लूटघर: सारे पैसे देने के बावजूद आज 7 साल बाद भी बायर्स को नहीं मिल सका अपना घर, अंतरिक्ष बिल्डर ने GDA को नहीं चुकाए 42 करोड़: Latest News

Antriksh

आप हर महीने एक ऐसे घर के लिए ईएमआई दे रहे हैं, जो अधूरा है, जिसका बिल्डर फरार है और जिसके लिए अदालतों के चक्कर लगाए जा रहे हैं, तो फिर इसे घर नहीं, लूटघर कहा जाना चाहिए. लूटघर में आज की रिपोर्ट एक ऐसे प्रोजेक्ट के बारे में, जिसके बिल्डर पर 42 करोड़ रुपए लेकर बैठ जाने का आरोप है. इन इमारतों में किसी ने रिटायरमेंट के बाद मिले सारे पैसे लगा दिए तो किसी ने गांव की जमीन को बेचकर मिले लाखों रुपए.

कैसे जिंदगी भर की कमाई को निवेश करने के बाद सपनों का घर लूटघर बन जाता है, इसकी बानगी हम आपको दिखा रहे हैं गाजियाबाद से. मेरे पीछे आप जो बिल्डिंग देख रहे हैं, ये अंतरिक्ष बिल्डर की है. 2010 में प्रोजेक्ट को शुरू किया गया और कहा गया कि 2014 तक घर मिल जाएगा, लेकिन घर नहीं मिला. लोगों ने जो सपना देखा आशियाना का वो पूरा नहीं हो पा रहा है. लोगों को आज 10 साल बाद भी कोई उम्मीद नहीं दिख रही है. कई लोगों ने नौकरी में रहते बुक किया अब वो रिटायर भी हो चुके हैं, अभी भी उनको किराए के मकान में रहना पड़ रहा है. आप समझ सकते हैं रिटायर आदमी को किराया देना कितना भारी पड़ता है.

अंतरिक्ष ग्रुप के इस प्रोजेक्ट में अटके हैं कुल 1,456 फ्लैट्स 

आगे बढ़ने से पहले आपको कुछ जरूरी जानकारी दे दें. गाजियाबाद में एनएच 24 के किनारे बन रहे अंतरिक्ष ग्रुप के इस प्रोजेक्ट में कुल 1,456 फ्लैट्स अटके पड़े हैं. 12 एकड़ में अंतरिक्ष संस्कृति के नाम से प्रोजेक्ट शुरू हुआ. आधे-अधूरे कुल 10 टावर खड़े किए गए. हर टावर में 21 फ्लोर का प्लान बताया गया. बिल्डर ने साल 2010 में प्रोजेक्ट को लॉन्च किया और वादा किया कि 2014 तक मकान मिल जाएगा, लेकिन आज 7 साल बाद भी बायर्स को उम्मीद की कोई किरण नहीं दिख रही है, क्योंकि 2018 में प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी गई. कहानी फिर एक बार वही बिल्डर ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के 42 करोड़ रुपए नहीं चुकाए.

मिलिए चंद्र प्रकाश चौहान से. 2012 में फ्लैट बुक कराया और तब कीमत थी 45 लाख रुपए. गांव पर पुश्तैनी जमीन बेचकर 30 लाख रुपए डाउन पेमेंट किया. बाकी के लिए लोन लिया. दो दिन पहले लोन भी चुका दिया, लेकिन जब मकान ही नहीं मिला तो आखिर मिला क्या? बिल्डर ने बायर्स से 90 प्रतिशत से ज्यादा पैसे ले लिए, लेकिन जीडीए को नहीं चुकाया. अब लोग रेरा से लेकर उपभोक्ता फोरम तक चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन नई तारीख के अलावा कुछ भी हाथ नहीं लग रहा. जैसा कि बोलते हैं माइट इज राइट, हिंदुस्तान में ऐसा ही चलता है. उसने सारे कोर्ट से स्टे ले लिया. पिछली चार तारीखों में यही कहा जा रहा हैकि ये फाइनल डेट है.

