भारत का वो बिलियर्डस खिलाड़ी जिसने विश्व विजेता बनना सिखाया, दो बार पूरी दुनिया में मचाई धूम, अब यादों में नहीं मिलता जिक्र: Latest News

Wilson Jones

भारत में बिलियर्ड्स (Billiards) ऐसा खेल है जो बहुत कम ही चर्चा में रहता है. इस खेल में सुर्खियां बनाने वाले कुछ ही खिलाड़ी हैं जिसमें पंकज आडवाणी का नाम सबसे आगे रहता है. पंकज इस खेल के महारथी हैं. भारत में जब भी बिलियर्डस का जिक्र होता है तो पंकज का नाम सबसे पहले आता है, लेकिन एक खिलाड़ी ऐसा रहा है जिसने इस खेल में भारत को बेहतरीन सफलता दिलाई और इतिहास रचा, लेकिन शायद ही कोई हो जिसे उनके बारे में पता है. उस खिलाड़ी का नाम है विल्सन जोंस (Wilson Jones). विल्सन भारत को पहले बिलियर्डस खिलाड़ी है जिसने देश को पहली बार इस खेल में विश्व विजेता बनाया था. ‘गुजरे जमाने का गौरव’ सीरीज में आज बात उन्हीं विल्सन की.

विल्सन को शुरू से ही खेलने में दिलचस्पी थी. वह हॉकी और क्रिकेट भी खेला करते थे. शुरुआत में वह बिलियर्डस को जानते तक नहीं थे. 17 साल की उम्र में विल्सन ने पहली बार बिलियर्डस टेबल देखी थी. उन्होंने 18 साल की उम्र में बिलियर्डस खेलना शुरू किया. वहां से जब उन्होंने खेल की बारीकियां सीखनी शुरू की तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. वह इस खेल में ऐसी शोहरत हासिल कर गए और ऐसा काम कर गए जो इतिहास के पन्नों में दर्ज है. वह उस समय एक फैक्ट्री में काम करते थे. वह सुबह काम करते थे और शाम को बिलियर्डस खेलते थे. वहीं अगर उनकी नाइट शिफ्ट होती थी तो वह दिन में बिलियर्डस खेलते थे.

नेशनल चैंपियनशिप में दिखाया जलवा

विल्सन ने 1949 में पहली बार राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में कदम रखा था लेकिन वह दिग्गज खिलाड़ी टी. जे. सेल्वाराज से हार गए थे. विल्सन को हालांकि अपना पहला नेशनल खिताब जीतने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा. वह अगले साल ही नेशनल चैंपियन बन गए. वो भी सेल्वाराज को मात देकर. विल्सन ने फाइनल में सेल्वाराज को 2522-2450 के अंतर से मात दी. यहां से विल्सन ने नेशनल चैंपियनशिप में अलग ही खेल दिखाया और वह 12 बार बिलियर्डस में नेशनल चैंपियन बने वहीं पांच बार स्नूकर में उन्होंने नेशनल चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया.

नेशनल चैंपियन से विश्व चैंपियन

नेशनल चैंपियनशिप में लगातार सफलता के कारण उन्हें विश्व चैंपियनशिप में खेलना का मौका मिला. उन्होंने पहली बार 1951 में नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया. इस चैंपियनशिप में उन्हें सफलता नहीं मिली और वह सिर्फ एक मैच ही अपने नाम कर सके. 1952 में कोलकाता (उस समय कलकत्ता) में विश्व चैंपियनशिप का आयोजन किया गया जिसके लिए विल्सन ने क्वालीफाई किया. यहां वह जीत के दावेदार के रूप में उतरे थे. इस चैंपियनशिप में वह सिर्फ एक मैच जीत सके, लेकिन वह अपने खेल से सभी को प्रभावित जरूर कर रहे थे. घर में मिली इस हार ने विल्सन को काफी दुख दिया था और वह हताश थे. 1954 में भी वह विश्व चैंपियनशिप में जीत नहीं सके. 1958 में विल्सन ने कलकत्ता में अपनी चौथी विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लिया. यह विश्व चैंपियनशिप में कलकत्ता में खेली गई थी.

इस बार विल्सन ने कड़ा अभ्यास किया. इस बार उन्होंने दमदार प्रदर्शन किया और अपने सभी मैच जीते. उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा मिली अपने कड़े प्रतिद्वंदी जो पहले की विश्व चैंपियनशिप में उन्हें हराते हुए आए थे-लेजली ड्रिफफील्ड से. लेजली ने खिताबी मुकाबले में बढ़त ले ली थी लेकिन विल्सन ने शानदार वापसी करते हुए उन्हें मात दी और पहली बार विश्व चैंपियनशिप जीतने वाले भारत के बिलियर्डस खिलाड़ी बने.

दूसरी बार बने विश्व विजेता

1962 में विश्व चैंपियनशिप का आयोजन ऑस्ट्रेलिया में हुआ था. इस बार भी विल्सन ने दमदार खेल दिखाया और फाइनल में जगह बनाई लेकिन वह हार गए. 1964 में न्यूजीलैंड विश्व चैंपियनशिप की मेजबानी कर रहा था. यहां प्रतिस्पर्धा काफी रोचक थी. कई दिग्गज इसमें खेल रहे थे. इस बार फिर विल्सन ने दमदार खेल दिखाया और सभी नौ मैच आसानी से जीत लिए और विश्व विजेता बनकर भारत लौटे. यह उनकी आखिरी विश्व चैंपियनशिप थी. उन्होंने हालांकि 1967 में नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था और जीते भी थे. इसके बाद से उन्होंने खेल को अलविदा कह दिया.

विल्सन ने फिर कोचिंग भी की और ओम अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल और अशोक शांडिल्य जैसे खिलाड़ियों को कोचिंग दी, 1962 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड, 1965 में पद्म श्री और 1996 में द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. 2003 में हर्ट अटैक से उनका निधन हो गया. भारत को कई शानदार उपलब्धियां दिलाने के बाद भी विल्सन का नाम बहुत ही कम लोगों को याद होगा.

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PRAJA PARKHI: भारत का वो बिलियर्डस खिलाड़ी जिसने विश्व विजेता बनना सिखाया, दो बार पूरी दुनिया में मचाई धूम, अब यादों में नहीं मिलता जिक्र: Latest News
भारत का वो बिलियर्डस खिलाड़ी जिसने विश्व विजेता बनना सिखाया, दो बार पूरी दुनिया में मचाई धूम, अब यादों में नहीं मिलता जिक्र: Latest News
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