Bahubali: 6 AK-47 और 400 गोलियां! जब जेल में बैठे-बैठे ही मुख्तार ने कृष्णानंद राय का खेल खत्म कर दिया: Latest News

Mukhtar Ansari

अमेरिका में ट्विन टावर पर दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला होने वाला था. लेकिन किसी को इसका अंदाज़ा नहीं था ठीक वैसे ही जैसे देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में वो घटना, जिसे पूर्वांचल की सबसे ख़तरनाक घटना माना जाता है. गैंगस्टर मुख़्तार अंसारी को घेरकर उस पर सरेआम गोलियां बरसाई गईं.

15 जुलाई 2001 मुख़्तार अंसारी के इलाके में घुसकर उस पर जानलेवा हमला हुआ. मोहम्मदाबाद के उसरी चट्टी इलाके में उस दिन मुख़्तार अपने काफ़िले के साथ निकला. गैंगवार में होने वाले हमलों को लेकर मुख़्तार हमेशा सतर्क रहता था. मुख़बिरी की आशंका में वो रास्ते में अपनी गाड़ी बदल लेता था. 15 जुलाई 2001 को भी उसने ऐसा ही किया. जिस गाड़ी में बैठकर वो घर से निकला था, रास्ते में उसने गाड़ी बदल ली. उसके काफ़िले में शामिल ज़्यादातर गाड़ियों का नंबर 0786 था. फिर भी मुख़बिरी पक्की निकली और मुख़्तार जिस गाड़ी में जा रहा था, रास्ते में उसे घेर लिया गया.

गैंगस्टर मुख़्तार पर बरसी गोलियां

मुख़्तार अंसारी की गाड़ी को रेलवे फाटक के बीच रोक लिया गया. उसकी गाड़ी के आगे खड़े ट्रक से कुछ लोग निकले और अंधाधुंध फायरिंग करने लगे. मुख़्तार गाड़ी से उतरा और राइफल लेकर उसने भी मोर्चा संभाल लिया. हमलावरों ने मुख़्तार के एक गनर को मार गिराया. शूटआउट में मुख़्तार ने भी एक हमलावर की हत्या कर दी. अपने ऊपर हुए पहले शूटआउट में मुख़्तार किसी तरह बच गया.

पूर्वांचल के सबसे बड़े गैंगस्टर मुख़्तार पर जानलेवा हमले वाली घटना ने यूपी में खलबली मचा दी. हमले का इल्ज़ाम बीजेपी नेता कृष्णानंद राय पर लगा. सबको इस बात का एहसास था कि गैंगस्टर से बाहुबली विधायक बन चुका मुख़्तार बदला ज़रूर लेगा. लेकिन, वो बदला कैसा होगा, इसका किसी को अंदाज़ा नहीं था.

मुख़्तार तक ख़बर पहुंची कि बीजेपी नेता कृष्णानंद राय के इशारे पर गैंगस्टर बृजेश सिंह ने हमला किया था. इतनी बड़ी घटना के बाद बृजेश अंडरग्राउंड हो गया. 15 जुलाई 2001 के बाद पूर्वांचल में गैंगवार की दुनिया में ज़्यादा उथल-पुथल नहीं हुई, क्योंकि चुनाव क़रीब आ रहे थे. 2002 के विधानसभा चुनाव में मुख़्तार और बृजेश दोनों ने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया.

क्योंकि, बृजेश को राजनीतिक संरक्षण देने वाले कृष्णानंद राय ने मुख़्तार के भाई अफ़ज़ाल के ख़िलाफ़ मोहम्मदाबाद से पर्चा भर दिया था. पूरे चुनाव में गैंगस्टर बृजेश ने कृष्णानंद राय के चुनाव अभियान का भरपूर समर्थन किया. 2002 में गाज़ीपुर की मोहम्मदाबाद सीट पर कृष्णानंद ने मुख़्तार के भाई और पांच बार के विधायक अफ़ज़ाल अंसारी को हरा दिया.

दो साल में लगे दो झटके

दो साल में मुख़्तार को दो बड़े झटके लग चुके थे. पहले 2001 में जानलेवा हमला और उसके बाद भाई की चुनावी हार. लेकिन, इसी चुनाव में मुख़्तार अंसारी ने मऊ सदर से निर्दलीय पर्चा भरा और जीत गया. फिर भी उसके दिलो-दिमाग़ में दिन-रात यही ख़्याल चल रहा था कि भाई की हार और अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले का बदला कैसे लिया जाए. गैंगस्टर मुख़्तार ने इन दोनों घटनाओं के पीछे बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय का हाथ माना. इसलिए, उसने बृजेश सिंह और कृष्णानंद को बर्बाद करने की तमाम कोशिशें शुरू कर दीं.

