दिल्ली-एनसीआर में खराब हवा पर SC ने फिर लगाई फटकार, दुनिया के इन देशों से सबक ले सकती है सरकारें: Latest News

Air Pollution

अब फिक्र एक और बड़े खतरे की. अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं तो ये खतरा और भी बड़ा है क्योंकि एक तरफ कोरोना के नए वेरिएंट का खौफ है तो दूसरी तरफ यहां प्रदूषण भी चरम पर है, लेकिन सांस पर जारी इस संकट के बीच देश ने राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना है.

आज का दिन इसलिए भी खास है कि 2 दिसंबर 1984 को भोपाल में यूनियन कार्बाइड कंपनी से जहरीली गैस का रिसाव हुआ. इस जहरीली गैस की चपेट में आकर हजारों लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे थे. गैस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के सम्मान में आज प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है. इसका मकसद प्रदूषण को फैलने से रोकना है

लेकिन क्या हमें आज राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाने का हक है. क्या वाकई हमने पिछले 36 सालों में प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई को गंभीरता से लिया है. आज भी भारत के बड़े-बड़े शहरों में हवा की क्वालिटी बेहद खराब है. दिल्ली-एनसीआर की हालत और भी खराब है. यहां के 7 करोड़ लोग मजबूरन गैस चेंबर में जिंदगी दांव पर लगाने के लिए मजूबर हैं. ये फिक्र इतनी बड़ी है कि सुप्रीम कोर्ट ने आज एक बार फिर प्रदूषण पर सरकारों को फटकार लगाई.

हवा की गुणवत्ता लगातार बेहद ‘खराब’

दिल्ली-एनसीआर की हवा की गुणवत्ता लगातार बेहद ‘खराब’ कैटेगरी में बनी हुई है. गुरुवार को दिल्ली के पूसा में AQI 505 तो मुंडका में 456 दर्ज किया गया. जबकि गाजियाबाद के लोनी में AQI 350, नोएडा के सेक्टर 62 में 483, ग्रेटर नोएडा में 310 और फरीदाबाद के न्यू इंडस्ट्रियल टाउन में ये 999 दर्ज किया गया है..

ये आंकड़े बेहद खतरनाक है. साफ है देश की राजधानी दिल्ली के साथ नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद में प्रदूषण लगातार कहर ढहा रहा है और ये सिलसिला दिवाली के पहले से जारी है. नवंबर के महीने में तो पिछले कई साल के रिकॉर्ड टूट गए हैं.

नवंबर में दिल्ली का औसतन एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 377 रहा, जबकि यही 2020 में 327 था. नवंबर, 2019 में भी औसतन AQI 312 था, यानी हर साल वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा. यही नहीं इस साल नवंबर के महीने में 11 दिन ऐसे रहे, जब वायु प्रदूषण चरम पर रहा. जबकि पिछले साल ये आंकड़ा 9 दिनों का था. 2019 में 7 और साल 2018 में सिर्फ 5 दिन ही ऐसे थे जब AQI सबसे खराब श्रेणी में रहे.

यही वजह रही है कि पिछले दो हफ्ते में प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान कई बार सुप्रीम कोर्ट का हंटर चला है. आज एक बार फिर जब प्रदूषण पर सुप्रीम सुनवाई हुई तो कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की और कड़े सवाल पूछे गए. आज की सुनवाई में साफ हो गया कि जब जिंदगी पर पॉल्यूशन भारी पड़ रहा है तब सरकारें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का इंतजार कर रही हैं.

आज सुप्रीम कोर्ट के तेवर इतने तल्ख हो गए कि उसने केंद्र और राज्य सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि हम 24 घंटे दे रहे हैं. प्रदूषण पर तुरंत कदम उठाएं. नहीं तो हम आदेश जारी करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से बेहद सख्त लहजे में पूछा कि जब बड़े लोग घर से काम कर रहे हैं, ऐसे में बच्चे सुबह धुंध में स्कूल क्यों जा रहे हैं?

सुप्रीम कोर्ट के तेवर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीजेआई एनवी रमणा ने सरकार से पूछा कि जब प्रदूषण बढ़ा है तो स्कूल क्यों खोला गया? सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्क फ्रॉम होम लागू किया, स्कूल बंद किए. लेकिन ये सब दिख ही नहीं रहा. कोर्ट ने कहा कि वो शुक्रवार सुबह फिर 10 बजकर 30 मिनट पर बैठेगा. अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिले तो आदेश पारित करेगा.

प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद दिल्ली में एक बार फिर कल से अगले आदेश तक सभी स्कूल बंद रहेंगे, लेकिन सवाल है कि आखिर सरकारें आम आदमी की सेहत को लेकर गंभीर क्यों नहीं हैं. आखिर सरकारें क्यों सिर्फ कोर्ट के आदेश का इंतजार करती हैं. प्रदूषण सिर्फ दिल्ली-एनसीआर ही नहीं पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है, लेकिन कई फ्रांस, नीदरलैंड्स जैसे कई देशों ने प्रदूषण को काबू करने में सफलता पाई. आज हमें इन देशों से भी सबक लेने की जरुरत है.

