पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार ने Enc, CE, कार्यपालन यंत्री सहित 7 के खिलाफ याचिका दायर की

ढाई करोड़ के टेंडर नियम विरुद्ध करने का घोटाला 
 भोपाल। लोक निर्माण विभाग में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। व्यापक स्तर पर विभाग में हुई गड़बड़ी को लेकर एक याचिका दायर की गई है। भोपाल निवासी ठेकेदार की ओर से अधिवक्ता राकेश नारायण काश्मीरी ने एक याचिकादायर की है। याचिका मेें एसडीओ घनश्याम सक्सैना, जेके तिवारी तत्कालीन कार्यपालन यंत्री, बीके आरख अधीक्षण यंत्री, ज्ञानेश्वर उईके सीई, आरके मेहरा तत्कालीन ईएनसी, विजय वर्मा प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एसएस ठाकुर सहित अन्य के विरूद्व धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किए जाने का अनुरोध किया गया है। याचिका में आरोप है कि एक ठेकेदार को पीआईयू का पांच करोड़ का एक टेंडर स्वीकृत किया गया और इसी आधार पर उसे लोक निर्माण विभाग ने ढाई करोड़ से अधिक का काम बिना टेेंडर के दे दिया। इसमें ढाई करोड़ का घालमेल होने का आरोप लगाया गया है। 
अधिवक्ता राकेश नारायण के मुताबिक 20.अगस्त 2019 से पीआईयू पीडब्लूडी द्वारा एक टैंडर (निविदा) राशि 5,37, 17 लाख रूपये की जारी की जिसका निविदा अनुबंध ठेकेदार अरुण अग्रवाल के मध्य हुआ। पीआईयू के अधिकार क्षेत्र मे शासन द्वारा नवीन निर्माण कार्य कराये जाते तथा पी.डब्लू.डी. के अधिकार क्षेत्र में शासकीय प्राचीन निर्माण कार्यो में मॅटनेस का कार्य आवंटित 1 कराया जाता है। अनुबंध 18 / पी.आई.यू./18-19 दिनांक 10 सितंबर 2018 के तहत पी.आई.यू. के पत्र कं. 3490/अंके/पी.आई. यू. /2018-19 दिनांक 15 नवंबर 19 के द्वारा सम्भागीय परियोजना यंत्री पी.आई.यू. द्वारा कार्यपालन यंत्री को पत्र लिखा गया कि उपरोक्त निर्माण कार्य मोती लाल नेहरू महाविद्यालय भोपाल के 12 नं. क्लास रूम का निर्माण किया जा रहा है परन्तु यहां यह उल्लेख है कि इस अनुबंध के तहत 111.73 लाख रूपये का कार्य अनुपूरक सूची के अनुसार सम्पादित किया जा चुका है जबकि अनुबंध कं. 18/पी.आई.यू./18-19 ( विशेष मरम्मत) कराये जाने का कोई उल्लेख नहीं है तथा बी. 6 बंगले में विशेष मरम्मत का खर्च पी.डब्लू.डी. भोपाल के कार्यक्षेत्र में आता है जो कि पूूर्व से विभाजित हो और पीआईयू के कार्यक्षेत्र मे नवीन निर्माण कार्य आते हो के कारण पीआई यूके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। यह कि बीआईयू के परियोजना मंत्री द्वारा लिखे गये अनुलग्न ए-2 के तारतम्य में डिवीजन में पी.आई.यू. के कार्यपालन यंत्री के प्रभार में रहे एस.डी.ओ. देवेन्द्र सक्सेना ने अधीक्षण यंत्री पत्र कं. 666/ एस. ए.सी. / 2019 दिनांक 15 नवंबर 2019 द्वारा लेख किया कि मोती लाल विज्ञान महाविद्यालय परिसर में 12 नं. क्लास रूम का कार्य ठेकेदार सम्पादित किया जा रहा है। अरुण अग्रवाल द्वारा म.प्र. शासन के आदेश कं. 