मुख़्तार अंसारी ने सबसे पहले उस शख़्स की पहचान की, जिसने उस पर गोली चलाई थी. वो था गैंगस्टर बृजेश के गुरु त्रिभुवन का भाई अनिल सिंह. 2003 में वो बीएसपी से ज़िला पंचायत सदस्य बना. मुख़्तार गैंग ने गाज़ीपुर के सैदपुर में सरेबाज़ार बीएसपी के ज़िला पंचायत सदस्य अनिल सिंह समेत तीन लोगों की हत्या कर दी.

ठेकों में नहीं था कोई चुनौती देने वाला

सैदपुर बाज़ार में तिहरे हत्याकांड का संदेश साफ था. मुख़्तार शायद ये बताना चाहता था कि वो अपने दुश्मनों को उन्हीं के इलाके में जाकर मारेगा. ये संदेश बृजेश, उसके गैंग और कृष्णानंद राय का समर्थन करने वालों के लिए था. हालांकि, बृजेश का कोई अता-पता नहीं था, इसलिए, मुख़्तार बेख़ौफ़ होकर अपने गुनाहों का खौफ और बाहुबल का जाल फैलाता चला गया. पूर्वांचल के करीब 5 ज़िलों में लगभग आधे से ज़्यादा सरकारी ठेकों में उसे चुनौती देने वाला कोई नहीं बचा. क्योंकि, अब मुख़्तार के गैंग में एक ऐसा शख़्स आ चुका था, जो बृजेश सिंह की तरह ही बेख़ौफ़ और सबसे दुर्दांत शूटर था नाम था मुन्ना बजरंगी.

यूपी का सबसे खतरनाक हत्याकांड

2003 से 2005 के बीच बृजेश के सक्रिय ना होने की वजह से मुख़्तार पूर्वांचल का सबसे बड़ा गैंग लीडर बन गया. लेकिन, उसका बदला अभी पूरा नहीं हुआ था. वो बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय से बदला लेना चाहता था, क्योंकि वो कृष्णानंद को ही अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले का मास्टरमाइंड मानता था. दुश्मनी सबसे बड़े बदले का मौक़ा तलाश रही थी.

मौक़ा बीजेपी के दबंग विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का. लेकिन, तमाम कोशिशों के बावजूद गैंगस्टर मुख़्तार बदला लेने में कामयाब नहीं हो पा रहा था. फिर अचानक वो मौक़ा आ गया. या यूं कहें कि वो मौक़ा आया नहीं बल्कि प्लान किया गया. कृष्णानंद राय की हत्या के लिए एक ऐसे शूटआउट की साज़िश रची गई, जो आज भी यूपी को दहलाने वाला सबसे ख़ूंख़ार हमला माना जाता है.

पुलिस के मुताबिक मोहम्मदाबाद से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या की साज़िश को लेकर मुख़्तार अंसारी और उसके गैंग ने पूरी तैयारी कर ली थी. लेकिन, वो हत्याकांड को अंजाम दे पाता, इससे पहले मुख़्तार की राजनीतिक रणभूमि मऊ में सांप्रदायिक हिंसा फैल गई. एक स्थानीय युवक की हत्या के बाद मऊ में आगज़नी और हंगामा होने लगा.

हिंसा के बीच जिप्सी से पहुंचा मुख्तार

हिंसा की आग के बीच गैंगस्टर और बाहुबली विधायक मुख़्तार अंसारी मऊ पहुंचा. सफेद रंग की खुली जिप्सी, जिप्सी की छत पर चश्मा लगाए गैंगस्टर मुख़्तार लोगों की ओर देखते हुए दोनों हाथ हिलाकर उन्हें कुछ समझाता हुआ. साथ में जिप्सी पर हथियारों से लैस पुलिसवाले. ऐसी तस्वीरें अफ़गानिस्तान के उन कबीलों की याद दिलाती हैं. जहां दबंग और खूंखार तालिबानी हथियारों के साथ गाड़ी की छत पर खौफ़ फैलाने का सफ़र तय करते हैं.

मऊ सदर का विधायक और गैंगस्टर मुख़्तार हिंसा के दौर में बेख़ौफ़ होकर अपनी खुली जिप्सी की छत पर घूमता रहा. रास्ते में गश्त लगाती पुलिस की गाड़ियां भी मिलीं, लेकिन बाहुबली को रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई. मुख़्तार शायद ये सोच रहा था कि वो कानून से ऊपर है. लेकिन, कानून ने उसे अपनी ताक़त दिखा दी.

25 अक्टूबर 2005 को विधायक और गैंगस्टर मुख़्तार अंसारी को मऊ दंगे में सरेंडर करना पड़ा. उस पर हिंसा भड़काने का आरोप था. अदालत ने जिप्सी पर खुलेआम घूमने वाले मुख़्तार को सीधे जेल भेज दिया. कहते हैं मुख़्तार ने ख़ुद सरेंडर किया था, क्योंकि वो जेल से बैठकर अपना सबसे बड़ा बदला लेना चाहता था. मुख़्तार अक्टूबर में जेल गया और नवंबर में गाज़ीपुर समेत पूरा यूपी 400 गोलियों की गूंज से दहल उठा.

