LAC: विस्तारवादी नीति से बाज नहीं आ रहा चीन, जानिए 13वें दौर की कमांडर लेवल बातचीत में कहां फंसा पेंच: Latest News

Chinese President Xi Jinping (1)

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चुशुल में 13वें दौर की कोर कमांडर मीटिंग के बाद ये साफ हो गया है कि चीन अपनी विस्तारवादी नीति से पीछे नहीं हटना चाहता. ऐसे में भारत के लिए सख्त कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता. ये कौन-कौन से कदम हो सकते हैं… इसका हम विस्तार से विश्लेषण करेंगे. करीब 17 महीने बाद LAC पर चीन एक बार फिर सिर उठाने लगा है. 13 राउंड की बातचीत के बाद भी मई 2020 जैसी स्थिति बहाल नहीं होती दिख रही है. इस बीच चीन की प्रोपेगेंडा मीडिया ने भारत को गीदड़भभकी दी है.

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि अगर युद्ध होगा तो दिल्ली की हार होगी. ग्लोबल टाइम्स ने ट्वीट किया है, “नई दिल्ली एक बात स्पष्ट रूप से समझ ले..कि जिस तरीके से वो सीमा को हासिल करना चाहती है उस तरीके से उसे वो नहीं मिलेगी..अगर युद्ध शुरू होता है तो निश्चित रूप से उसे हार का सामना करना पड़ेगा.”

दरअसल, ये चीन की बौखलाहट है… क्योंकि गलवान की घटना के बाद से वो अपमान की आग में जल रहा है. भारत से बदले की फिराक में बौखला रहा है. इसीलिए रविवार को जब दोनों देशों के बीच 13वें राउंड की कमांडर लेवल बातचीत हुई, तो उसमें भी चीन LAC पर गतिरोध खत्म करने को तैयार नहीं हुआ. इस मीटिंग में भारत की तरफ से लेह स्थित 14वीं कोर यानी फायर एंड फ्यूरी कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने मीटिंग में हिस्सा लिया जबकि चीन की तरफ से दक्षिणी शिन्जियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के कमांडर ने मीटिंग का प्रतिनिधित्व किया.

अब सवाल उठता है कि 13वें दौर की कमांडर लेवल बातचीत में पेंच कहां फंसा? क्योंकि 13वें दौर की इस सैन्य वार्ता के पहले दोनो देशों के विदेश मंत्री दुशांबे में मिले थे. वहां दोनों विदेश मंत्रियों ने भारत-चीन के बाकी मुद्दों को जल्दी से जल्दी हल करने पर सहमति जताई थी, तो यहां ये जानना जरूरी है कि बाकी मुद्दे कौन से हैं? और पूर्वी लद्दाख में बातचीत के प्वांट्स कौन-कौन से हैं ?

दरअसल, LAC पर पूर्वी लद्दाख में पिछले साल अप्रैल-मई के महीने से ही तनातनी बनी हुई है. इसके बाद 15 जून को गलवान घाटी में भारतीय शूरवीरों ने चीन को उसकी गुस्ताखी का करारा जवाब दिया. इंडियन आर्मी के जवानों ने PLA आर्मी की गर्दन मरोड़ी, हड्डियां तोडीं… 20 के बदले 45 से भी ज्यादा लाशें बिछा दीं.

हॉट स्प्रिंग्स, डेपसांग और डेमचोक को लेकर गतिरोध

कुछ महीने बाद चीन ने पूर्वी लद्दाख में फिर घुसपैठ का प्रयास किया, जिसका भारतीय सैनिकों ने मुंहतोड़ जवाब दिया. इसी दौरान भारतीय जवानों ने लद्दाख की ऊंची चोटियों पर पकड़ बना ली. करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई पर बोफोर्स टैंक तैनात कर दिए और PLA को बैकफुट पर जाने को मजबूर कर दिया. अब पूर्वी लद्दाख में गतिरोध हॉट स्प्रिंग्स, डेपसांग और डेमचोक को लेकर है. भारत और चीन के बीच विवाद इन्हीं क्षेत्र को लेकर है.

रविवार को 13वीं राउंड की कमांडर लेवल बातचीत में भी इन्हीं मुद्दों पर बातचीत हुई. भारत की तरफ से जारी बयान में बताया गया है कि चुशूल-मॉल्डो में जो मीटिंग हुई, उसमें भारत की तरफ से पूर्वी लद्दाख में पूरी तरह डी-एस्केलेशन की बात की गई, जिस पर चीन राजी नहीं हुआ. मीटिंग में भारत ने कहा कि जिस तरह धीरे-धीरे पेंगोंग झील, गलवान और गोगरा में डी-एस्केलेशन हो रहा है और वहां बफर जोन बनाए गए हैं उससे गतिरोध खत्म करने की ओर नहीं बढ़ा जा सकता.

