Russia Ukraine War: यूक्रेन युद्ध में फिनलैंड और रूस के बीच बढ़ रही गहमागहमी, नाटो में एंट्री को लेकर सस्पेंस बरकरार: Latest News

Mariupol 1

ब्रिटेन और अमेरिकी इंटेलीजेंस एजेंसियों ने आखिरकार ये मान लिया है कि डोनबास में रूस (Russia) काफी बेहतर स्थिति में है. रूस को रोकना अब करीब करीब नामुमकिन है. इधर नाटो (NATO) चीफ ने भी ये कहकर यूक्रेन को झटका दे दिया है कि अगर जंग रोकनी है तो फिर यूक्रेन को अपनी जमीन का कुछ हिस्सा खोना ही होगा. लेकिन अब पहली बार चीन (China) ने अपने न्यूक्लियर वॉरफेयर को जस्टीफाई किया है. जंग के बीच यूक्रेन (Ukraine) ने बड़ा दावा किया है. यूक्रेन का दावा है कि उसकी फौज ने पूर्वी यूक्रेन की तरफ बढ रहे रूसी सैनिकों को रोक दिया है. यूक्रेन के हमले में बीते 24 घंटे में 18 रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं. लुहांस्क में रूसी सेना ने भीषण बमबारी शुरू की है. लुहांस्क के गर्वनर का दावा है कि 12 जून को रूस की तरफ से किए गए हमले में 3 नागरिकों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए हैं.

इधर इन सारे वॉर फ्रंट्स के बीच स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी सिपरी की न्यूक्लियर वॉरहेड्स को लेकर नई रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट में कहा गया कि कोल्ड वॉर के बाद पहली बार एटमी हथियार इस्तेमाल करने का रिस्क काफी बढ चुका है. इन सबके बीच फिनलैंड और रूस के बीच अदावत का नया चैप्टर खुल सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि फिनलैंड ने तय किया है कि वो अपने नए F-35 फाइटर प्लेंस को रूस के बॉर्डर के पास तैनात करेगा. फिनलैंड और रूस के बीच बड़ा बॉर्डर है. लेकिन आर्कटिक रीजन में रूस की नॉर्दन फ्लीट के सामने फिनलैंड की फायर पावर काफी कम है. फिनलैंड को इस बात का डर है. अगर रूस ने नॉर्दर्न बॉर्डर से अटैक कर दिया तो फिर बचाव कैसे होगा इसीलिए फिनलैंड अपनी नाटो मेंबरशिप वाली फाइल को जल्द से जल्द क्लियर करवाना चाहता है. ताकि किसी तरह नाटो का सपोर्ट मिल जाए. हालांकि रूस भी नाटो के इस प्लान से वाकिफ है. इसलिए आर्कटिक में रूस का एटमी जखीरा तैयार है.

फिनलैंड के एयरबेस पर हलचल

फिनलैंड के एयर बेस पर इस वक्त जबरदस्त हलचल है. ब्रिटेन और फिनलैंड के फाइटर प्लेन मिलकर आसमान की निगेहबानी कर रहे हैं. फिनलैंड के एफ-18 और रॉयल एयरफोर्स के टाइफून मिलकर वॉर ड्रिल्स करते नजर आए. ऐसा लगा जैसे किसी भी घुसपैठ का जवाब देने की पूरी तैयारी हो चुकी है. लेकिन जिस एयरबेस पर ये फाइटर प्लेन उन्हें लेकर फिनलैंड ने एक बडा फैसला लिया है. इसके जरिए आर्कटिक में रूस से डायरेक्ट पंगा लेने की तैयारी है. इस खबर के सामने आने के बाद आर्कटिक में तूफान से पहले की शांति दिखाई दे रही है क्योंकि फिनलैंड का लैपलैंड एयरबेस आर्कटिक सर्किल पर ही बना हुआ है. रोवानेमी शहर से सिर्फ सात किलोमीटर दूर है और फिनलैंड के फाइटर जेट्स के साथ सबसे ऊपर यानी नॉर्थ मोस्ट की तरफ बना हुआ बेस है.

तो नाटो की बढ़ जाएगी ताकत…

अमेरिका और फिनलैंड के बीच विमानों की खरीद का सौदा पहले से तय था. फिनलैंड ने अमेरिका से 64 F-35 खरीदने की डील दिसंबर में ही कर ली थी. लेकिन इस बीच फिनलैंड और स्वीडन ने नाटो में शामिल होने का फैसला किया था. इसी के बाद फिनलैंड की एयरफोर्स के चीफ का बड़ा बयान आया. एयरफोर्स चीफ ने कह दिया कि इन विमानों को लैपलैंड एयरबेस पर तैनात करेंगे. अब सवाल है कि आखिर इस डिप्लायमेंट का रूस की आर्कटिक फ्लीट के कौन कौन से हिस्से पर असर पड़ सकता है. बेरेंट्स ऑब्जर्वर की रिपोर्ट कहती है कि फिनलैंड के नाटो में शामिल होने के फैसले का मतलब ये है कि उत्तरी यूरोप में नाटो की हवाई ताकत में बड़ा इजाफा होगा. नॉर्वे के पास 34 एयरक्राफ्ट इवीन्स एयरबेस पर मौजूद हैं. ये विमान नाटो के लिए क्विक रिएक्शन अलर्ट मोड पर रहते हैं. लेकिन अगर नाटो के विमान लैपलैंड एयरबेस पर आ गए तो फिर आर्कटिक में रूस के एयरबेस तक कम वक्त तक पहुंच सकेंगे.

सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद

फिनलैंड की तरफ से बार-बार ऐसे सिग्नल दिए जा रहे हैं कि वो अपनी सिक्योरिटी को लेकर काफी फिक्रमंद है. खासतौर से जबसे पुतिन ने ये कह दिया कि रूस अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने के लिए कुछ भी करेगा. तबसे फिनलैंड और स्वीडन के लीडर्स को नींद नहीं आ रही. लेकिन इस वक्त नाटो की तरफ से जो संकेत मिल रहे हैं. वो फिनलैंड और स्वीडन के लिए मायूसी भरे हो सकते हैं. फिनलैंड की नाटो में एंट्री को लेकर सस्पेंस बरकरार है. नाटो चीफ जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि फिनलैंड और स्वीडन की मेंबरशिप को वीटो करने वाले तुर्की की चिंता जायज हैं. जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने ये तक कह दिया कि तुर्की ने जितने आतंकी हमले सहे, उतने किसी और नाटो मुल्क ने नहीं सहे. हैरानी की बात ये है कि फिनलैंड के राष्ट्रपति के सामने नाटो चीफ ने ये बयान दिया है. ये बात पूरी दुनिया को मालूम है कि तुर्की स्वीडन-फिनलैंड की नाटो सदस्यता के खिलाफ है.

यूक्रेन के जंगी मैदान मल्टीपल मिसाइल सिस्टम के हमले का वीडियो आया है. ये वीडियो रूस के रक्षा मंत्रालय ने जारी किया है. इसमें रूसी फौज स्मर्च मिसाइल सिस्टम के जरिए यूक्रेन के अलग-अलग ठिकानों को नेस्तनाबूद कर रही है. रूसी नेवी के दो फिग्रेट ने यूक्रेन के ठिकानों पर कैलिबर क्रूज मिसाइलों से हमला किया. ब्लैक सी में रशियन फिग्रेट आरएफएस एडमिरल एसन और आरएफएस एडमिरल माकारोव ने सिलसिलेवार अंदाज में कैलिबर मिसाइलें दागी हैं.

रूस ने बढ़ाए हमले

वहीं रूसी कब्जे वाले जेपोरिजिया ओब्लास्ट के मेलिटोपोल शहर में हुए एक जबरदस्त धमाके में 4 लोग घायल हो गए हैं. रूस की स्टेट न्यूज एजेंसी के मुताबिक पुलिस हेडक्वार्टर के पास विस्फोटक रखा गया था. भीषण जंग के बीच हथियारों की भारी कमी होने से हार का खतरा वाले यूक्रेन के बयान के बाद यूरोपीय देश मदद के लिए सक्रिय हो गए हैं. इटली ने होवित्जर तोप यूक्रेन के लिए रवाना कर दिया है. मारियुपोल के बंदरगाह पर रूसी फौज ने यूक्रेन के एक और मेटल शिप को अपने कंट्रोल में लिया. आपको बता दें कि ये यूक्रेन का तीसरा मेटल शिप है. जिस पर रूसी नेवी ने कब्जा किया है. एमनेस्टी इंटरनेशनल संगठन ने दावा किया है कि रूसी सेना ने युद्ध के नाम पर यूक्रेन में वॉर क्राइम किया. दावा ये भी कि रूस ने प्रतिबंधित कलस्टर बमों के जरिए यूक्रेन में सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतारा.

पुतिन के निशाने पर बाल्टिक देश!

इस बीच रूस के पूर्व प्रधानमंत्री का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि अगर यूक्रेन ये जंग हार गया तो फिर पुतिन के निशाने पर बाल्टिक देश होंगे. लिथुआनिया, एस्टोनिया और लात्विया पर रूस हमला कर सकता है. रूस के पूर्व प्रधानमंत्री के मुताबिक जंग खत्म करने के लिए यूक्रेन को जमीन गंवाने वाले प्रपोजल सही नहीं है. इनकी निंदा होनी चाहिए. इधर चाइना ने ताइवान को लेकर दो दिन में दो बड़े बयान दिए हैं. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ताइवान स्ट्रेट्स पर चीन का ही अधिकार है. चीन ने अमेरिका के इसे इंटरनेशनल वॉटर्स कहने वाले दावे को खारिज कर दिया है. कल ही चीन के रक्षा मंत्री ने अमेरिका को धमकी दी थी. कहा था कि अगर ताइवान के मामले में दखल दिया तो फिर आर-पार की जंग होगी..आखिरी सांस तक जंग लड़ेंगे.

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