UP Assembly Election 2022: कोई नहीं भेद सका हरदोई विधानसभा सीट के ‘नरेश’ का किला, भाजपा को मिला साथ तो जगी उम्मीद: Latest News

Hardoi

उत्तर प्रदेश की राजनीति में नरेश अग्रवाल (Naresh Agrawal) का नाम एक कद्दावर नेता के रुप में लिया जाता है. वहीं जब नाम नरेश अग्रवाल का आता है तो जिक्र हरदोई विधानसभा सीट (Hardoi Assembly Seat) का भी होता है. यह वो सीट है जिस पर बीते कई वर्षों से नरेश अग्रवाल और उनके परिवार का ही दबदबा रहा है. वर्तमान में इस सीट पर नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल (Nitin Agrawal) विधायक हैं, जिन्होंने 2017 के मोदी लहर में सपा के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक का पद हासिल किया. इस चुनाव में नितिन अग्रवाल ने भाजपा के राजाबक्स सिंह को 5109 के मार्जिन से चुनाव हराया था. जानिए 2022 के चुनाव के लिहाज से क्या है हरदोई विधानसभा सीट का समीकरण…

 

जनसंघ से भाजपा तक किसी को नहीं मिली जीत

आजादी के बाद से अब तक इस सीट पर पहले कांग्रेस फिर सपा या यूं कहें की नरेश अग्रवाल (Naresh Agrawal) का ही एकछत्र राज रहा. जनसंघ और भाजपा का आज तक इस सीट पर खाता नहीं खुला. पिछले चुनाव परिणाम देखें तो 1989 अब तक पार्टी कोई भी रही हो जीते नरेश अग्रवाल (Naresh Agrawal) और उनके बेटे नितिन ही हैं. अब 2022 में होने वाले चुनावों में भाजपा को यहां से जीत मिलेगी या नहीं, ये देखने वाली बात जरूर होगी. क्योंकि वर्तमान में नरेश अग्रवाल और उनके बेटे भाजपा में शामिल हो चुके हैं.

सीट का इतिहास

हरदोई जिले में आठ विधानसभा सीटें आती हैं. सदर सीट प्रमुख है. आजादी के बाद यहां पहली बार 1951 में चुनाव हुए थे. उस समय यह सीट हरदोई (पूर्वी) नाम से पहचानी जाती थी. इस चुनाव में बाबू किन्दर लाल यहां से विधायक बने थे. इसी साल हुए उपचुनाव में कांग्रेस के चंद्रहास विधायक बने. इसके बाद 1957 में कांग्रेस के बाबू बुलाकी राम ने इस सीट पर चुनाव लड़ा और विधायक बने. वहीं 1962 में भी कांग्रेस के महेश सिंह ने इस सीट पर अपना कब्जा जमाया. 1967 में धर्मगज सिंह ने इस सीट पर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. 1969 में धर्मगज सिंह की पत्नी आशा कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंची. वहीं 1974 के चुनाव में कांग्रेस के श्रीशचंद्र अग्रवाल ने जीत हासिल की. इसके बाद 1977 में हुए चुनाव में कांग्रेस के धर्मगज सिंह ने इस सीट पर फिर कब्जा जमा लिया.

नरेश अग्रवाल ने राजनीति में रखा कदम

इसके बाद 1980 में पूर्व विधायक श्रीशचंद्र अग्रवाल ने अपने बेटे नरेश अग्रवाल (Naresh Agrawal) को कांग्रेस से चुनाव लड़ाया. इसमें नरेश अग्रवाल ने जीत हासिल कर राजनीति में कदम रखा. 1985 में कांग्रेस ने उमा त्रिपाठी को टिकट दिया और वो विधायक बनीं. 1989 में कांग्रेस ने नरेश अग्रवाल को टिकट न देकर फिर उमा त्रिपाठी को प्रत्याशी बना दिया. इससे नाराज नरेश अग्रवाल ने कांग्रेस छोड़ा और निर्दली चुनाव मैदान में कूद गए और जीत कर अपने वर्चस्व का एलान कर दिया. 1991 में कांग्रेस ने नरेश अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया औऱ वो फिर विधायक बने. इसके बाद 1993 के चुनावों में सपा और बसपा के गठबंधन के बावजूद कांग्रेस के नरेश अग्रवाल (Naresh Agrawal) ने जीत हासिल की.

2002 में थामा सपा का दामन

1996 के में नरेश अग्रवाल ने कांग्रेस और बसपा संयुक्त प्रत्याशी के रुप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इस सरकार में नरेश अग्रवाल (Naresh Agrawal) को ऊर्जा मंत्री बनाया गया था. वहीं 2002 में नरेश अग्रवाल सपा के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की. 2007 में भी नरेश ने सपा से चुनाव लड़ा और विधायक बने.

बेटे के लिए छोड़ी सीट

2008 में नरेश अग्रवाल ने अपने बेटे नितिन अग्रवाल (Nitin Agrawal) को राजनीति में लॉन्च किया, इसके लिए नरेश अग्रवाल ने विधानसभा की सदस्यता और सपा का साथ छोड़ दिया और बसपा में शामिल हो गए. वहीं 2008 में हुए उपचुनावों में बसपा के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ रहे नितिन ने जीत हासिल की थी. इसके बाद 2012 के चुनावों नितिन अग्रवाल ने सपा से जीत हासिल की. वहीं 2017 के चुनाव में मोदी लहर के बावजूद नितिन अग्रवाल (Nitin Agrawal) चुनाव जीते.

2017 विधानसभा चुनाव का परिणाम

स्थान    प्रत्याशी             पार्टी        वोट      वोट (%)

1      नितिन अग्रवाल      सपा        97735   42.43

2      राजा बक्श सिंह     भाजपा     92626   40.21

3      धर्मवीर सिंह          बसपा       30628   13.30

जीत का अंतर– 5109

2012 विधानसभा चुनाव का परिणाम

स्थान     प्रत्याशी           पार्टी         वोट        वोट (%)

1      नितिन अग्रवाल      सपा      110063      54.60

2      राजा बक्श सिंह     बसपा      66381       32.93

3      सुखसागर मिश्र     कांग्रेस      16011        7.95

जीत का अंतर– 43682

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UP Assembly Election 2022: कोई नहीं भेद सका हरदोई विधानसभा सीट के ‘नरेश’ का किला, भाजपा को मिला साथ तो जगी उम्मीद: Latest News
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