चीन ऐसा ही बफर जोन हॉट स्प्रिंग इलाके में भी बनाना चाहता है. आपको बता दें कि 3-10 किलोमीटर के बफर जोन का मतलब है कि भारत उस इलाके में पेट्रोलिंग नहीं कर सकता. जबकि भारत पहले LAC के इन इलाकों में पेट्रोलिंग करता आया है. इसके अलावा डेपसांग और डेमचोक जैसे मुद्दे जो कि मई 2020 से शुरू हुए गतिरोध का हिस्सा नहीं हैं, उनपर चीन बातचीत करने से कतरा रहा है.

ग्लोबल टाइम्स ने भारत की मांग को बताया अवास्तविक

मीटिंग के बाद भारतीय सेना की तरफ से जारी बयान में बताया गया कि मुलाकात में भारत की तरफ से विवाद को सुलझाने के रचनात्मक सुझाव दिए गए, जिस पर चीन सहमत नहीं दिखा. ऊपर से अपनी प्रोपेगेंडा मीडिया के जरिए उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाले फॉर्मूले पर सरकारी बयान जारी करवाया. चीन की भोंपू मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने पीएलए के वेस्टर्न थिएटर कमांड के हवाले से ट्वीट किया, “चीन और भारत के बीच रविवार को 13वें दौर की कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई…भारत अनुचित और अवास्तविक मांगों पर जोर दे रहा है, जिससे बातचीत में मुश्किलें आ रही हैं.”

दरअसल, बरसात खत्म होते ही चीनी सैनिक पूर्वी लद्दाख में फिर बिलबिलाने लगे हैं. नदी नालों से पानी उतरने के बाद वो एक बार फिर घुसपैठ की ताक में जुटे हैं. खबर है कि 17 महीने बाद एक बार फिर से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है. असलहों का जखीरा जुटाना शुरू कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन पूर्वी लद्दाख में अपने सैन्य ठिकानों और एयरबेस के निर्माण में जुटा है.

सूत्रों के मुताबिक, PLA ने लद्दाख में भारत से लगते LAC के करीब अपने सैनिकों के लिए करीब 8 नई जगहों पर मॉड्यूलर कंटेनर आधारित घरों का निर्माण किया है. इसके अलावा भारतीय सैनिकों पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरे भी लगाए हैं. चीन द्वारा सैनिकों के लिए उत्तर में कराकोरम पास के वहाब जिजला से लेकर पीयू तक शेल्टर का निर्माण किया गया है. जिन इलाकों में ये शेलटर्स बनाए गए हैं उनमें, हॉट स्प्रिंग्स, चांग ला, ताशीगोंग, मंजा और चुरुप शामिल है और ये एलएसी के साथ-साथ दक्षिण की ओर बढ़ता चला जाता है. PLA ने LAC के करीब विमान-रोधी प्रणालियों के अलावा दो S-400 मिसाइल सिस्टम भी तैनात किए हैं.

भारत भी LAC पर मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार

मतलब पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी संघर्ष के 17 महीने बाद चीन एक बार फिर भारत के खिलाफ साजिश रचने की फिराक में है. इसीलिए कुछ रोज पहले भारत के सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने कहा कि जब तक सीमा पर समझौता नहीं होगा, तब चीन हरकतों से बाज नहीं आएगा. इसीलिए चीन की तैयारी के जवाब में भारत ने भी LAC पर फिर से 50-60 हजार सैनिक तैनात किए हैं.

पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना ने मेड इन अमेरिका M-777 तोपें भी तैनात कर दी हैं. चीन को सबक सिखाने के लिए पहली बार LAC पर K-9 वज्र तोपें भी तैनात की गई हैं. हालांकि ईस्टर्न लद्दाख में अब भी सबसे ज्यादा स्वदेशी 105 mm कैलिबर गन तैनात हैं. इसके अलावा राफेल, मिग-29, सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमान भी चीन को चेतावनी दे रहे हैं.

मतलब चीन एक बार फिर भारत को उकसा रहा है. डिसइंगेजममेंट की बात से पीछे हट रहा है, जबकि हकीकत ये है कि पिछले साल चीनी सैनिकों को पूर्वी लद्दाख में कड़ा सबक मिल चुका है. तब वो भारतीय सैनिकों के मुकाबले ना तो शौर्य में टिके थे और ना ही मौसम से मुकाबला करने में.

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LAC: विस्तारवादी नीति से बाज नहीं आ रहा चीन, जानिए 13वें दौर की कमांडर लेवल बातचीत में कहां फंसा पेंच: Latest News
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