लूटघर सीरीज: गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने आशियाने के नाम पर बनाया मजाक, तुलसी निकेतन में 260 परिवार ‘नर्क’ में रहने को मजबूर: Latest News

Ghaziabad Development Authority

आपने EWS का नाम सुना होगा. ये आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग होता है, जिसके पास घर खरीदने की हैसियत नहीं होती इसलिए सरकार इनकी सहायता करती है. इन्हें सस्ते में घर बनाकर दिया जाता है, लेकिन गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने इनके लिए एक ऐसी कॉलोनी बनाई है, जो आशियाना कम मजाक ज्यादा लगती है. हमारी इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी देखिए.

उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद में साहिबाबाद की ओर जाने पर तुलसी निकेतन नाम का ये चमचमाता हुआ बोर्ड दिखता है, लेकिन तुलसी निकेतन में दाखिल होते ही दो हजार दो सौ साठ परिवारों का एक नर्क नजर आता है. सड़कें चलने लायक नहीं हैं. मकान की दीवारों से प्लास्टर तक झड़ चुके हैं और अब तो मकानों में पेड़ पौधे भी उग आए हैं. ये गाजियाबाद विकास प्राधिकरण यानी जीडीए की बसाई एक कॉलोनी है, जो बनने के दस साल के अंदर ही जर्जर हो गई और उसके बाद भी दो दशक से लोग जान जोखिम में डालकर इन घरों में रह रहे हैं.

महज 30 साल के अंदर हालत ऐसे हैं, बिन बारिश के गलियों में कीचड़ फैला हुआ है. सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि ये जगह रहने लायक नहीं हैं. दीवारों पर पेड़ उग आए हैं. ये EWS कॉलोनी है यानी आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए बना आशियाना, लेकिन जीडीए से इसका अर्थ समझने में जाने क्या गलती हो गई कि उसने मकान ही कमजोर बना दिए. कमजोर भी इतने कि गाजियाबाद नगर निगम ने इसे 2018 में खतरनाक घोषित कर दिया. लोगों को घर छोड़ देने. पूरी कॉलोनी को तोड़कर नए कंस्ट्रक्शन का सुझाव भी दिया है और ये ही इस कॉलोनी का सच भी है.

महज 30 साल में फ्लैट्स के क्या हाल हैं ये देख लीजिए. झुककर निकलते हैं. सीमेंट झड़ चुका है. सरिया बाहर आ गए हैं. बरसात के दिन में पैंट ऊपर करके निकलना पड़ता है. सीवर पड़ जाए, नालियां साफ हो जाएं, दो पंप एलॉट किए हैं, लेकिन वो कागजों में हैं. दरअसल सारी समस्या इस कॉलोनी के बगल से गुजरते एक नाले की है, जिसका पानी ओवरफ्लो होकर कॉलोनी में घुसता है. अगर निगम ने उस नाले की दीवार ऊंची करा दी होती तो लोगों के घरों में सीवर का पानी नहीं घुसता और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बना घर शायद इतना कमजोर भी नहीं हुआ होता, जिसमें हर वक्त जान का खतरा बना रहता है.

‘बिजली के लिए भी संघर्ष किया’

रेजिडेंट आरती शर्मा ने कहा है कि बच्चों को इधर उधर भेजना पड़ता है. खाने तक का सामान बेकार हो जाता है. रेजिडेंट शमां बेगम ने कहा कि गरीब ही लोग रह रहे हैं. छत तक टपक रही है. रेजिडेंट रघुनाथ ने कहा कि दिल्ली के नजदीक है, लेकिन रहने लगे तो हालत खराब हो गई. बिजली के लिए भी संघर्ष किया. बिजली ने लाइट तक नहीं दी. हमने अंधेर निकेतन नाम ही रख दिया. इन लोगों का मुद्दा उठाने के लिए हम जीडीए के वाइस चेयरमैन के चमचमाते दफ्तर तक भी पहुंचे और उन्होंने जो कहा वो भी सुन लीजिए.

जीडीए के उपाध्यक्ष कृष्णा करुणेश ने कहा कि तीस साल पहले बनाकर हैंडओवर कर दिया था, लेकिन मेंटिनेंस नहीं किया गया. कुछ डेवलपर से बात कर रहे हैं.लोगों की सहमति के बिना कुछ नहीं कर सकते हैं. अब सहमति बने भी तो कैसे. इस कॉलोनी में दस-बीस परसेंट ही लोगों के घरों की रजिस्ट्री है और उन्हें डर है कि अगर उन्होंने घर छोड़ दिया तो बेघर हो जाएंगे.

रेजिडेंट बाबर खान ने कहा कि रजिस्ट्री बीस परसेंट की है. अब जीडीए कह रहा है कि जिनकी रजिस्ट्री है उन्हें ही दोबारा मकान देंगे. रजिस्ट्री खुद ही बंद कर देते हैं. ऑफिस जाते हैं तो पैंट कंधे पर डालकर और जूते पन्नी में लेकर जाते हैं. ठेकेदार की भी गलती है. ये 10 साल में ही जर्जर हो गई थी. बीमा कराए होंगे तभी रहते हैं. रेजिडेंट लक्ष्मी ने कहा कि इतना पैसा है नहीं कि कहीं और जाकर रह सकें. दो साल से बहुत पानी अंदर जा रहा है.

मकान मेंटिनेंस की कमी से कमजोर हुए

एक बात और, जीडीए ने हमें बताया कि ये मकान मेंटिनेंस की कमी से कमजोर हुए. ना कि कमजोर बने थे. इस दिक्कत को भी हमने सफाई कर्मचारी से समझने की कोशिश की. सफाई कर्मचारी अशोक चौटाला ने कहा कि 94 में यहां लगे थे. हमें जीडीए ने कुछ नहीं दिया. कर्मचारी निकाल ही दिए. ठेकेदार को लगा दिया. आठ हजार मिलते हैं. कम से कम 18 हजार होना चाहिए. 2022 फ्लैट पर 10-12 कर्मचारी रखे हुए हैं.

सच ये है कि विकास के इस दौर में गाजियाबाद के नगर निगम और विकास प्राधिकरण ने मिलकर भ्रष्टाचार की एक नई परिभाषा गढ़ी है. जब तक ये इमारतें मौजूद रहेंगी दोनों विभागों पर कलंक के टीके की तरह चमकती रहेंगी. तीस साल के अंदर अगर किसी कॉलोनी में छतों पर घास उग आए और छत तक से प्लास्टर झड़ जाए, तो विभागों को खुद को दुरुस्त करने की जरूरत है. एक्शन में आने की जरूरत है और एक्शन लेने की जरूरत है, जो अफसरशाही को शायद ही सूट करे.

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PRAJA PARKHI: लूटघर सीरीज: गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने आशियाने के नाम पर बनाया मजाक, तुलसी निकेतन में 260 परिवार ‘नर्क’ में रहने को मजबूर: Latest News
लूटघर सीरीज: गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने आशियाने के नाम पर बनाया मजाक, तुलसी निकेतन में 260 परिवार ‘नर्क’ में रहने को मजबूर: Latest News
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