Fikr Aapki: क्‍या सरकार की तरह जनता भी इस दिवाली चीन को दे पाएगी आर्थिक चोट? पढ़ें TV9 की ग्राउंड रिपोर्ट: Latest News

China Flag

चीन के खिलाफ सेना और सरकार तो अपना-अपना काम कर रही हैं. लेकिन जब कोई देश दुश्मन से लड़ता है, तो दुश्मन को जवाब देना सिर्फ सैनिकों का और सरकार का ही काम नहीं होता. बल्कि देशवासियों को भी पूरी शिद्दत के साथ उसमें कूदना पड़ता है. चीन के लिए पैसे से बड़ा कुछ नहीं है. पैसा ही चीन की सबसे बड़ी ताकत है. तिजोरी भरने के लिए चीन की नजरें दिवाली पर हैं. अपना माल भारतीय बाजारों में बेचकर 40 हजार करोड़ रुपये चूसकर तिजोरी भरने की फिराक में हैं और फिर उसी पैसे से चीन वो हथियार बनाता है, उन फौजियों को ट्रेन्ड करता है, जो सरहद पर हिंदुस्तान के खिलाफ हिमाकत करते हैं.

साफ है कि चीन को कंट्रोल करने के लिए. उसे कमजोर करने के लिए उसकी तिजोरी पर चोट करना सबसे जरूरी है. जिसके लिए सरकार ने कारोबारी मोर्चे पर बीते डेढ़ साल में कई कदम उठाए हैं. कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं. लेकिन एक झटके में चीन से व्यापारिक रिश्ते खत्म नहीं किए जा सकते हैं. क्योंकि WTO यानी वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन की कानूनी पेंचीदगियों ने हाथ बांध रखे हैं. लेकिन हमारे और आपके हाथ खुले हुए हैं. हम और आप इस दिवाली चीन को सबसे बड़ी चोट दे सकते हैं. बस जरूरत है, तो सिर्फ मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स खरीदने की. लोकल के लिए वोकल होने की. ये अपील आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की.

हिंदुस्तान ये कर सकता है और पिछले साल ये करके दिखा भी चुका है. हर साल दिवाली के सीजन में देश भर में करीब 70 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है. जिसमें 40 हजार करोड़ रुपये के चाइनीज प्रोडक्ट्स बिकने से ड्रैगन की तिजोरी भर जाती थी. लेकिन कोरोना और गलवान के बाद चीन के बहिष्कार की जो मुहिम चली, उससे पिछले साल चीन को सीधे तौर पर 40 हजार करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा था.

क्‍या फिर चीन को आर्थिक चोट देगा हिंदुस्‍तान?

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस बार भी चीन को हिंदुस्तान एक बड़ी आर्थिक चोट देगा? क्या इस बार भी 130 करोड़ हिंदुस्तानी दिवाली पर चीन का बायकॉट करके उसका दिवाला निकालेंगे? ये जानने के लिए हमारे संवाददाताओं ने कुछ शहरों में बाजारों में जाकर हालात देखे और जाना कि क्या वाकई ये दिवाली चीन को सबक सिखाने वाली होगी.

ये जानने के लिए TV9 भारतवर्ष के रिपोर्टर्स ने अलग-अलग शहरों में अलग-अलग बाजारों का रुख किया. जमीनी हालात जानने के लिए, कारोबारियों और कस्टमर का मिजाज जानने के लिए सबसे पहले आपको दिल्ली के सदर बाजार की ग्राउंड रिपोर्ट दिखाते हैं. जहां टीवी9 संवाददाता सुमंत कुमार पहुंचे. पूरा बाजार त्योहारों में सजावट के सामान से पटा दिखा और बड़ी तादाद में लोग खरीदारी करते दिखे. लेकिन उनकी तरजीह क्या है? चाइनीज प्रोडक्ट या मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स. ये जानने के लिए हमने उनसे बात की.

हम बाजार में कई दुकानों में गए, कई लोगों से बात की. करीब-करीब सभी का कहना था बायकॉट चाइना. पीएम मोदी के वोकल फॉर लोकल के आह्वान का असर दिखाई पड़ा. जज्बे और सोच की वजह से चाइनीज प्रोड्क्टस की डिमांड घटी है और भारतीय सामानों की डिमांड बढ़ी है. इसके चलते दुकानदारों को भी चाइनीज प्रोडक्ट्स को रखने और बेचने की मजबूरी से निजात मिल गई है. दुकानदार ज्यादा से ज्यादा लोकल प्रोडक्ट्स बेच रहे हैं.

दिल्‍ली के बाजारों में मेड इन इंडिया की डिमांड

हमारी पड़ताल में दिल्ली के सदर बाजार में मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स की डिमांड ज्यादा है. चाइनीज प्रोडक्ट्स की कम. थोड़ा महंगा होने के बावजूद ग्राहक और दुकानदार भारत में बनी चीजों को तरजीह दे रहे हैं. लेकिन दिल्ली से करीब 250 किलोमीटर दूर चंडीगढ़ में टीवी9 भारतवर्ष संवाददाता मोहित मल्होत्रा को अलग ही तस्वीर देखने को मिली. ये तस्वीरें, चंडीगढ़ सेक्टर 18 की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक मार्केट की हैं. जहां जगमगा रही लड़ियां, झालरें हर किसी का मन मोह रही हैं. लेकिन इनमें से एक भी मेड इन इंडिया नहीं है. सब की सब सौ फीसदी मेड इन चाइना लाइट्स का कब्जा है.

पास चीन की फैंसी लाइट्स का कोई ऑप्शन नहीं

चंडीगढ़ के दुकानदारों के पास चीन की फैंसी लाइट्स का कोई ऑप्शन नहीं है, इसका नतीजा ये हुआ है कि ग्राहकों के पास मेड इन इंडिया लाइट्स खरीदने का ऑप्शन नहीं है. मेड इन चाइना का कब्जा सिर्फ लड़ियों पर ही नहीं है, बल्कि दिवाली के मौके पर घरों में लगाए जाने वाले और गिफ्ट किए जाने वाले लैंप्स और बाकी फैंसी लाइटिंग के सामान पर भी है.

बॉयकॉट चाइना की जो मुहिम चली थी, उससे चीन से सारा का सारा आयात नहीं रोका जा सकता है. क्योंकि बहुत सारी चीजों के लिए कच्चा माल चीन से ही मिलता है. उसके लिए हिंदुस्तान को तैयार होने में थोड़ा वक्त लगेगा. लेकिन बहुत सी चीजें ऐसी हैं, जिनका आयात रोका जा सकता है. जैसे त्योहारों पर साज-सज्जा का सामान. जिसमें सबसे पहले जिक्र आता है लाइट्स का. डेढ़ साल पहले तक इस फेस्टिव सीजन में 40 हजार करोड़ रुपये तक का चाइनीज सामान बिक जाता था और चीन इस बार भी यही चाहता है. लेकिन अगर हम और आप चाह लें, मिट्टी के दीयों से दिवाली पर घर को रोशन करें और थोड़े से ज्यादा पैसे देकर अगर मेड इन इंडिया लाइट्स खरीदें, तो उससे चीन को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है. सिर्फ चाइनीज लाइट के बहिष्कार से चीन को 5 से 6 हजार करोड़ रुपये की चोट पहुंच सकती है.

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