2016-17 में बायर्स ने ने बिल्डर के खिलाफ दर्ज करवाई एफआईआर 

बायर्स ने कहा कि NCDRC में गए वहां पर भी कुछ नहीं हुआ, सुनवाई पर जज उठकर चले जाते हैं. साल 2016-17 में बायर्स ने ने बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई, लेकिन बिल्डर ने हाई कोर्ट से स्टे ले लिया. कोरोना के टाइम में पेमेंट कट गई है. अधूरे बने इन फ्लैट्स के लिए सैकड़ों लोग पिछले 10 सालों से ईएमआई चुका रहे हैं, वो भी तब जबकि सिर पर छत फिलहाल एक सपना है. एक बायर्स ने कहा कि उम्मीद थी कि शादी करके जब मेरे बच्चे हो तो मैं इस घर में रहूंगा, बच्चों को अच्छी परवरिश दूंगा, अपनी छत नहीं थी, लेकिन 2021 में भी मेरे और बच्चों के ऊपर रहने की छत नहीं है. किराए के मकान में रहकर बराबर किस्त भरते हैं, इसकी वजह से हमारा मानसिक संतुलन भी खराब हो रहा है, घर में आपस में लड़ाई होती है.

बिल्डर का पक्ष जानने के लिए हम उसके दफ्तर पहुंचे. अंतरिक्ष बिल्डर पर आरोपों पर जवाब लेने के लिए हम उनके पते पर हैं, लेकिन यहां आने पर पता चला है कि बिल्डर कहीं और शिफ्ट कर गया है. अंतरिक्ष ग्रुप के दफ्तर में कोई नहीं मिला तो हमने कंपनी के डायरेक्टर राकेश यादव को फोन भी किया. राकेश यादव ने कहा कि नवरात्र से काम शुरू हो सकता है. तीन-चार महीने में वो भी करवा देंगे. बिल्डर ने फोन पर ज्यादा बात नहीं की और ये कहकर फोन काट दिया कि दूसरे दफ्तर में मिलूंगा और हम वहां भी पहुंच गए.

आज उन्होंने मिलने की बात कही थी, लेकिन हम दफ्तर पहुंचे तो उन्होंने फोन उठाना ही बंद कर दिया. इस मामले में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने कहा कि बिल्डर ने 42 करोड़ रुपये का बकाया किस्तों में चुकाने की बात कही थी, लेकिन वो उसमें भी नाकाम रहा. साथ ही आगे कहा कि बिल्डर हमारे पास एक एप्लीकेशन लेकर आया था कि बकाया पैसा एक साथ नहीं दे सकते, किस्त में पेमेंट करेंगे. प्राधिकरण उसके लिए तैयार है, बिल्डर ने 3 करोड़ रुपए जमा कराने के लिए कहा था. बिल्डर ने तारीख दी, लेकिन उसपर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि ऐसी तारीखें, वो पिछले 7 साल से दे रहा है. दिक्कत ये है कि इस देश के मिडिल क्लास को सरकारें और अदालतें भी आम तौर पर तारीख और आश्वासन ही देती हैं. कल आपको लूटघर में एक नई रिपोर्ट दिखाएंगे. इस पूरी सीरीज को विस्तार से देखने के लिए आप tv9hindi.com पर जा सकते हैं, वहां आपको सीरीज के सारे एपिसोड एक साथ मिलेंगे.

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PRAJA PARKHI: लूटघर: सारे पैसे देने के बावजूद आज 7 साल बाद भी बायर्स को नहीं मिल सका अपना घर, अंतरिक्ष बिल्डर ने GDA को नहीं चुकाए 42 करोड़: Latest News
लूटघर: सारे पैसे देने के बावजूद आज 7 साल बाद भी बायर्स को नहीं मिल सका अपना घर, अंतरिक्ष बिल्डर ने GDA को नहीं चुकाए 42 करोड़: Latest News
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