है, क्योंकि इसके अल्फा कण कुछ सेंटीमीटर तक से ज्यादा की दूरी तय कर पाने अक्षम होते हैं. लिहाजा ऐसे में वे इंसान की त्वचा को पार नहीं कर पाते. हां, अगर भूल से भी इसकी अंश मात्र मात्रा भी इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाए तो यह, शरीर के आंतरिक अंगों को धीरे-धीरे नष्ट कर देता है.

दूसरी मुसीबत यह है कि जब तक इंसान को अपने बदन में इसकी मौजूदगी का अहसास होता है, तब तक यह इंसान की जान लेने के कगार पर पहुंच चुका होता है. इसका नाम भी पोलोनियम दरअसल, पोलैंड के नाम पर ही रखा गया है. पोलैंड को लैटिन भाषा में “पोलोनिया” कहा जाता है सो क्यूरी दंपत्ति द्वारा खोजा गया यह रासायनिक जहर भी आज दुनिया में “पोलोनियम” के नाम से ही जाना-पहचाना जाता है. करीब 66 साल की उम्र में फ्रांस के सांटोरियम में अप्लास्टिक एनीमिया की वजह से सन् 1934 में ऐसी हस्ती मैडम मैरी क्यूरी की मौत हो गई थी.

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PRAJA PARKHI: दुनिया में ‘पोलोनियम’ से घातक रासायन को खोजने वाले दंपत्ति की बेटी की जान इसी जहर ने ले ली!: Latest News
दुनिया में ‘पोलोनियम’ से घातक रासायन को खोजने वाले दंपत्ति की बेटी की जान इसी जहर ने ले ली!: Latest News
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