काशी विश्वनाथ मंदिर की भव्यता देख बौखला गया था मुगल शासक शाहजहां, जानिए क्या कहता है इतिहास: Latest News

Kashi

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर देश की आध्यात्मिक चेतना का कॉरिडोर रहा है, जो अपने आततायी अतीत को सुधारने की ओर बढ़ा है. सदियों की आध्यात्मिक विरासत का कायाकल्प हुआ है और इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि एक हज़ार साल के अन्याय का प्रतिकार बिना किसी ध्वन्स के सिर्फ़ सृजन के ज़रिए हुआ है.

कहते हैं कि ग्यारहवीं शताब्दी तक काशी विश्वनाथ मंदिर की शक्ल ऐसी ही थी, जैसी आज बनाई गई है. काशी विश्वनाथ सिर्फ़ एक मंदिर नहीं बल्कि मंदिरों का संकुल था. मंदिर परिसर के चारों तरफ़ कॉरिडोर की शक्ल में कक्ष थे, जहां संस्कृत, तंत्र और आध्यात्म की शिक्षा दी जाती थी. विद्यार्थी यहीं रहकर धर्म और दर्शन की शिक्षा लेते थे. सत्रहवीं शताब्दी में मुगल शासक औरंगजेब ने इस मंदिर संकुल को तोड़ने का आदेश इसलिए दिया कि उसका बाग़ी भाई दारा शिकोह यहां संस्कृत पढ़ता था. दारा शिकोह ने औरंगजेब और इस्लाम से बग़ावत की थी. आगे भी हम इसका ज़िक्र करेंगे लेकिन पहले आपको शुरुआत से काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास बता देते हैं.

सबसे पहले इस मंदिर के टूटने का उल्लेख 1034 ईस्वी में मिलता है. 11वीं सदी में राजा हरिश्चंद्र ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया. 1194 में मुस्लिम आक्रमणकारी शहाबुद्दीन गोरी ने इसे लूटने के बाद तोड़ा. स्थानीय लोगों ने मंदिर को फिर से बनवाया. 1447 में जौनपुर के सुल्तान ने इसे फिर से तोड़ दिया. इसके बाद अकबर की सर्वसमावेशी नीति के चलते टोडरमल ने 1585 में काशी विश्वनाथ मंदिर का फिर से जीर्णोद्धार करवाया.

मतलब काशी विश्वनाथ मंदिर के टूटने बनने का सिलसिला जारी रहा. 16वीं सदी में बाबा विश्वनाथ के भव्य मंदिर को देखकर मुगल शासक शाहजहां को जलन होने लगी. 1632 में शाहजहां ने इसे तोड़ने का आदेश दिया, सेना भेज दी, संघर्ष हुआ, लेकिन काशी के लोगों की एक जुटता के आगे मुग़ल सेना को वापस लौटना पड़ा. हालांकि इस संघर्ष में काशी के 63 मंदिर तोड़ दिए गए. शाहजहां के विफल रहने के बाद औरंगजेब ने 18 अप्रैल, 1669 को काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया. एक दीवार को छोड़कर समूचा मंदिर गिरा दिया गया औरं गजेब के आदेश पर यहां ज्ञानवापी मस्जिद बनाई गई यानी तब मस्जिद बड़ी हो गई और मंदिर छोटा. तब किसी तरह पंडितों ने परिसर के हिस्से में मंदिर का अस्तित्व बनाए रखा और मंदिर के पुनर्निर्माण का संघर्ष भी जारी रहा.

अहिल्याबाई ने मंदिर तो बनवा दिया, पर वो उसका पुराना वैभव नहीं लौटा पाईं

1752 से लेकर 1780 तक मराठा सरदार दत्ता जी सिंधिया और मल्हारराव होल्कर ने मंदिर मुक्ति के प्रयास किए, लेकिन 1777 और 80 के बीच इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर को मंदिर पुनर्निमाण में सफलता मिली. अहिल्याबाई ने मंदिर तो बनवा दिया पर वो उसका पुराना वैभव और गौरव नहीं लौटा पाईं 1836 में महाराजा रणजीत सिंह ने इसके शिखर को स्वर्ण मंडित कराया.

अब काशी विश्वनाथ मंदिर को भव्य आधुनिक रूप देने का काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया है. औरंगजेब के समय विश्वनाथ मंदिर परिसर से दूर हो गए ज्ञानवापी कूप और विशाल नंदी को एक बार फिर विश्वनाथ मंदिर परिसर में शामिल कर लिया गया है. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर श्रद्धालुओं को अपनी दिव्यता और भव्यता का एहसास कराने के लिए तैयार है.

फारुक अब्दुल्ला ने बोला हमला

प्रधानमंत्री ने सही कहा जब जब कोई औरंगजेब आया, तो उसके सामने शिवाजी हुए, सालार मसूद को राजा सुहेलदेव ने टक्कर दी. प्रधानमंत्री के संबोधन में आज सर्वधर्म का भाव था, लेकिन कुछ नेताओं ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया. जिस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी में थे उसी दौरान दिल्ली में संसद के बाहर .जम्मू कश्मीर के फॉर्मर चीफ मिनिस्टर डॉ. फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि ये ठीक है प्रधानमंत्री कॉरिडोर का इनॉगरेशन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि वो किसी एक धर्म नहीं, बल्कि सभी धर्मों के प्रधानमंत्री हैं.

फारुक अब्दुल्ला की बातों पर सिर्फ एक धर्म का प्रधानमंत्री होने के आरोप पर नरेंद्र मोदी ने जवाब काशी से दिया. कॉशी कॉरिडोर से प्रधानमंत्री ने साफ साफ कहा कि काशी किसी एक धर्म विशेष की कर्मभूमि नहीं रही, बल्कि यहां से तो बुद्ध और जैन धर्म से लेकर सिख धर्म का भी गहरा रिश्ता रहा है. प्रधानमंत्री ने आज जैन तीर्थंकरों के साथ भगवान बुद्ध का नाम लिया. काशी से गुरु नानक देव का संबंध भी समझाया. नरेंद्र मोदी ने बताया कि वो सिर्फ हिंदू नहीं, बल्कि दूसरे धर्मों के भी प्रधानमंत्री हैं.

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PRAJA PARKHI: काशी विश्वनाथ मंदिर की भव्यता देख बौखला गया था मुगल शासक शाहजहां, जानिए क्या कहता है इतिहास: Latest News
काशी विश्वनाथ मंदिर की भव्यता देख बौखला गया था मुगल शासक शाहजहां, जानिए क्या कहता है इतिहास: Latest News
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