3404/डी/2019/19 को भोपाल द्वारा 18 नवंबर 19 द्वारा कुल राशि 195.63 लाख रूपये स्वीकृत प्राप्त हुयी है जो अनुलग्न ए-3 और दूसरी तरफ अनुलग्न ए-3 विषय मे उपरोक्त कार्य के कराये जाने की अनुमति प्रदान करने की बात की गई है जबकि अनुलग्न ए-2 के अनुसार उपरोक्त कार्य पूर्व में कराया जा चुका है। अनुलग्न ए-3 के अनुसार उपरोक्त बी. 6 में कार्य कराने की स्वीकृति 8 नवंबर 2019 को प्राप्त हुयी परन्तु फरियादी द्वारा सूचना के अधिकार के तहत निविदा क्रमांक 18/ पी.आई.यू./18-19 से सम्पादित सम्पूर्ण नस्ती की जानकारी चाहने पर उसे उपरोक्त दी गई जानकारी मे बी.6 बंगले मे15 अनुबंध क्रमांक 18/ पी.आई.यू./18-19 मे ऐसी कोई स्वीकृति प्राप्त नही हुयी जो पी.डब्लू.डी. के बी.6 में 195.63 लाख का कार्य अनुबंध के अलावा करने के लिये प्राधिकृत करता हो। जबकि एम.बी. बुक के पृष्ठ कं. 134 जो सूचना के अधिकार मे दी गयी जानकारी के पृष्ठ क्रं. 21 एवं 41 के अनुसार बाउचर क्रमांक- 51 ई-चैक क्रमांक- 565129 द्वारा 15070091 29 जून 2019 तथा बाउचर कमांक 565152 द्वारा 17 जुलाई 2019 को 41,78025/- राशि का भुगतान किया गया तथा किस हेड में उपरोक्त अदायगी की गई पेमेंट बाउचर में उल्लेख नही है जो अनुलग्न बी-01, बी-02 है। बी. 6 के बंगले मे कराया गया मरम्मत कार्य का भुगतान 19 जून 2019 में स्वीकृति के पूर्व ही 13,72,455 रूपये का भुगतान प्राप्त किया जिसकी फर्जी स्वीकृति खाना पूर्ति हेतु ए-2 व ए-3 के माध्यम से मांगी गयी जो एक कूटरचित व फर्जी कार्यवाही है।
यह कि उपरोक्त बंगले बी. 6 मे मेंटनेंस कार्य हेतु परियोजना संचालक द्वारा अनुबंध क्रमांक 18/पी.आई.यू. /18-19 दिनांक 10 सितंबर 2018 के तारतम्य मे अनुलग्न ए-4 का पत्र स्वीकृति हेतु 2 मार्च19 के अनुसार प्रमुख अभियंता को पत्र लिखकर स्वीकृति की सूचना दी कि म.प्र. शासन के पत्र क्रमांक 2257/2331/18-19 या 1 जून 2018 की कंडिका 2 के उप कंडिका द के तहत प्रदत्त शक्तियों के अनुक्रम मे यु..लो. वि. राजधानी परिक्षेत्र भोपाल द्वारा प्रस्तुत सिविल कार्य हेतु विशेष मरम्मत मद के अन्तर्गत स्वीकृत राशि रुपये 111 73 लाख रुपये कार्य कराये जाने की सहमति इस शर्त पर प्रदान की जाती है कि ठेका लागत के अधिक व्यय किसी भी दशा में न किया जाये। 
अनुबंध कार्य की लागत 10 प्रतिशत बढऩे पर मुख्य अभियंता से अनुशंसा का नियम :म.प्र. शासन के पत्र कं. ए-5/2257/2331/18-19 भोपाल 1 जून 2018 की कंडिका 2 की उपधारा द के अनुसार ऐसे प्रकरणों जहां अनुपूरक कार्यों (वेरिऐशन) समावेशन करने पर अनुबंधित कार्य की लागत 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ रही हो वहां मुख्य अभियंता की अनुशंसा पर प्रमुख अभियंता द्वारा अनुपूरक कार्यो (वेरिएशन) की स्वीकृति प्रदान की जायेगी इस स्वीकृति के समय भी यह ध्यान में रखा जाना आवश्यक हो कि वेरिएशन स्वीकृति के उपरांत कार्य की कुल लागत मूल स्वीकृति से 10 प्रतिशत से अधिक न हो अन्यथा की स्थिति में उपरोक्त क्रमांक- 01 पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है। डिपार्टमेंट प्रावधानों के अनुसार किसी भी कार्य पर प्रशासकीय स्वीकृति से 10 प्रतिशत अधिक तक का व्यय किया जा सकता है, इससे अधिक व्यय संभावित होने की स्थिति में पुनरिक्षित प्रशासकीय स्वीकृति