मुख़्तार का सबसे खूंखार बदला

पूर्वांचल का सबसे बड़ा गैंगस्टर मुख़्तार अंसारी जब भी अदालतों में अपने गुनाहों का हिसाब-किताब देने आता, तो पुलिस के पहरे में पेशी के दौरान वो गैंगस्टर से ज़्यादा बाहुबली नेता की भूमिका में नज़र आता. बहरहाल, मऊ दंगों में वॉन्टेड गैंगस्टर मुख़्तार को सरेंडर करके जेल जाना पड़ा. बृजेश सिंह और कृष्णानंद राय को लगा कि उनका सबसे बड़ा दुश्मन शांत होकर जेल में बैठा है.

इसलिए मुख़्तार की पारिवारिक सीट मोहम्मदाबाद पर कब्ज़ा जमा चुके कृष्णानंद राय उस इलाके में अपना दबदबा बढ़ाने लगे. मुख़्तार के जेल चले जाने के बावजूद बृजेश सिंह पूर्वांचल में दोबारा पूरी तरह सक्रिय नहीं हुआ. क्योंकि, वो शायद जानता था कि मुख़्तार जेल से भी पूरा नेटवर्क चलाता है. अपने दुश्मन के बारे में बृजेश का अंदाज़ा बिल्कुल सही निकला.

कृष्णानंद राय की दुर्दांत हत्या

मुख़्तार को क्रिकेट बहुत पसंद था और कृष्णानंद राय क्रिकेट से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 29 नवंबर 2005 को घर से निकले. मोहम्मदाबाद के कच्चे रास्तों पर कृष्णानंद की 2 क्वालिस गाड़ियां दौड़ रही थीं. किसी को अंदाज़ा नहीं था कि बीजेपी विधायक कृष्णानंद जहां जा रहे हैं, वहां तक कभी नहीं पहुंच पाएंगे. क्योंकि, रास्ते में खड़ा था, मुख़्तार का शार्प शूटर मुन्ना बजरंगी. ऊसरी चट्टी में जिस जगह मुख़्तार पर कृष्णानंद के लोगों ने गोलियां चलाई गई थीं, उस जगह से करीब 20 किलोमीटर दूर कृष्णानंद राय को मुन्ना बजरंगी ने घेर लिया.

बताया जाता है कि मुन्ना बजरंगी और उसके साथियों ने 6 एके 47 राइफलों से करीब 400 राउंड फायरिंग की. पोस्टमॉर्टम के दौरान बीजेपी विधायक कृष्णानंद और उनके 6 साथियों से शरीर से 67 गोलियां बरामद हुई थीं.

पूर्वांचल के गैंगवार में हत्याएं तो बहुत हुई थीं, लेकिन जिस तरह विधायक कृष्णानंद को मारा गया, उसने मुख़्तार के शूटर मुन्ना बजरंगी का ख़ौफ़ पूरे यूपी में फैला दिया. कृष्णानंद राय की हत्या ने राजनीतिक, सामाजिक और अपराधों की दुनिया में तहलका मचा दिया था. बृजेश सिंह के राजनीतिक संरक्षक कृष्णानंद राय को मुन्ना बजरंगी ने ख़त्म कर दिया था.

यूपी का मोस्ट वांटेड बना मुन्ना बजरंगी

बलिया-गाज़ीपुर के बॉर्डर पर कच्चे रास्ते पर गाड़ी में कृष्णानंद राय और उनके साथियों की लाशें पड़ी थीं. मुख़्तार भले ही जेल में था लेकिन पुलिस ने उसे ही साज़िश का मास्टरमाइंड माना. इस हत्याकांड के बाद यूपी समेत देशभर में सभी गैंगस्टर के बीच शूटर मुन्ना बजरंगी का ख़ौफ़ भर गया. वो सात लाख रुपये का इनामी और यूपी का मोस्ट वांटेड बन गया. मुख्तार के पूरे गैंग ने कभी इस तरह की वारदात नहीं की थी, जिस तरह की घटना को मुन्ना बजरंगी ने एके-47 के जरिए अंजाम दिया था. अपने सबसे बड़े दुश्मन की हत्या पर गैंगस्टर मुख़्तार का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था.

गैंगस्टर मुख़्तार अंसारी अब पुलिस की नज़रों में खटकने लगा. क्योंकि, विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप लगने के बाद पुलिस को लगा कि वो क़ानून व्यवस्था को ना केवल चुनौती दे रहा है, बल्कि जंगलराज फैलाने लगा है.

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