सख्त फैसलों और लोगों के सहयोग से दुनिया के कई शहरों ने प्रदूषण को काबू करने में बड़ी सफलता पाई. खासतौर से बैंकॉक मॉडल को प्रदूषण कम करने में सबसे कारगर माना गया है.

क्या है बैंकॉक मॉडल

करीब दो करोड़ की आबादी वाले बैंकॉक में एक समय प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन गया था. 2019 में यहां के हालात दिल्ली जैसे हो गए थे. स्कूल-कॉलेज बंद करने पड़े थे. इतना ही नहीं फैक्ट्रियों और उद्योग धंधों पर निगरानी रखने के लिए सेना की तैनाती करनी पड़ी थी, लेकिन लगातार बिगड़ते हालात को सुधारने के लिए थाइलैंड ने कड़े कदम उठाए.

पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियों पर रोक लगा दी गई. इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा दिया गया. सड़कों पर ट्रैफिक कम करने के लिए नहरों में नाव चलाकर ट्रांसपोर्ट के नए विकल्प तलाशे गए. इन फैसलों से बैंकॉक में प्रदूषण का लेवल काफी घट गया.

वैसे एशिया की तरह ही बढ़ते प्रदूषण से यूरोप भी अछूता नहीं रहा है. WHO की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में प्रदूषण के कारण 2019 में 3 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई.

पेरिस मॉडल

करीब 21 लाख की आबादी वाला पेरिस भी प्रदूषण का शिकार बना. पूरा शहर दमघोंटू हवा से घुट रहा था, लेकिन फ्रांस की सरकार ने आनन फानन में तीन सख्त फैसले लिए.

सबसे पहले पेरिस में वीकेंड पर कार से ट्रैवल करने पर रोक लगा दी गई. पूरे शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को फ्री कर दिया गया. साथ ही कार और बाइक शेयरिंग को बढ़ावा दिया गया. इन फैसलों को कड़ाई से लागू करने पर पेरिस में प्रदूषण का ग्राफ तीजे से नीचे गिरा.

एम्सटर्डम मॉडल

यूरोपीय देश नीदरलैंड्स भी 2015 में प्रदूषण की चपेट में आया. राजजधानी एम्सटर्डम में हवा की क्वालिटी लगातार बिगड़ने लगी. इसके बाद यहां की सरकार और लोगों ने प्रदूषण से निपटने के लिए तेजी से काम किया.

एम्सटर्डम में आने-जाने के लिए लोग ज्यादातर साइकिल का उपयोग करने लगे. फैसला लिया गया कि 2025 के बाद सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ियां ही बिकेंगी और 2030 तक पूरे देश में पेट्रोल-डीजल से चलने वाली सभी गाड़ियों पर रोक लगा दी जाएगी. बढ़ते प्रदूषण को लेकर नीदरलैंड्स ने बेहद संवेदनशीलता दिखाई और समय से प्रदूषण को नियंत्रित करने में सफल रहा.

ज्यूरिख मॉडल

एम्सटर्डम की तरह ही नॉर्थ स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख शहर में भी प्रदूषण कम करने का अनोखा तरीका खोजा गया है. स्विट्जरलैंड में पार्किंग पर भारी भरकम फीस लगा दी गई. ये भी तय किया गया कि एक समय में शहर की सड़कों पर तय संख्ता में ही कारें होंगी. कई इलाकों को कार फ्री जोन घोषित कर दिया गया है.

इसी तरह कोपनहेगन मॉडल के जरिएउत्तरी यूरोप में डेनमार्क के लोग भी प्रदूषण को लेकर बेहद जागरूक हैं. यहां कार की जगह सूट-बूट पहने लोग भी साइकिल चलाकर दफ्तर जाते हैं. राजधानी कोपनहेगन में लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना ज्यादा पसंद करते हैं. इस शहर ने 2025 तक कार्बन उत्सर्जन घटाकर 0% तक ले जाने का लक्ष्य रखा है.

बीते एक दशक में ही इन शहरों ने तेजी से प्रदूषण का दंश झेला और कड़े फैसले लेकर प्रदूषण नियंत्रित करने में भी सफल रहे. ऐसे में जहरीली हवा से जूझ रही दिल्ली के लिए फ्रांस समेत कई देशों के ये फैसले मॉडल हो सकते हैं.

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PRAJA PARKHI: दिल्ली-एनसीआर में खराब हवा पर SC ने फिर लगाई फटकार, दुनिया के इन देशों से सबक ले सकती है सरकारें: Latest News
दिल्ली-एनसीआर में खराब हवा पर SC ने फिर लगाई फटकार, दुनिया के इन देशों से सबक ले सकती है सरकारें: Latest News
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