Fikr Aapki: जम्‍मू कश्‍मीर में आतंकियों के निशाने पर देश भक्‍त कश्‍मीरी, टारगेट किलिंग की बड़ी साजिश रच रहा पाकिस्‍तान: Latest News

Jammu Kashmir Terror Attack

आतंकवादी कश्मीर घाटी में वैमनस्य फैलाना चाहते हैं और कश्मीरी पंडितों, सिखों समेत सभी गैर मुस्लिमों को डराना चाहते हैं. क्योंकि अनुच्छेद 370 हटने के बाद उनकी दाल नहीं गल पा रही है. सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन ऑलआउट चला रखा है. जिसमें रोज उनके साथी मारे जा रहे हैं. तो दूसरी ओर कश्मीरी पंडित घर वापसी कर रहे हैं. इसीलिए दहशतगर्दों ने टारगेट किलिंग शुरू की है और इसका मकसद क्या है. इसे आतंकी संगठन टीआरएफ के कबूलनामे से समझा जा सकता है.

टीआरएफ ने जो बयान जारी किया है उसके अनुसार, उन्‍होंने दो टीचर्स की हत्‍या इसलिए नहीं की क्‍योंकि ये शिक्षक भारत के सबसे बड़े पर्व 15 अगस्त और 26 जनवरी पर स्कूल में कार्यक्रम कराते थे. बल्कि इसलिए की क्‍योंकि इन शिक्षकों की अगुवाई में बच्चे 15 अगस्त और 26 जनवरी पर स्कूल के कार्यक्रमों में शामिल होने लगे थे. ये शिक्षक श्रीनगर में राष्ट्रवाद का चेहरा बन गए थे, राष्ट्रवाद का प्रचार कर रहे थे.

देश भक्त कश्‍मीरियों को डराने की साजिश

यानी साफ है कि अब देश भक्त कश्‍मीरियों को डराने की साजिश रची जा रही है. इसलिए जरूरी है कि इन आतंकियों को करारा जवाब मिले. ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ पाकिस्तान की शह पर बने आतंकी संगठन टीआरएफ में लश्कर, हिजबुल, जैश और अल-बद्र के आतंकी शामिल हैं. अब्बास शेख नाम के आतंकी को TRF की कमान दी गई है और पाकिस्तान में बैठे आतंकी TRF के आतंकियों को हैंडल कर रहे हैं.

पाकिस्तान की शह पर ही TRF ने टारगेट किलिंग शुरू किया है जिससे पूरे देश का खून खौल उठा है. क्योंकि कल एक बेटी ने आतंकियों को ललकार लगाई थी और आज एक मां चीत्कार कर रही है. ‘अरे मुझे गोली मारो ना, मुझको मारो गोली, उसको क्यों मारी है, मुझे मारो गोली, उसने क्या किया था?’ ये कश्मीर घाटी में बिलख रही एक मां है. जिसपर गम का पहाड़ टूट पड़ा है, वो कह रही है. गोली मारनी है तो मुझे मारो, मेरे बच्चों को गोली क्यों मारी, बच्चों ने हत्यारों का क्या बिगाड़ा?

कहीं एक पत्नी और मां के आंखों के आंसू नहीं थम रहे, वो बिलख-बिलख कर रो रही हैं. बार-बार बेसुध हो रहीं हैं फिर एक बार संभलती हैं. लेकिन दर्द ऐसा है कि संभलने नहीं दे रहा. ना आंसू रुक रहे हैं और ना ही दर्द कम हो रहा है.

दिन दहाड़े दो टीचरों की हत्‍या

हर पल कलेजा चाक हो रहा है. इनमें से किसी ने बेटा खोया है, किसी ने बहू तो किसी ने भाई. आतंकियों का दिया जख्म इनके सीने में शूल की तरह चुभ रहा है. बिलखते इन लोगों ने भी अपने 2 सहयोगी सतिंदर कौर और दीपक चांद को आंखों के सामने से हमेशा के लिए खो दिया. इनके दोनों सहयोगी दिन दहाड़े, स्कूल परिसर में आतंकियों की गोलियों के शिकार हो गए. दहशतगर्दों ने स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर को लाइन में खड़ा कर, पहचान देखकर, आईडी कार्ड चेक कर गोली मारी. जिस तरह से आतंकियों ने पहचान देखकर खून बहाया. कश्मीरी पंडितों के परिवार वाले भी सन्न हैं.

कश्मीर में जिस तरह से एक मां, एक पत्नी चीख रही है, बिलख रही है. ये तस्वीर बता रही है. कैसे विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहे कश्मीर के अमन और चैन को फिर से रौंदने की साजिश रची जा रही है. ये हत्या सिर्फ एक सिख की बेटी की, या फिर एक कश्मीरी पंडित के बेटे का कत्ल नहीं है. ये कश्मीरियत का कत्ल है. ये घाटी के भाईचारे की हत्या है. दहशगर्दों की गोली ने कश्मीरियरत, जम्हूरियत और भाईचारे को लहुलूहान किया है. ये घाटी में अमन और शांति को तार-तार करने का षड्यंत्र है. उम्मीद है कि सेना, सुरक्षाबल और पुलिस जल्द ही इस साजिश से निपटने में कामयाब होंगे.

1990 का दौर दोहराने की साजिश

आतंकी कश्मीर में फिर 1990 के खूनी दशक जैसा माहौल खड़ा करना चाहते हैं. 1990 का दशक वो वक्त था जब कश्मीर में आतंक ने पैर जमाना शुरू किया था. तब आतंकियों के डर से जान बचाने के लिए कश्मीरी पंडितों ने घाटी छोड़ दी थी. कश्मीरी पंडितों को डराने के लिए आतंकियों ने टारगेट किलिंग की थी. घाटी में चुन-चुन कर कश्मीरी पंडितों की हत्या की गई थी. 1990 से साल 2000 के बीच 26 हजार 226 लोगों की जान गई थी. ये आतंकी अब उन कश्मीरी पंडितों को डराना चाहते हैं जो 1990 की दहशतगर्दी के दौर में भी कश्मीर में डटे रहे. कश्मीर को इस्लामी राज्य बनाने की साजिश रचने वाले आतंकियों और अलगाववादियों की आंखों में ये कश्मीरी पंडित और हिंदू चुभते रहे हैं. इसलिए ये दहशतगर्द फिर से टारगेट किलिंग कर रहे हैं. इस टारगेट किलिंग के जरिए ये दहशत गर्द फिर कश्मीर में माहौल बिगाड़ना चाहते हैं.

दशहतगर्दों का सफाया इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कश्मीर में जो भी शख्स जिंदगी की, खुशहाली की, शिक्षा की, मुस्कुराहट की बात करता है उसे आतंकी निशाना बना रहे हैं. पिछले दो दिनों में आतंकियों ने दवा का कारोबार करने वाले माखनलाल बिंदरू की हत्या की. बिंदरू श्रीनगर में जरूरतमंदों की मदद करने वाले प्रमुख लोगों में एक थे. वो धर्म की दीवार से परे जाकर जरूरतमंद लोगों की मदद करते थे. जिंदगी बचाते थे.

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