लिये जाने के पश्चात् कार्य पर अतिरिक्त क्रय किया जा सकता हैं। पुनरिक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त करने हेतु सक्षम स्तर से पुनरिक्षित तकनीकी स्वीकृति जारी किया जाना आवश्यक है। घोटाला करने के प्रयोजन से जानबूझकर अपने अनुलग्न ए-4 में शासन के अनुलग्न ए-5 की कंडिका 02 (द) गलत उल्लेख किया कि उसे मरम्मत कार्य हेतु स्वीकृति प्रदान करने कीअधिकारिता हो जबकि कांडका 02 (द) नवीन कार्यों एवं वेरिएशन की स्थिति में 10 प्रतिशत से अधिक की लागत मूल से करने का अधिकार देती है, जिसे निविदा जारी करने वाले अधिकारी से 10 प्रतिशत अधिक राशि वेरिएशन होने की स्थिति व नवीन कार्यों के संबंध में अधिकार प्राप्त हो न कि मेंटेनेंस वर्क में जबकि परियोजना संचालक जिसका अधिकार परियोजना के संचालन तक सीमित है और निविदा क्रमांक-18/पी.आई.यू./18-19 तक परियोजना थी जिसके संबंध में क्रमांक-07 का अधिकार उक्त परियोजना की देखरेख तक सीमित था जबकि शासन के निर्देशानुसार ठेका लागत से 10 प्रतिशत राशि बढ़ाये जाने की शक्ति मुख्य अभियंता को प्राप्त है। ठेके की मूल लागत 537.17 लाख रुपये है, जिसकी 10 प्रतिशत राशि 53.70 लाख तक की मुख्य अभियंता को इजाफा करने का अधिकार है, जबकि बंगला कमांक- बी-6 के 195.66 लाख का कार्य कराया जाना बकाया है, जिसमें न तो कोई स्वीकृति शासन से प्राप्त है, और व ही उपरोक्त कार्य को कराने का क्रमांक एवं लगायत 09 को कोई अधिकार प्राप्त है। 
सुनियोजि तरीके से किया गोलमाल 

 बिना किसी विहित प्राधिकार के जानबूझकर अधिकारों का अतिक्रमण करते हुए सुनियोजित षडयंत्र के तहत बंगला कमांक बी-6 मेंटेनेंस कार्य करने का दिखावा करते हुए फर्जी स्वीकृति अधिकार क्षेत्र में न होते हुए भी प्रदान की तथा कार्य पूर्ण हो चुका दिखाकर फर्जी एम.बी. बुक बनाकर 111.73 लाख रुपये का भुगतान आरोपी क्रमांक-09 को किया गया तथा उपरोक्त राशि का भुगतान ऐसे कार्य के लिये किया गया जो वास्तव में हुआ ही नही और न ही उपरोक्त कार्य के लिये कोई निविदा आहुत की गई थी। निविदा क्रमांक-18/पी.आई.यू./18-19 में ही बंगला क्रमांक - बी- 15 एवं बी-216 स्थित चार इमली डिवीजन संभाग क्रमांक-02 में लघु मूल गौड कार्य (मेंटेनेंस) के नाम पर बिना किसी विहित प्राधिकार के फर्जी स्वीकृति अनुलग्न क्रमांक-ए-6 के द्वारा दी गई जबकि उक्त कार्य उल्लेख निविदा क्रमांक-18/पी.आई.यू./18-19 दिनांक-01/06/2018 में कहीं नही किया गया है। फर्जी स्वीकृति 55.65 लाख के कार्य कराने सुनियोजित षडयंत्र के तहत प्रदान की जाकर उपरोक्त बंगले क्रमांक - बी-15 एवं बी-16 में कार्य किया गया दिखाया जाकर फर्जी एम.बी-बुक तैयार की जाकर 13/06/2019 को बाउचर नंबर- 23 द्वारा ई चैक कमांक- 564625 द्वारा 52,39,044 लाख रुपये का भुगतान किया गया तथा 13 जनवरी 2020 को बाउचर कमांक 40 तथा ई चैक नंबर- 569620 द्वारा 3,24,284/- रुपये का भुगतान किया गया। इसी तरह 55 लाख का फर्जी कार्य कराने की अवैधानिक स्वीकृति दी जाने के बाद भी 55,63,328 रुपये का भुगतान किया गया।

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