EXCLUSIVE: दिल्‍ली की जहरीली हवा का जिम्‍मेदार कौन? 7 घंटे की पड़ताल में जानें गैस चैंबर में तब्‍दील हुए इलाकों का हाल: Latest News

Delhi Pollution

दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) की पांच करोड़ की आबादी साफ हवा के लिए हर पल संघर्ष कर रही है. आसमान को धुंध की चादर ने ढक दिया है. विजिबिलिटी कई जगहों पर 25 मीटर तक पहुंच गई है. कई लोग जब आज सुबह उठे तो उनके गले में जलन थी और आंखों से पानी आ रहा था. सांस लेने में तकलीफ हो रही है.

यकीनन इस दमघोंटू संघर्ष के लिए पटाखे जिम्मेदार हैं. दिल्ली में पटाखों पर बैन था, बावजूद इसके दिवाली पर जमकर आतिशबाजी हुई. ऐसा लगा जैसे दिल्ली-एनसीआर में पॉल्यूशन रोकने में जुटी सरकारी एजेंसियां पॉल्यूशन के खिलाफ लड़ाई हार गई है. दिवाली की रात सरकार के सारे प्रयास बेनतीजा नजर आए. ऐसे में TV9 भारतवर्ष ने भी दिवाली की रात से आज सुबह तक दिल्ली-एनसीआर के अलग अलग इलाकों में प्रदूषण के स्तर की पड़ताल की और जो देखा वो हैरान और परेशान कर देने वाला था. ऐसा लग रहा है जैसे देश की राजधानी गैस चैंबर में तब्दील हो गई हो है.

आखिर दिल्ली और एनसीआर में बैन के बावजूद गुरुवार की रात जमकर पटाखे फूटे. नतीजा ये हुआ कि पहले से ही खराब चल रही हवा और भी दमघोंटू होती चली गई और पटाखों के शोर में तमाम आदेशों की धज्जियां उड़ गईं. जैसे-जैसे घड़ी की सुई आगे बढ़ती गई, रात बीतने लगी, दिल्ली और एनसीआर में धुंध की मोटी चादर छा गई. बड़ी इमारतें भी धुंध की चादर में ढंक गईं.

TV9 भारतवर्ष की पड़ताल

लोधी रोड, उद्योग भवन, गोल डाक खाना, जनपथ, आईटीओ, मथुरा रोड समेत दिल्ली के तमाम अहम इलाकों में लोगों को घुटन महसूस होने लगी. प्रदूषण रोकने वाली तमाम अथॉरिटी के आदेश के बावजूद ये सबकुछ हुआ. सांसों पर संकट छा गया. जो हर साल होता आया है. ऐसे में TV9 भारतवर्ष के रिपोर्टर भी दिवाली की रात में दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाके में निकले. ताकी आपको दिल्ली में बढ़े जानलेवा प्रदूषण का मीटर और उसका सीधा असर दिखा सकें. शुरुआत रात 11 बजकर 11 मिनट पर हुई. इलाका था जंतर मंतर.

रात 11 बजे ही ऐसा लगा जैसे देश की राजधानी गैस चैंबर में तब्दील हो गई. अब TV9 भारतवर्ष की प्रदूषण के स्तर की पड़ताल जंतर मंतर से लोधी रोड पहुंची. लोधी रोड दिल्ली के बेहद पॉश माने जाने वाले इलाकों में एक है. लेकिन यहां के हालात और बदतर थे. यहां से आगे बढ़ते ही जो दिखा वो और भी हैरान और परेशान कर देने वाला था. रात एक बजे अचानक दिल्ली के उद्योग भवन इलाके में जहां एक तरफ प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया तो वहीं दूसरी ओर विज़िबिलिटी पर भी असर दिखने लगा. सिर्फ 100 मीटर दूर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था.

देर रात दो बजे तक दिल्ली की हवा बेहद जहरीली हो गई और आईटीओ से लक्ष्मी नगर जाने वाली सड़क पर विज़िबिलिटी घटकर 50 मीटर रह गई. यहां पास से गुजरती गाड़ियां तक नजर नहीं आ रही थी. सुबह होते ही दिल्ली-एनसीआर की हवा में घुली जहर का असर और साफ साफ दिखने लगा. सुबह होते ही TV9 भारतवर्ष की दिल्ली में प्रदूषण के स्तर की पड़ताल का अगला पड़ाव विजय चौक बना. जहां से चंद कदमों की दूरी पर नॉर्थ और साउथ ब्लॉक है. विशाल और भव्य राष्ट्रपति भवन हैं. लेकिन दमघोंटू धुंध के चलते यहां ना नॉर्थ और साउथ ब्लॉक दिख रहा था. ना ही राष्ट्रपति और संसद भवन.

आतिशबाजी के सामने धरी रह गईं तमाम पाबंदियां

7 घंटे की पड़ताल में स्थिति साफ हो गई थी. दिल्ली-एनसीआर में सभी पाबंदियां धरी रह गई और पटाखों ने दिल्ली-एनसीआर की हवा के स्तर को SEVERE की कैटेगरी में पहुंचा दिया. अब हमारी पड़ताल का आखिरी पड़ाव अक्षरधाम का इलाका था. जहां विजिबिलिटी काफी कम होने के चलते लोग गाड़ियों की लाइट जलाकर सफर कर रहे थे.

चूंकि प्रदूषण की बात होते ही बात एयर क्वालिटी इंडेक्स, पीएम 2.5 और पीएम 10 की होती है. इसलिए आज आपके लिए ये जानना जरूरी है कि ये क्या है? और उसका पैमाना क्या है? सबसे पहले जानिए AQI के बारे में. दरअसल, AQI का पैमाना शून्य से 500 के बीच मापा जाता है. 0 से 50 के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक को अच्छा माना जाता है. इस स्तर पर प्रदूषण का सबसे कम प्रभाव होता है. दूसरा है 51 से 100 जो संतोषजनक माना जाता है. इस स्थिति में पहले से बीमार को सांस लेने में तकलीफ होती है.

तीसरा स्तर है 101 से 200 जो मध्यम या मॉडरेट माना जाता है. इसमें फेफड़े, अस्थमा और हृदय रोगियों को बेचैनी होती है. चौथा स्टेज हैं 201 से 300 AQI जिसे खराब माना जाता है. इस स्टेज में ज्यादातर लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है. पांचवां स्टेज है 301 से 400 AQI, इस स्तर पर हवा को बेहद खराब माना जाता है. लंबे समय तक रहने पर सांस की बीमारी होती है. दिल्ली फिलहाल इसी स्थिति में है. और आखिरी स्टेज है 401 से 500 AQI, इसे खतरनाक कहा जाता है. इसमें स्वस्थ लोगों को भी नुकसान होता है.

चूंकि दिल्ली-एनसीआर में सांस पर संकट पटाखे की वजह से आई है इसलिए आपके लिए ये जानना जरूरी है कि एक फुलझड़ी आपकी और आपके बच्चे का कितना जीवन कम कर देती है. एक अनार और एक लड़ी किस कदर बीमार कर देती है.

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